पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने करीब 23 मिनट के भाषण के दौरान जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष का जिक्र करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कथित समय पर हस्तक्षेप के लिए धन्यवाद दिया। शरीफ ने कहा कि दक्षिण एशिया को दोबारा 2025 जैसी स्थिति में पहुंचने से रोकने के लिए कश्मीर मुद्दे का न्यायपूर्ण और निष्पक्ष समाधान जरूरी है। पाकिस्तान की ओर से कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में उठाए जाने के बाद भारत ने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के दावों का प्रतिवाद किया।
भारत का कड़ा जवाब: भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के भाषण पर जवाब देते हुए आतंकवाद और पाकिस्तान की नीतियों को मुख्य मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि महासभा में पाकिस्तान की ओर से की गई टिप्पणियों पर भारत का पक्ष स्पष्ट करना जरूरी है। गहलोत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद, धार्मिक असहिष्णुता और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से हर वर्ष दोहराए जाने वाले दावों को केवल दोहराए जाने के कारण सच नहीं माना जा सकता। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड और कश्मीर पर उसके रुख को एक साथ चुनौती दी।
ओसामा बिन लादेन का संदर्भ: भारत की ओर से जवाब देते हुए गहलोत ने ओसामा बिन लादेन का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि 9/11 हमलों के मुख्य साजिशकर्ता के रूप में पहचाना जाने वाला लादेन पाकिस्तान की प्रमुख सैन्य अकादमी के पास रह रहा था। गहलोत ने इस तथ्य का उल्लेख पाकिस्तान की ओर से सैन्य संस्थान की प्रशंसा किए जाने के संदर्भ में किया। संयुक्त राष्ट्र में 11 सितंबर को 9/11 हमलों की 25वीं बरसी के अवसर पर आतंकवाद को लेकर विशेष चर्चा भी हुई थी। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया था।
धार्मिक और लोकतांत्रिक मुद्दे: भारत ने पाकिस्तान के शासन और वहां के नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी अपने जवाब का हिस्सा बनाया। पेटल गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों की बात ऐसे समय की गई, जब भारत उसके शासन ढांचे पर सवाल उठा रहा है। उन्होंने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन और देश के वास्तविक शासक को दी गई आजीवन छूट का उल्लेख किया। इसके साथ ही धार्मिक असहिष्णुता के मुद्दे पर उन्होंने ईशनिंदा कानूनों और अल्पसंख्यकों की स्थिति का जिक्र किया। भारत की ओर से पहले भी संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और महिलाओं की स्थिति से संबंधित मुद्दे उठाए जाते रहे हैं।
पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र का मुद्दा: कश्मीर पर जवाब देते हुए भारत ने जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताया। पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर का उल्लेख करते हुए वहां के लोगों की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने रावलकोट के लोगों का उदाहरण देते हुए लंबे समय से जारी कथित हत्याओं, हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने की बात कही। दूसरी ओर, शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में कश्मीर के समाधान को दक्षिण एशिया में भविष्य के संघर्ष को रोकने से जोड़ा था। इस तरह संयुक्त राष्ट्र महासभा में दोनों देशों ने कश्मीर को लेकर अपने-अपने आधिकारिक रुख दोहराए।
ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख: भारत ने अपने जवाब में आतंकवाद के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई का भी संदर्भ दिया। भारत के अनुसार, 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था। भारत ने कहा कि इस कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया। पेटल गहलोत ने सीमा पार आतंकवाद को भारत और पाकिस्तान के बीच मुख्य मुद्दा बताते हुए कहा कि भारत अपने बचाव के अधिकार का इस्तेमाल जारी रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद जारी रहने पर उसके परिणाम होंगे। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की ओर से दिया गया जवाब इस बात पर केंद्रित रहा कि पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी दावों के साथ उसके आतंकवाद और शासन से जुड़े रिकॉर्ड को भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने देखा जाना चाहिए।














































