भारतीय शेयर बाजार के लिए यह सप्ताह बेहद निराशाजनक रहा। दशहरा के कारण मंगलवार को कारोबार बंद रहने से सप्ताह में केवल चार दिन ही बाजार खुला, लेकिन इन चारों सत्रों में प्रमुख सूचकांकों को गिरावट का सामना करना पड़ा। पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिससे घरेलू बाजार में लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा। इस गिरावट का असर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार मूल्य पर भी पड़ा। चार कारोबारी सत्रों के दौरान निवेशकों की संपत्ति में करीब 20.79 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। लगातार कमजोर प्रदर्शन ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया और निवेशकों के सामने वैश्विक घटनाक्रम से जुड़ी अनिश्चितताओं को प्रमुख चुनौती के रूप में खड़ा कर दिया।
निवेशकों की संपत्ति में 20.78 लाख करोड़ रुपये की कमी: शुक्रवार को बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17 प्रतिशत टूटकर 73,123.83 अंक पर आ गया, जबकि निफ्टी 87.65 अंक यानी 0.39 प्रतिशत फिसलकर 22,600 अंक पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह के प्रदर्शन पर नजर डालें तो सेंसेक्स में 1,605.44 अंक यानी 2.15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 16 अक्टूबर को 4,72,62,167.42 करोड़ रुपये था, जो अगले चार कारोबारी सत्रों में घटकर 4,51,83,393.14 करोड़ रुपये रह गया। इस तरह कुल बाजार मूल्य में 20,78,774.28 करोड़ रुपये की कमी आई। बाजार पूंजीकरण में आई इस बड़ी गिरावट से पता चलता है कि सप्ताहभर की बिकवाली ने निवेशकों की कुल संपत्ति को कितना प्रभावित किया।
पश्चिम एशिया संकट और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता: बाजार में कमजोरी के पीछे पश्चिम एशिया का बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव एक प्रमुख कारण रहा। क्षेत्र में जारी संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी आई, जिससे भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ गया। तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से महंगाई की चिंता गहराने लगी है और निवेशक वैश्विक परिस्थितियों को लेकर सतर्क हो गए हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड में परिसंपत्ति प्रबंधन के शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय बाजारों में कमजोरी बनी रहने का अनुमान है। उनके मुताबिक, तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं। वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ने से निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं, जिसका असर शेयरों की खरीद-बिक्री और प्रमुख सूचकांकों के प्रदर्शन पर दिखाई देता है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव से वैश्विक जोखिम बढ़ा: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने बाजार की चिंताओं को और गहरा किया। सिद्धार्थ खेमका के अनुसार, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत ठप पड़ने और ईरान की परमाणु तथा सैन्य संपत्तियों पर संभावित हमलों से जुड़ी खबरों ने भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ा दिए हैं। इन घटनाक्रमों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड लगभग तीन प्रतिशत चढ़कर 116.73 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कच्चे तेल का इतना महंगा होना भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए चिंता बढ़ाने वाला कारक है। तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है और इसका असर आर्थिक गतिविधियों तथा निवेशकों की बाजार संबंधी उम्मीदों पर पड़ सकता है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय तनाव और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव घरेलू बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहे।
सोमवार को सबसे बड़ी गिरावट, बुधवार और गुरुवार को भी बिकवाली: सप्ताह की शुरुआत ही शेयर बाजार के लिए कमजोर रही। सोमवार को सेंसेक्स 876.37 अंक यानी 1.17 प्रतिशत टूटकर 73,852.90 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 257.20 अंक यानी 1.11 प्रतिशत गिरकर 22,888.95 अंक पर आ गया। मंगलवार को दशहरा के अवसर पर बाजार में कारोबार नहीं हुआ। इसके बाद बुधवार को भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा और सेंसेक्स 143.21 अंक यानी 0.19 प्रतिशत टूटकर 73,709.69 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी में 77.60 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 22,811.35 अंक पर पहुंच गया। गुरुवार को बिकवाली और तेज हुई। सेंसेक्स 460.30 अंक यानी 0.62 प्रतिशत फिसलकर 73,249.39 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 123.70 अंक यानी 0.54 प्रतिशत गिरकर 22,687.65 अंक पर आ गया। इस तरह सोमवार से शुक्रवार तक प्रत्येक कारोबारी सत्र में बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ और सप्ताह के अंत तक प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बना रहा।
आगे बाजार की दिशा पर वैश्विक घटनाक्रम का असर: सप्ताहभर की लगातार गिरावट ने भारतीय शेयर बाजार के सामने वैश्विक परिस्थितियों से जुड़ी चुनौतियों को रेखांकित किया है। पश्चिम एशिया में तनाव, अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक गतिरोध तथा कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने निवेशकों की धारणा कमजोर की। ब्रेंट क्रूड के 116.73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से महंगाई को लेकर चिंताएं भी बढ़ीं। बाजार विशेषज्ञ सिद्धार्थ खेमका के आकलन के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय बाजारों में कमजोरी का दबाव बना रह सकता है। चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स की 2.15 प्रतिशत की साप्ताहिक गिरावट और कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में 20.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी इस सप्ताह के कमजोर प्रदर्शन को दर्शाती है। आने वाले समय में बाजार की चाल पर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई से जुड़ी चिंताओं का प्रभाव महत्वपूर्ण रहेगा।
















































