सनातन धर्म में पितृ पक्ष के दौरान आने वाली एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं। पंचांग के अनुसार इंदिरा एकादशी आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की आराधना करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही व्रत करने वाले व्यक्ति के पाप भी नष्ट होने की धार्मिक मान्यता है। पितृ पक्ष में आने के कारण इस एकादशी को पितरों की शांति और उनके कल्याण की कामना के लिए विशेष माना जाता है। यही वजह है कि श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
इंदिरा एकादशी की तारीख: वर्ष 2026 में इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर को रखा जाएगा। एकादशी तिथि की शुरुआत 5 अक्टूबर की देर रात 2 बजकर 7 मिनट से होगी और यह तिथि 6 अक्टूबर की रात 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। इस तरह उदया तिथि के आधार पर इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार फलाहारी या निर्जल व्रत रख सकते हैं। एकादशी के अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप, भोग और आरती करने की परंपरा है। चूंकि यह एकादशी पितृ पक्ष के दौरान आती है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। श्रद्धालु इस दिन व्रत के माध्यम से भगवान विष्णु की आराधना करते हुए अपने पितरों की शांति, मोक्ष और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं।
इंदिरा एकादशी के शुभ मुहूर्त: इंदिरा एकादशी के दिन पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 39 मिनट से 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। प्रातः संध्या का समय सुबह 5 बजकर 3 मिनट से 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 7 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 1 मिनट से 6 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, जबकि सायाह्न संध्या का समय शाम 6 बजकर 1 मिनट से 7 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अमृत काल रात 8 बजकर 44 मिनट से 10 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6 बजकर 17 मिनट से रात 10 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन शुभ समयों में पूजा और अन्य धार्मिक कार्य करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
इंदिरा एकादशी की पूजा विधि: इंदिरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करके वहां भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा के दौरान धूप और दीप जलाएं तथा भगवान विष्णु को तुलसी दल, पुष्प, नैवेद्य, धूप और दीप अर्पित करें। इसके बाद ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें और भगवान को भोग लगाकर उनकी आरती करें। व्रती अपनी श्रद्धा और संकल्प के अनुसार पूरे दिन फलाहारी या निर्जल व्रत रख सकते हैं। अगले दिन द्वादशी तिथि में सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की दोबारा पूजा और आरती करें। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराने और उन्हें दान-दक्षिणा देने की परंपरा बताई गई है। धार्मिक विधि पूरी करने के बाद फलाहार या सात्विक भोजन करके व्रत खोला जाता है। इस प्रकार एकादशी से लेकर द्वादशी तक पूजा और व्रत से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है।
व्रत के दौरान धार्मिक नियम: इंदिरा एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूरे दिन भगवान विष्णु का स्मरण और मंत्र जाप कर सकते हैं। व्रत के स्वरूप के अनुसार फलाहार किया जा सकता है या श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल व्रत भी रख सकते हैं। पूजा के दौरान तुलसी दल, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करना महत्वपूर्ण माना गया है। भगवान विष्णु को भोग लगाने और आरती करने के बाद श्रद्धालु दिनभर धार्मिक भावना के साथ व्रत का पालन करते हैं। अगले दिन द्वादशी में पूजा करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान-दक्षिणा देना भी इस व्रत की धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना गया है। इसके बाद सात्विक भोजन या फलाहार से व्रत खोला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में श्रद्धा, नियम और भगवान विष्णु के प्रति भक्ति को विशेष महत्व दिया जाता है।
पितरों की शांति और मोक्ष की मान्यता: इंदिरा एकादशी पितृ पक्ष के दौरान आती है, इसलिए इसे पितृदोष की शांति और पितरों के कल्याण के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही व्रत रखने वाले व्यक्ति के भी पाप नष्ट होने की मान्यता है। यही कारण है कि पितृ पक्ष में आने वाली इस एकादशी को श्रद्धालु विशेष श्रद्धा और नियम के साथ मनाते हैं। पूजा, मंत्र जाप, भगवान को भोग अर्पित करना, आरती करना, ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान-दक्षिणा देना इस दिन की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल हैं। मान्यता है कि इंदिरा एकादशी का व्रत करने से पितरों की शांति और मोक्ष की कामना पूरी होती है तथा व्रत करने वाले व्यक्ति को भी धार्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है।















































