पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने संघर्ष को रोकने और कूटनीतिक बातचीत का रास्ता खोलने के लिए अमेरिका के सामने सात दिन की योजना रखी थी। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में बताया कि प्रस्ताव के तहत कुछ शर्तें पूरी होने के बाद सातवें दिन होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और उसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक बातचीत शुरू करने की योजना थी। ईरान ने यह प्रस्ताव मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया था। अरागची ने इसे इसी साल जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुई समझौता प्रक्रिया के एक समझौता ज्ञापन जैसी व्यवस्था बताया। उनका कहना था कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले किसी समझौते पर पहुंचना दोनों पक्षों के लिए बेहतर होगा।
ईरान की कूटनीतिक तैयारी: अरागची ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल के साथ मुलाकात के दौरान कहा कि ईरान ने अमेरिका को बातचीत आगे बढ़ाने के लिए अपनी शर्तों और जरूरतों की जानकारी दे दी है। उनके मुताबिक, क्षेत्र में सुरक्षा बहाल करने के लिए ईरान के खिलाफ अमेरिकी हस्तक्षेप और आक्रामक कार्रवाई समाप्त करना जरूरी है। ईरानी विदेश मंत्री ने अपने देश के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि ईरान कूटनीति के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है और उसकी बातचीत की इच्छा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव में संघर्ष को रोकने के साथ-साथ परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत के लिए एक स्पष्ट क्रम तय करने की कोशिश की गई थी।
अमेरिका का जवाब: ईरान की सात दिन की योजना के सामने आने के बाद अमेरिका के रुख को लेकर स्थिति और महत्वपूर्ण हो गई। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस सात दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को कथित तौर पर अस्वीकार कर दिया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा कि वह नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर फिर से बमबारी शुरू कर सकते हैं। यदि यह रिपोर्ट सही है, तो इससे बातचीत के जरिए तत्काल तनाव कम करने की संभावना प्रभावित हो सकती है। इसी संदर्भ में ट्रंप का संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिया गया बयान भी महत्वपूर्ण है, जिसमें उन्होंने ईरान को लेकर समझौते और सैन्य कार्रवाई के दो विकल्पों की चर्चा की थी।
ट्रंप का संयुक्त राष्ट्र बयान: 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोलते हुए ट्रंप ने कहा था कि उनके सामने ईरान को लेकर एक बड़ा फैसला है। उन्होंने एक ओर ऐसा समझौता करने की संभावना बताई, जिससे ईरान का पुनर्निर्माण हो और वह अधिक मजबूत देश बने, जबकि दूसरी ओर उन्होंने इस्लामिक रिपब्लिक को तेजी से खत्म करने की संभावना का उल्लेख किया था। ट्रंप ने यह भी कहा था कि उनका मानना है कि अमेरिकी चुनाव के ठीक बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाएगा। उनके अनुसार, ईरान के पास समझौता न करने का कोई कारण नहीं होगा। इस बयान के बाद ईरान की ओर से सात दिन की योजना सामने आने और उसके कथित तौर पर अस्वीकार किए जाने से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्थिति पर ध्यान और बढ़ गया है।
जून के समझौते पर अलग-अलग दावे: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने जून में हुए समझौते के आगे न बढ़ने के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ एक समझौता किया था और उस पर हस्ताक्षर होने के बाद उसका ढांचा भी तय किया गया था। पेजेश्कियन के अनुसार, ईरान उस समझौते के आधार पर आगे बढ़ने के लिए तैयार था। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान ने बंद नहीं किया था और उस समय वह खुला हुआ था। दूसरी ओर, अरागची ने अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि बातचीत के बीच हुई ऐसी कार्रवाइयों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ईरान ने होर्मुज में असुरक्षा के लिए खुद को जिम्मेदार बताए जाने से भी इनकार किया है।
होर्मुज पर टिका ध्यान: ईरान के सात दिन के प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य को सातवें दिन दोबारा खोलना प्रमुख शर्तों में शामिल है। इसके बाद परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक बातचीत शुरू करने की बात कही गई थी। ईरान का कहना है कि वह शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है, जबकि अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। पेजेश्कियन ने अमेरिका पर बातचीत की जगह बमबारी का रास्ता अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि इससे समाधान के रास्ते बंद हुए। वहीं ट्रंप के कथित रुख ने भविष्य की सैन्य कार्रवाई को लेकर नया सवाल खड़ा किया है। ऐसे में पश्चिम एशिया की स्थिति, ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की प्रक्रिया पर आगे के घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहेंगे।














































