जापान में भारतीय पैरा एथलीटों का ऐतिहासिक प्रदर्शन: जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए कुल 114 पदक अपने नाम किए और देश को अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर गौरवान्वित किया। भारतीय दल ने इन खेलों में 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक जीते। प्रतियोगिता का समापन 23 अक्टूबर को होना निर्धारित था, लेकिन अंतिम दिन आयोजित होने वाली स्पर्धाओं में भारत का कोई खिलाड़ी हिस्सा नहीं ले रहा था। इसलिए भारतीय दल का पदक अभियान अपने निर्धारित मुकाबलों के साथ समाप्त हो गया। पदक तालिका में पांचवें दिन का खेल समाप्त होने के बाद भारत चौथे स्थान पर था, जबकि चीन 427 पदकों के साथ शीर्ष स्थान पर काबिज था। भारतीय खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, तैराकी, टेबल टेनिस, निशानेबाजी, भारोत्तोलन और जूडो सहित विभिन्न खेलों में पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि भारत ने पिछले एशियन पैरा गेम्स में अपने नाम दर्ज पदकों की संख्या को पीछे छोड़ दिया। वर्ष 2022 में हांगझोऊ में आयोजित प्रतियोगिता में भारत के 309 पैरा एथलीटों ने 111 पदक जीते थे, जिनमें 27 स्वर्ण, 32 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल थे। हालांकि, बाद में नीरज यादव और परवीन से जुड़े डोपिंग मामलों के कारण तीन पदक वापस ले लिए गए, जिसके बाद भारत के पदकों की संख्या घटकर 108 रह गई थी। इस बार जापान में भारत के 168 पैरा एथलीटों ने हिस्सा लिया और कुल 114 पदक जीतकर नया रिकॉर्ड कायम किया। भारत की पैरा खेलों में प्रगति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वर्ष 2010 में आयोजित पहले एशियन पैरा गेम्स में देश को केवल 14 पदक मिले थे। वर्ष 2014 में यह संख्या बढ़कर 33 हो गई और वर्ष 2018 में जकार्ता में भारतीय दल ने 72 पदक जीते थे। इसके बाद हांगझोऊ में मिली उपलब्धि और अब आइची-नागोया में 114 पदकों का प्रदर्शन भारतीय पैरा खिलाड़ियों की लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाता है।
पैरा एथलेटिक्स में स्वर्ण पदकों के साथ कई राष्ट्रीय और खेल रिकॉर्ड बने: भारतीय एथलीटों ने ट्रैक और फील्ड स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीते। महिलाओं की चक्का फेंक एफ-54 स्पर्धा में सुवर्णा राज ने 15.66 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। दो बार पैरालंपिक रजत पदक जीत चुके निषाद कुमार ने पहली बार पुरुषों की एफ-46 लंबी कूद में हिस्सा लिया और 7.11 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। इसके अगले ही दिन उन्होंने अपनी पसंदीदा पुरुषों की ऊंची कूद टी-47 स्पर्धा में 1.88 मीटर की छलांग के साथ दूसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पुरुषों की भाला फेंक एफ-46 स्पर्धा में रिंकू हुड्डा ने स्वर्ण और अजीत सिंह ने रजत पदक जीता। महिलाओं की 1500 मीटर टी-12/टी-13 दौड़ में सौम्या ने 5 मिनट 12.39 सेकेंड का अपना सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज कर स्वर्ण पदक हासिल किया और भारत की वेंकटेश राधा को पीछे छोड़ा, जिन्होंने 5 मिनट 30.90 सेकेंड का समय लिया। महिलाओं की टी-11 1500 मीटर दौड़ में रवन्नी वलसानैनी ने कांस्य पदक जीता। दीप्ति जीवनजी ने महिलाओं की 400 मीटर टी-20 स्पर्धा में 56.20 सेकेंड का समय निकालकर खेलों का रिकॉर्ड बनाया और भारत के लिए अपना स्वर्ण पदक जीता। पुरुषों की भाला फेंक एफ-53/एफ-54 स्पर्धा में प्रदीप कुमार ने 27.45 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ रजत और एफ-53 वर्ग में आयुष वर्मा ने 17.88 मीटर के प्रयास से कांस्य पदक जीता। पुरुषों की गोला फेंक एफ-11 स्पर्धा में प्रवीण शर्मा ने 13.86 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। महिलाओं की 200 मीटर टी-35 दौड़ में प्रीति पाल ने 29.53 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक जीता। पुरुषों की चक्का फेंक एफ-51/एफ-52/एफ-53 स्पर्धा में प्रणव सूरमा ने स्वर्ण और राम रतन सिंह ने रजत पदक जीतकर भारत को दोहरी सफलता दिलाई। महिलाओं की 200 मीटर टी-12 दौड़ में सिमरन ने 24.80 सेकेंड के खेल रिकॉर्ड समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि तेजलबेन दामोर ने 25.23 सेकेंड का अपना सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। पुरुषों की चक्का फेंक एफ-43/एफ-44/एफ-62/एफ-64 स्पर्धा में देवेंद्र कुमार, राकेश और प्रदीप कुमार ने तीनों पदक जीतकर पोडियम पर भारतीय खिलाड़ियों का कब्जा सुनिश्चित किया। पुरुषों की गोला फेंक एफ-56/एफ-57 स्पर्धा में होकाटो होटोझे ने 14.65 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास से कांस्य पदक जीता। पुरुषों की भाला फेंक एफ-42 से एफ-44 और एफ-61 से एफ-64 श्रेणियों के फाइनल में सुमित अंतिल ने स्वर्ण, महेंद्र गुर्जर ने रजत और संदीप सरगर ने कांस्य पदक हासिल किया, जिससे तीनों स्थान भारतीय खिलाड़ियों के नाम रहे। महिलाओं की 400 मीटर टी-47 दौड़ में अंजनाबेन बंबडिया ने 59.97 सेकेंड में दौड़ पूरी कर स्वर्ण और जयंती बेहरा ने रजत पदक जीता। पुरुषों की ऊंची कूद टी-63 स्पर्धा में शैलेश कुमार ने 1.89 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि वरुण भाटी ने 1.84 मीटर के साथ रजत और राहुल ने 1.81 मीटर के साथ कांस्य पदक हासिल किया। महिलाओं की 400 मीटर टी-12 दौड़ में तेजलबेन दामोर ने 57.60 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक जीता। पुरुषों की 400 मीटर टी-47 दौड़ में दिलीप गावित ने 48.27 सेकेंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीता, जो आइची-नागोया में उनका दूसरा स्वर्ण था। पुरुषों की 50 मीटर फ्रीस्टाइल एस-13 तैराकी स्पर्धा में रवि कार्तिक बुदिगिना ने 25.89 सेकेंड के समय के साथ कांस्य पदक हासिल किया। महिलाओं की 400 मीटर टी-11 दौड़ में रावन्नी वलसानाइनी ने 1 मिनट 3.64 सेकेंड का अपना सर्वश्रेष्ठ समय निकालकर कांस्य पदक जीता। पुरुषों की लंबी कूद टी-44/टी-62/टी-64 स्पर्धा में सोलैराज धर्मराज ने स्वर्ण पदक हासिल किया। पुरुषों की क्लब थ्रो एफ-51 स्पर्धा में प्रणव सूरमा ने 32.87 मीटर की दूरी तक थ्रो करके स्वर्ण पदक जीता और खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया। पुरुषों की भाला फेंक एफ-37 स्पर्धा में हनी ने 60.49 मीटर का शानदार थ्रो करके स्वर्ण पदक के साथ विश्व रिकॉर्ड भी कायम किया। पुरुषों की 1500 मीटर टी-46 दौड़ में प्रमोद बिजारनिया ने रजत पदक जीता। महिलाओं की लंबी कूद टी-47 स्पर्धा में श्रीलंकाई खिलाड़ी के शानदार प्रदर्शन के बावजूद निमिषा सुरेश ने 5.37 मीटर की अपनी सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ रजत पदक हासिल किया। पेरिस पैरालंपिक में ईरानी प्रतिद्वंद्वी सादेघ बेत के विवादास्पद अयोग्य घोषित होने के बाद स्वर्ण पदक जीतने वाले नवदीप सिंह को इस बार कांस्य पदक मिला। पुरुषों की 200 मीटर टी-37 दौड़ में राकेशभाई भट्ट ने कांस्य पदक जीता। पुरुषों की गोला फेंक एफ-53 स्पर्धा में आयुष वर्मा ने 8.16 मीटर का थ्रो करके स्वर्ण पदक हासिल किया। पुरुषों की ऊंची कूद टी-64 स्पर्धा में प्रवीण कुमार ने 2.05 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता और खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया। उनका यह प्रदर्शन उनके अपने एशियाई रिकॉर्ड से केवल 0.03 मीटर कम था। इसी स्पर्धा में बंटी ने 1.92 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता। पुरुषों की गोला फेंक एफ-46 स्पर्धा में सचिन खिलारी ने 15.87 मीटर के थ्रो के साथ खेलों का नया रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक जीता। इस स्पर्धा में मोहम्मद यासर ने 15.06 मीटर के साथ रजत और परवीन ने 14.94 मीटर के साथ कांस्य पदक हासिल किया, जिससे तीनों पदक भारतीय खिलाड़ियों को मिले। महिलाओं की गोला फेंक एफ-34 स्पर्धा में भाग्यश्री जाधव ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता। पुरुषों की भाला फेंक एफ-12/एफ-13 श्रेणी में मनजीत ने 61.41 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो करके रजत पदक हासिल किया। महिलाओं की 100 मीटर टी-35 दौड़ में प्रीति पाल ने 13.98 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक जीता। पुरुषों की 100 मीटर टी-35 दौड़ में अनुभव चौधरी ने 12.72 सेकेंड का अपना सर्वश्रेष्ठ समय निकालकर कांस्य पदक हासिल किया, जबकि पुरुषों की 100 मीटर टी-37 दौड़ में राकेशभाई भट्ट ने 11.50 सेकेंड के अपने सर्वश्रेष्ठ समय के साथ कांस्य पदक जीता। पुरुषों की 100 मीटर टी-47 दौड़ में दिलीप गावित ने 10.69 सेकेंड के समय के साथ स्वर्ण और बेसिल मोहम्मद ने 10.72 सेकेंड में दौड़ पूरी करके रजत पदक जीता। महिलाओं की 100 मीटर टी-12 दौड़ में सिमरन शर्मा ने 12.02 सेकेंड के शानदार समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। 200 मीटर में स्वर्ण जीतने के बाद यह इन खेलों में उनका दूसरा स्वर्ण पदक था। पुरुषों की भाला फेंक एफ-55 स्पर्धा में सुखचैन ने 29.94 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ कांस्य पदक जीता। महिलाओं की चक्का फेंक एफ-55 स्पर्धा में करमज्योति ने 21.60 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो करके कांस्य पदक हासिल किया। पुरुषों की 100 मीटर टी-64 दौड़ में प्रणव देसाई ने 11.96 सेकेंड के समय के साथ कांस्य पदक जीता। पुरुषों की 400 मीटर टी-35/टी-38 दौड़ में अकीरा बनोथु ने रजत पदक हासिल किया। पुरुषों की गोला फेंक एफ-40 स्पर्धा में रवि रोंगाली ने 10.02 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो करके कांस्य पदक जीता। पुरुषों की 1500 मीटर टी-12/टी-13 दौड़ में शरथ मकानाहल्ली ने 4 मिनट 11.01 सेकेंड में दौड़ पूरी कर कांस्य पदक हासिल किया। पुरुषों की लंबी कूद टी-42/टी-61/टी-63 स्पर्धा में शैलेश कुमार ने 5.57 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग और 675 अंकों के साथ कांस्य पदक जीता। पुरुषों की भाला फेंक एफ-37 स्पर्धा में हनी ने अपने अंतिम प्रयास में 57.04 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करके कांस्य पदक भी जीता।
पैरा तीरंदाजी में शीतल देवी के दो स्वर्ण, पुरुष रिकर्व जोड़ी भी चैंपियन: पैरा तीरंदाजी में भारतीय खिलाड़ियों ने कई महत्वपूर्ण मुकाबले जीतकर पदक तालिका में योगदान दिया। महिलाओं की व्यक्तिगत कंपाउंड स्पर्धा के स्वर्ण पदक मुकाबले में शीतल देवी ने सिंगापुर की नूर अलीम स्याहिदा को 142-139 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। शीतल देवी ने टोमन कुमार के साथ मिलकर कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक हासिल किया। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में इंडोनेशिया की थियोडोरा ऑडी आयुडिया फेरेली और केन स्वागुमिलंग को 151-148 से पराजित किया। महिलाओं की डब्ल्यू-1 श्रेणी में स्वाति चौधरी ने रजत पदक जीता। पुरुषों की रिकर्व युगल स्पर्धा के फाइनल में हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने चीन के युन डुओ और झाओ लिक्स्यू को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। महिलाओं की पैरा कंपाउंड युगल स्पर्धा में शीतल देवी और पायल नाग ने रजत पदक हासिल किया। महिलाओं की रिकर्व युगल स्पर्धा में पूजा जत्यान और भावना चौधरी की जोड़ी ने रजत पदक जीता। इस तरह भारतीय तीरंदाजों ने व्यक्तिगत, मिश्रित टीम और युगल स्पर्धाओं में पदक जीतकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। पैरा बैडमिंटन में भी भारतीय खिलाड़ियों ने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों के साथ शानदार प्रदर्शन किया। पुरुष एकल एसएल-3 के फाइनल में नितेश कुमार ने प्रमोद भगत को 21-18 और 21-16 से हराकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि प्रमोद भगत को रजत पदक मिला। पुरुष एकल एसएल-4 में सुहास यथिराज ने कांस्य पदक हासिल किया। इसी वर्ग में अभिजीत सखुजा ने भी कांस्य पदक जीता। महिला युगल डब्ल्यूएच-1/डब्ल्यूएच-2 स्पर्धा में अल्फिया जेम्स और पल्लवी के ने कांस्य पदक अपने नाम किया। महिला एकल एसयू-5 में मनीषा रामदास ने रजत पदक जीता, जबकि महिला एकल एसएल-3 में संजना कुमारी ने कांस्य पदक हासिल किया। मिश्रित युगल एसएच-6 स्पर्धा में नित्या श्री सुमति सिवन और कृष्णा नागर ने कांस्य पदक जीता। पुरुष युगल स्पर्धा में सूर्यकांत यादव और नवीन शिवकुमार ने कांस्य पदक हासिल किया। नवीन शिवकुमार ने पुरुष एकल एसएल-4 वर्ग में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक भी जीता। महिला युगल एसएल-3/एसयू-5 के फाइनल में थुलासिमथी मुरुगेसन और मानसी जोशी की जोड़ी ने चीन की यांग किउक्सिया और जिओ ज़ुक्सियन को हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया। थुलासिमथी मुरुगेसन ने महिला एकल एसयू-5 में रजत पदक जीता। नित्या श्री सुमति सिवन ने महिला एकल एसएच-6 में रजत पदक हासिल किया। पुरुष खिलाड़ी नितेश कुमार और थुलासिमथी मुरुगेसन की जोड़ी ने मिश्रित युगल एसएल-3/एसयू-5 वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया। इन परिणामों ने भारतीय पैरा बैडमिंटन दल की गहराई और विभिन्न वर्गों में उसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को सामने रखा।
पैरा तैराकी और टेबल टेनिस में भी भारतीय खिलाड़ियों ने बढ़ाया पदक संग्रह: पैरा तैराकी में भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग स्पर्धाओं में रजत और कांस्य पदक जीतकर देश की पदक संख्या में इजाफा किया। पुरुषों की 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एसबी-11 स्पर्धा में हिमांशी नंदल ने 1 मिनट 20.72 सेकेंड का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस-11 स्पर्धा में हिमांशु नंदल ने 5 मिनट 10.91 सेकेंड में दूरी पूरी करके कांस्य पदक हासिल किया। पुरुषों की 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले एस-7 स्पर्धा में निरंजन मुकुंदन ने 2 मिनट 57.01 सेकेंड के समय के साथ कांस्य पदक जीता। पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस-13 स्पर्धा में रवि कार्तिक बुडिगिना ने 56.68 सेकेंड का समय निकालकर रजत पदक हासिल किया। उन्होंने पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक एस-13 स्पर्धा में भी 1 मिनट 10.10 सेकेंड का समय दर्ज करते हुए रजत पदक जीता। पुरुषों की 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एसबी-4 स्पर्धा में रोहित कुमार ने 1 मिनट 57.25 सेकेंड के समय के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। पैरा टेबल टेनिस में भारतीय खिलाड़ियों ने महिलाओं की एकल स्पर्धाओं में कई कांस्य पदक जीते। महिलाओं के एकल वर्ग चार-पांच के सेमीफाइनल में चीन की झांग बियान से हारने के बाद भाविना पटेल को कांस्य पदक मिला। महिलाओं के एकल वर्ग तीन के सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया की यूं जियु से हारने वाली सोनलबेन पटेल ने कांस्य पदक हासिल किया। महिलाओं के एकल वर्ग छह में इराक की नजला अल-दयेनी से सेमीफाइनल मुकाबला हारने के बाद प्राची पांडे को कांस्य पदक मिला। महिलाओं के एकल वर्ग नौ के सेमीफाइनल में चीन की माओ जिंगडियन से हारने वाली सहाना रवि ने भी कांस्य पदक जीता। पुरुषों के एकल वर्ग एक में जेहान मदान अपने समूह में चौथे स्थान पर रहे और उन्हें कांस्य पदक मिला। जेहान मदान ने शुभम वाधवा के साथ मिलकर पुरुष युगल वर्ग एमडी-4 में भी कांस्य पदक हासिल किया। इन स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने विभिन्न वर्गों में मुकाबला करते हुए कई पदक अपने नाम किए और दल के कुल प्रदर्शन को मजबूती प्रदान की।
निशानेबाजी, पैरा भारोत्तोलन और जूडो में भी भारत को मिले पदक: निशानेबाजी में मनीष नरवाल ने पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच-1 स्पर्धा में रजत पदक जीता, जबकि महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच-1 स्पर्धा में सृष्टि अरोड़ा ने कांस्य पदक हासिल किया। महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन एसएच-1 स्पर्धा में मोना अग्रवाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता और 357.1 अंक के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाया। उनके प्रदर्शन ने भारतीय निशानेबाजी दल की उपलब्धियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल एसएच-1 स्पर्धा में अवनि लेखरा ने रजत पदक हासिल किया। इस तरह निशानेबाजी में भारत को स्वर्ण, रजत और कांस्य तीनों पदक मिले। पैरा भारोत्तोलन में कस्तूरी राजामणि ने महिलाओं के 67 किलोग्राम तक के वर्ग में रजत पदक जीता। पुरुषों के 65 किलोग्राम तक के वर्ग में अशोक ने 192 किलोग्राम वजन उठाने का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल किया। पैरा जूडो में कोकिला ने महिलाओं के जे-2, 52 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता, जबकि कपिल परमार ने पुरुषों के जे-1, 70 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया। अलग-अलग खेलों में इन उपलब्धियों ने दिखाया कि भारत का पदक अभियान केवल एथलेटिक्स या कुछ प्रमुख स्पर्धाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निशानेबाजी, भारोत्तोलन और जूडो जैसे खेलों में भी खिलाड़ियों ने देश के लिए पदक जीते। मोना अग्रवाल का विश्व रिकॉर्ड, शीतल देवी के दो स्वर्ण, निषाद कुमार के दो स्वर्ण, हनी का भाला फेंक में विश्व रिकॉर्ड और कई स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों का एक साथ शीर्ष तीन स्थानों पर पहुंचना इस अभियान की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा।
114 पदकों के साथ भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, कई खिलाड़ियों ने दोहराई स्वर्णिम सफलता: आइची-नागोया में भारतीय पैरा खिलाड़ियों की उपलब्धियों में व्यक्तिगत रिकॉर्ड के साथ टीम की सामूहिक सफलता भी शामिल रही। पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धाओं में सुमित अंतिल और हनी के स्वर्ण पदक, महिलाओं की 100 और 200 मीटर टी-12 दौड़ में सिमरन शर्मा की दो स्वर्णिम जीत, निषाद कुमार के दो स्वर्ण पदक, दिलीप गावित की 400 मीटर और 100 मीटर दौड़ में स्वर्णिम सफलता तथा प्रणव सूरमा और प्रवीण कुमार के रिकॉर्ड प्रदर्शन ने भारतीय दल के अभियान को विशेष पहचान दी। सचिन खिलारी ने गोला फेंक में खेलों का रिकॉर्ड बनाया, जबकि प्रवीण कुमार ने ऊंची कूद में नया खेल रिकॉर्ड स्थापित किया। तीरंदाजी में शीतल देवी ने व्यक्तिगत और मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण जीते। बैडमिंटन में नितेश कुमार, नवीन शिवकुमार और थुलासिमथी मुरुगेसन की जोड़ी ने स्वर्ण पदक हासिल किए। तैराकी, टेबल टेनिस, निशानेबाजी, पैरा भारोत्तोलन और जूडो में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीतकर देश की उपलब्धियों में योगदान दिया। कुल 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदकों के साथ भारत ने 2022 के हांगझोऊ संस्करण के संशोधित 108 पदकों के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया। वर्ष 2010 में 14 पदकों से शुरू हुआ भारतीय पैरा खेलों का सफर वर्ष 2014 में 33, वर्ष 2018 में 72 और वर्ष 2022 में मूल रूप से 111 पदकों तक पहुंचा था। अब जापान में 114 पदकों की उपलब्धि ने इस प्रगति को एक नया मुकाम दिया है। पदक तालिका में भारत चौथे स्थान पर रहा, जबकि चीन 427 पदकों के साथ शीर्ष पर था। प्रतियोगिता के समापन के साथ भारतीय दल ने ऐसा प्रदर्शन दर्ज किया जिसमें पदकों की संख्या, व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, खेल रिकॉर्ड और विश्व रिकॉर्ड सभी शामिल रहे।
















































