Meerut के भावनपुर थाना क्षेत्र में नकली नोटों की गड्डियां दिखाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले कथित गिरोह पर पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले में कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें हिस्ट्रीशीटर साजिद उर्फ पिस्टल के साथ भावनपुर थाने में तैनात दो सिपाही भी शामिल हैं। गिरफ्तार सिपाहियों की पहचान वर्ष 2025 बैच के आशीष कुमार और प्रश्नचित्त आनंद के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य लोगों को असली रकम के मुकाबले कई गुना ज्यादा पैसा देने का लालच देते थे और इसी लालच के जरिए उन्हें अपने जाल में फंसाया जाता था। मामले के खुलासे के बाद पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े दूसरे लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है।
असली नोटों के बीच कागज की कटिंग: पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने ठगी के लिए एक खास तरीका अपना रखा था। गिरोह की ओर से तैयार की जाने वाली गड्डियों के ऊपर और नीचे असली नोट लगाए जाते थे, जबकि उनके बीच कागज की कटिंग भरी जाती थी। बाहर से देखने पर पूरी गड्डी असली नोटों से भरी हुई दिखाई देती थी, जिससे सामने वाले व्यक्ति को यह भरोसा हो जाता था कि उसके पास बड़ी रकम है। इसके बाद असली रकम के मुकाबले कई गुना ज्यादा पैसा मिलने का लालच देकर लोगों को कथित तौर पर ठगी के जाल में फंसाया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस तरीके से कितनी बार ठगी की गई और गिरोह ने अपने काम के लिए ऐसी कितनी गड्डियां तैयार की थीं।
500, 200 और 100 रुपये की गड्डियां: एसपी ग्रामीण अभिजीत कुमार के मुताबिक पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 500, 200 और 100 रुपये के नोटों की कुल 33 गड्डियां बरामद की हैं। इसके साथ करीब 25 हजार रुपये की असली नकदी भी बरामद हुई है। पुलिस अब बरामद गड्डियों और नकदी को जांच का अहम हिस्सा मानकर आगे की कार्रवाई कर रही है। टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बरामद गड्डियों का इस्तेमाल पहले किन लोगों के साथ किया गया था और क्या आरोपियों के पास इससे जुड़ी कोई और सामग्री भी थी। बरामदगी के आधार पर पुलिस गिरोह के काम करने के तरीके और उसके संभावित लेनदेन से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।
हिस्ट्रीशीटर और सिपाहियों का कनेक्शन: इस मामले में हिस्ट्रीशीटर साजिद उर्फ पिस्टल की गिरफ्तारी के साथ भावनपुर थाने में तैनात दो सिपाहियों का पकड़ा जाना जांच का अहम बिंदु बन गया है। आशीष कुमार और प्रश्नचित्त आनंद से पुलिस पूछताछ कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि दोनों का गिरोह के साथ किस तरह संपर्क हुआ और उनकी कथित भूमिका क्या थी। जांच टीम यह भी पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ उनका संपर्क कब से था और नकली नोटों के नाम पर लोगों को ठगने की प्रक्रिया में वे किस स्तर पर जुड़े थे। पुलिस सभी आरोपियों के बयानों और बरामद सामग्री के आधार पर गिरोह के कामकाज की पूरी कड़ी जोड़ने का प्रयास कर रही है।
नेटवर्क की गहराई खंगाल रही पुलिस: गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया। टीम आरोपियों से पूछताछ कर यह जानकारी जुटा रही है कि यह कथित नेटवर्क कितने समय से संचालित हो रहा था और इसके साथ कितने लोग जुड़े हुए थे। पुलिस आरोपियों के संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि नकली नोटों की गड्डियां तैयार करने और उन्हें ठगी में इस्तेमाल करने में कौन-कौन लोग मदद करते थे। इसके साथ ही जांच में यह भी सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है कि गिरोह ने ठगी से हासिल रकम को कहां और किस तरह इस्तेमाल किया। पूछताछ आगे बढ़ने के साथ नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी मिलने की संभावना है।
Meerut से बाहर भी जांच का दायरा: पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नकली नोटों का यह कथित नेटवर्क केवल Meerut तक सीमित था या दूसरे जिलों और राज्यों में भी इसकी गतिविधियां फैली हुई थीं। टीम यह जांच कर रही है कि बरामद नकली नोटों या तैयार गड्डियों का इस्तेमाल किन-किन जगहों पर किया गया। उत्तर प्रदेश के Kanpur शहर में हाल ही में नकली करेंसी का मामला सामने आने के बाद इस पहलू को भी जांच में शामिल किया जा रहा है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ के आधार पर उनके संपर्कों और गतिविधियों का दायरा पता करेगी तथा यह जानने की कोशिश करेगी कि नकली नोटों के नाम पर ठगी का यह नेटवर्क दूसरे इलाकों तक किस हद तक पहुंचा हुआ था।
















































