ग्रहों की चाल और आज के विशेष योग: वैदिक ज्योतिष के अनुसार 29 सितंबर 2026, मंगलवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि शाम 05:09 बजे तक रहेगी और इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी। आज का दिन इसलिए विशेष है क्योंकि मंगलवार और संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी तिथि के संयोग से अंगारकी चतुर्थी का विशेष योग बन रहा है। इसके अलावा मेष राशि में चंद्रमा और कर्क राशि में उच्च के गुरु के बीच चतुर्थ-दशम संबंध बनने से गजकेसरी योग का प्रभाव बताया गया है। दिन में हर्षण योग भी बना रहेगा, जबकि पितृपक्ष के दौरान आज भरणी श्राद्ध यानी महाभरणी का विशेष संयोग है। वहीं तुला राशि में बुध और अपनी स्वराशि में शुक्र की युति लक्ष्मी-नारायण योग का प्रभाव बनाए हुए है। ग्रहों की यह स्थिति अलग-अलग राशियों के लिए अलग परिणाम देने वाली है।
आज की ग्रह स्थिति और आगामी राशि परिवर्तन: वैदिक ज्योतिष के अनुसार आज सूर्य कन्या राशि के हस्त नक्षत्र में मार्गी स्थिति में हैं और 17 अक्टूबर 2026 को तुला राशि में प्रवेश करेंगे। चंद्रमा मेष राशि में अश्विनी नक्षत्र में हैं और सुबह 09:03 बजे तक अश्विनी के बाद भरणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। चंद्रमा 30 सितंबर 2026 को दोपहर 01:13 बजे वृषभ राशि में जाएंगे। मंगल कर्क राशि में नीच स्थिति में पुष्य नक्षत्र में मार्गी हैं और 12 नवंबर 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। बुध तुला राशि में चित्रा नक्षत्र में मार्गी हैं और 2 दिसंबर 2026 को शाम 05:27 बजे वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे। गुरु कर्क राशि में उच्च होकर आश्लेषा नक्षत्र में मार्गी हैं और 31 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:02 बजे सिंह राशि में जाएंगे। शुक्र तुला राशि में अपनी स्वराशि में स्वाती नक्षत्र में मार्गी हैं और 6 नवंबर 2026 को तड़के 01:04 बजे वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। शनि मीन राशि में रेवती नक्षत्र में वक्री हैं और वर्ष 2026 में इसी राशि में वक्री-मार्गी चलते रहेंगे। राहु कुंभ राशि के धनिष्ठा नक्षत्र में वक्री हैं, जबकि केतु सिंह राशि के मघा नक्षत्र में वक्री हैं।
आज का ग्रह गोचर और नक्षत्र चार्ट — 29 सितंबर 2026
| क्रम | ग्रह | वर्तमान राशि | वर्तमान नक्षत्र | वक्री/मार्गी स्थिति | आगामी राशि परिवर्तन |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | सूर्य | कन्या | हस्त | मार्गी | 17 अक्टूबर 2026 को तुला राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 2 | चंद्रमा | मेष | अश्विनी (सुबह 09:03 तक), फिर भरणी | मार्गी | 30 सितंबर 2026 को दोपहर 01:13 बजे वृषभ राशि में जाएंगे। |
| 3 | मंगल | कर्क (नीच राशि) | पुष्य | मार्गी | 12 नवंबर 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 4 | बुध | तुला | चित्रा | मार्गी | 2 दिसंबर 2026 को शाम 05:27 बजे वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे। |
| 5 | गुरु (बृहस्पति) | कर्क (उच्च राशि) | आश्लेषा | मार्गी | 31 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:02 बजे सिंह राशि में जाएंगे। |
| 6 | शुक्र | तुला (स्वराशि) | स्वाती | मार्गी | 6 नवंबर 2026 को तड़के 01:04 बजे वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 7 | शनि | मीन | रेवती | वक्री | वर्ष 2026 में इसी राशि में वक्री-मार्गी चलते रहेंगे। |
| 8 | राहु | कुंभ | धनिष्ठा | वक्री | छाया ग्रह हमेशा वक्री रहते हैं। |
| 9 | केतु | सिंह | मघा | वक्री | केतु का राशि परिवर्तन वर्ष 2027 में कर्क राशि में होगा। |
चार्ट के अनुसार ग्रहों की स्थिति का प्रभाव: वैदिक ज्योतिष के अनुसार 29 सितंबर को सूर्य कन्या में, चंद्रमा मेष में, मंगल और उच्च के गुरु कर्क में, बुध और स्वराशि के शुक्र तुला में, वक्री शनि मीन में, राहु कुंभ में तथा केतु सिंह राशि में स्थित हैं। चंद्रमा के मेष राशि में होने और गुरु के कर्क राशि में स्थित होने से दोनों के बीच चतुर्थ-दशम संबंध बन रहा है, जिसे गजकेसरी योग के प्रभाव के रूप में बताया गया है। तुला राशि में बुध और शुक्र की युति लक्ष्मी-नारायण योग का निर्माण कर रही है। इसी ग्रह स्थिति के बीच मंगलवार और चतुर्थी तिथि का संयोग अंगारकी चतुर्थी का विशेष महत्व बढ़ा रहा है। आज अश्विनी नक्षत्र के बाद भरणी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा और पितृपक्ष के कारण भरणी श्राद्ध यानी महाभरणी का भी विशेष धार्मिक महत्व है। आने वाले दिनों में चंद्रमा, सूर्य, मंगल, बुध, गुरु और शुक्र के राशि परिवर्तन से ग्रहों की स्थिति में आगे भी बदलाव होगा।
राशि में चंद्रमा की स्थिति विशेष महत्व रखती है। चंद्रमा और गुरु के बीच चतुर्थ-दशम संबंध के कारण गजकेसरी योग का प्रभाव बताया गया है, जबकि बुध और शुक्र की तुला राशि में युति लक्ष्मी-नारायण योग बना रही है। चंद्रमा आज नक्षत्र भी बदलेंगे—सुबह 09:03 बजे तक अश्विनी और इसके बाद भरणी नक्षत्र रहेगा। दिन के साथ चतुर्थी तिथि का आरंभ होने से मंगलवार और संकष्टी गणेश चतुर्थी का संयोग अंगारकी चतुर्थी के रूप में विशेष महत्व रखता है। वहीं पितृपक्ष में भरणी नक्षत्र के कारण महाभरणी श्राद्ध योग भी आज का महत्वपूर्ण धार्मिक-ज्योतिषीय संयोग है।
1. अंगारकी चतुर्थी योग: मंगलवार और संकष्टी चतुर्थी का विशेष संयोग
वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगलवार के दिन संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी तिथि का संयोग होने से 29 सितंबर 2026 को अंगारकी चतुर्थी का विशेष योग बन रहा है। इस योग को कर्ज से मुक्ति और मंगल दोष की शांति के लिए विशेष महत्व वाला माना गया है। मंगलवार स्वयं मंगल ग्रह से संबंधित दिन है और चतुर्थी भगवान गणेश की आराधना से जुड़ी तिथि है। ऐसे में आज का संयोग धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। पितृपक्ष के बीच पड़ने के कारण आज पूजा, तर्पण और धार्मिक कार्यों का महत्व भी बढ़ जाता है।
अंगारकी चतुर्थी—इन राशियों पर पड़ेगा शुभ प्रभाव
मेष राशि: चंद्रमा आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं। इससे आत्मविश्वास और ऊर्जा में वृद्धि होगी। नई ऊर्जा और पराक्रम के बल पर रुके हुए कामों को गति मिल सकती है।
मिथुन राशि: बुध और शुक्र की अनुकूलता तथा आज के हर्षण योग का प्रभाव आर्थिक मामलों में लाभ दे सकता है। रुका हुआ धन वापस मिलने और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं।
कर्क राशि: कर्क राशि में गुरु और मंगल दोनों स्थित हैं। कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान बढ़ सकता है। अधिकारियों से सहयोग मिलने और कोई बड़ी जिम्मेदारी प्राप्त होने के संकेत हैं।
सिंह राशि: भाग्य का सहयोग मिलने से नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है।
तुला राशि: तुला राशि में बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी-नारायण योग का प्रभाव है। सुख-सुविधाओं में वृद्धि और व्यापार में बड़ी डील फाइनल होने के संकेत हैं।
मकर राशि: स्वास्थ्य में सुधार के साथ आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। परिवार की ओर से कोई सुखद समाचार मिलने के संकेत हैं।
अंगारकी चतुर्थी—इन राशियों के लिए रहेगा अशुभ
वृषभ राशि: चंद्रमा के बारहवें भाव में होने से अनावश्यक खर्च बढ़ सकता है। मन में अज्ञात भय और अनिद्रा की स्थिति बन सकती है। वाद-विवाद से दूर रहना जरूरी होगा।
कन्या राशि: सूर्य आपकी राशि में स्थित हैं और चंद्रमा अष्टम भाव में संचार कर रहे हैं। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें और वाहन चलाते समय विशेष सावधानी रखें।
वृश्चिक राशि: छठे भाव का चंद्रमा शत्रुओं पर नियंत्रण पाने में मदद कर सकता है, लेकिन गुप्त चिंताओं और कर्ज से जुड़े मामलों में तनाव बढ़ सकता है। धन के लेन-देन में सतर्क रहें।
मीन राशि: वक्री शनि आपकी राशि में स्थित हैं। पारिवारिक जीवन में अनबन और वैचारिक मतभेद की स्थिति बन सकती है। महत्वपूर्ण निर्णयों को आज टालना बेहतर रहेगा।
2. गजकेसरी योग: चंद्रमा और गुरु की स्थिति से धन व मान-सम्मान के संकेत
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आज चंद्रमा मेष राशि में और गुरु कर्क राशि में स्थित हैं। दोनों के बीच चतुर्थ-दशम संबंध बनने से गजकेसरी योग का प्रभाव बताया गया है। इस योग को धन लाभ, प्रतिष्ठा और उपलब्धियों से जोड़कर देखा जाता है। आज की ग्रह स्थिति में यह योग कई राशियों के लिए आर्थिक और कार्यक्षेत्र से जुड़े सकारात्मक परिणामों का संकेत दे रहा है।
गजकेसरी योग—इन राशियों के लिए रहेगा शुभ
मेष राशि: चंद्रमा के आपकी ही राशि में गोचर से आत्मविश्वास और पराक्रम बढ़ेगा। रुके काम पूरे होने और आर्थिक लाभ के अवसर मिल सकते हैं।
मिथुन राशि: आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। आय से जुड़े नए अवसर मिल सकते हैं और लंबे समय से अटका सरकारी काम पूरा होने के संकेत हैं।
कर्क राशि: गुरु और मंगल की राशि में मौजूदगी से कार्यक्षेत्र में प्रभाव बढ़ सकता है। अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
सिंह राशि: भाग्य का साथ मिलने से नौकरी में पदोन्नति या वेतन वृद्धि की संभावना बन सकती है।
तुला राशि: बुध-शुक्र की युति के कारण व्यापारिक क्षेत्र में लाभ और बड़ी डील के संकेत हैं। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है।
मकर राशि: स्वास्थ्य में सुधार और धन की स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। परिवार की ओर से सुखद समाचार मिल सकता है।
गजकेसरी योग—इन राशियों के लिए रहेगा अशुभ
वृषभ राशि: खर्च बढ़ सकता है और मानसिक चिंता या अकारण भय परेशान कर सकता है। धन से जुड़े निर्णय सोच-समझकर लें।
कन्या राशि: स्वास्थ्य को लेकर सावधानी आवश्यक है। वाहन चलाते समय विशेष ध्यान रखें और शारीरिक जोखिम वाले कार्यों में लापरवाही न करें।
वृश्चिक राशि: शत्रुओं पर नियंत्रण की स्थिति बन सकती है, लेकिन कर्ज और गुप्त चिंताओं के कारण मानसिक दबाव बढ़ सकता है। लेन-देन में सतर्क रहें।
मीन राशि: वक्री शनि के कारण पारिवारिक और मानसिक स्तर पर दबाव रह सकता है। महत्वपूर्ण निर्णयों को टालना बेहतर रहेगा।
3. हर्षण योग: प्रसन्नता और सफलता देने वाला योग
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आज पंचांग के अनुसार हर्षण योग देर रात 03:20 बजे तक, यानी 30 सितंबर तड़के तक प्रभावी रहेगा। इस योग को कार्यों में प्रसन्नता और सफलता प्रदान करने वाला माना गया है। बुध-शुक्र की अनुकूल स्थिति के साथ इसका प्रभाव आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियों में विशेष रूप से देखा जा सकता है। दिए गए राशिफल विवरण में मिथुन राशि के लिए हर्षण योग के प्रभाव से धन लाभ और आर्थिक मजबूती के संकेत बताए गए हैं।
हर्षण योग—इन राशियों के लिए रहेगा शुभ
मिथुन राशि: बुध और शुक्र की अनुकूलता के साथ हर्षण योग आर्थिक लाभ के अवसर बढ़ा सकता है। रुका हुआ पैसा वापस मिलने और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। व्यापार से जुड़े मामलों में भी सफलता मिल सकती है।
मेष राशि: चंद्रमा के अपनी राशि में होने से ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ेगा। रुके हुए कार्यों को गति देने में मदद मिल सकती है।
तुला राशि: बुध-शुक्र की युति के कारण व्यापारिक मामलों में लाभ और बड़ी डील के अवसर बन सकते हैं। सुख-सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है।
हर्षण योग—इन राशियों के लिए रहेगा अशुभ
वृषभ राशि: अनावश्यक खर्च और मानसिक बेचैनी बढ़ सकती है। धन के मामलों में सावधानी आवश्यक है।
कन्या राशि: स्वास्थ्य और वाहन संबंधी मामलों में लापरवाही नुकसानदेह हो सकती है।
मीन राशि: पारिवारिक मतभेद और महत्वपूर्ण निर्णयों को लेकर मानसिक दबाव रह सकता है।
4. लक्ष्मी-नारायण योग: तुला राशि में बुध-शुक्र की युति से धन और व्यापार को बढ़ावा
वैदिक ज्योतिष के अनुसार तुला राशि में बुध और शुक्र की युति बनी हुई है। बुध बुद्धि, वाणी, व्यापार और तर्क से जुड़े ग्रह माने जाते हैं, जबकि शुक्र धन, सौंदर्य, ऐश्वर्य, कला और भौतिक सुख-सुविधाओं से संबंधित हैं। दोनों ग्रहों का तुला राशि में साथ होना लक्ष्मी-नारायण योग का निर्माण करता है। इस योग के कारण आर्थिक समृद्धि, व्यापारिक अवसर और सुख-सुविधाओं से जुड़े मामलों में सकारात्मक प्रभाव की संभावना बताई गई है।
लक्ष्मी-नारायण योग—इन राशियों के लिए रहेगा शुभ
मिथुन राशि: बुध-शुक्र की अनुकूलता आर्थिक लाभ दे सकती है। आय के नए स्रोत बनने और रुका हुआ धन वापस मिलने के संकेत हैं।
तुला राशि: आपकी राशि में ही बुध-शुक्र की युति होने से भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है। व्यापार में बड़ी डील फाइनल होने के संकेत हैं।
मकर राशि: आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और परिवार की ओर से सुखद समाचार मिलने की संभावना है।
लक्ष्मी-नारायण योग—इन राशियों के लिए रहेगा अशुभ
वृषभ राशि: खर्च बढ़ सकते हैं और मानसिक चिंता बनी रह सकती है। धन संबंधी मामलों में सावधानी बरतना जरूरी होगा।
कन्या राशि: स्वास्थ्य और दैनिक गतिविधियों में सावधानी आवश्यक है। वाहन चलाते समय लापरवाही से बचें।
मीन राशि: पारिवारिक मतभेद और वैचारिक टकराव की स्थिति बन सकती है। बड़े निर्णयों में जल्दबाजी न करें।
5. महाभरणी श्राद्ध योग: पितरों के तर्पण और श्राद्ध से मिलने वाला विशेष पुण्य
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आज पितृपक्ष के अंतर्गत भरणी श्राद्ध यानी महाभरणी का विशेष संयोग बन रहा है। चंद्रमा के सुबह 09:03 बजे तक अश्विनी नक्षत्र में रहने के बाद भरणी नक्षत्र में प्रवेश करने के कारण आज पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और धार्मिक कर्म करने का विशेष महत्व माना जाता है। भरणी श्राद्ध को महाभरणी श्राद्ध भी कहा जाता है और धार्मिक परंपरा में भरणी नक्षत्र के स्वामी यम माने गए हैं, इसलिए पितृपक्ष में इस नक्षत्र को पितृकर्म के लिए विशेष महत्व दिया जाता है।
महाभरणी श्राद्ध का धार्मिक महत्व
भरणी श्राद्ध के दिन अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों के निमित्त श्रद्धा से किए गए कर्म पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करने का माध्यम हैं। शास्त्रीय परंपराओं में श्राद्ध को परिवार की सुख-समृद्धि, आयु, संतान, धन और आध्यात्मिक कल्याण से जुड़े पुण्यदायक कर्म के रूप में वर्णित किया गया है।
भरणी श्राद्ध करने से क्या पुण्य मिलता है
धार्मिक मान्यता के अनुसार भरणी श्राद्ध करने से पितरों की तृप्ति और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। भरणी श्राद्ध को विशेष महत्व देते हुए इसे गया में किए जाने वाले श्राद्ध के समान फलदायक माना गया है। परंपरागत मान्यता में यह भी बताया गया है कि भरणी नक्षत्र में किया गया श्राद्ध पितरों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता का विशेष कर्म माना जाता है।
आज क्या करना चाहिए
आज पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक तर्पण करना चाहिए। तर्पण में जल के साथ काले तिल और कुश का प्रयोग करने की परंपरा है। सामर्थ्य के अनुसार पितरों के नाम से पिंडदान, अन्न का दान और ब्राह्मण भोजन कराया जा सकता है। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या आवश्यक वस्तुओं का दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है। पितरों का स्मरण करते हुए शांत मन से प्रार्थना करना और परिवार के पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना इस दिन के प्रमुख धार्मिक कर्मों में शामिल है।
श्राद्ध किस समय करना उचित माना जाता है
पितृपक्ष के श्राद्ध को पार्वण श्राद्ध माना जाता है और परंपरागत रूप से अपराह्न काल को इसके लिए महत्वपूर्ण माना गया है। भरणी श्राद्ध के अनुष्ठान को अपराह्न काल की समाप्ति तक पूरा करने की परंपरा बताई गई है तथा श्राद्ध कर्म के अंत में तर्पण किया जाता है।
आज इन बातों का रखें ध्यान
श्राद्ध और तर्पण श्रद्धा तथा शांत मन से करना चाहिए। पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्म में दिखावे से बचते हुए अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, जल और दान-पुण्य करना उचित माना जाता है। परिवार की परंपरा के अनुसार यदि पंडित या आचार्य से श्राद्ध कर्म कराया जाता है तो उसी विधि का पालन करना चाहिए। धार्मिक परंपराओं में श्राद्ध की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में कुछ भिन्न भी हो सकती है, इसलिए अपने कुलाचार के अनुसार कर्म करना उचित रहेगा।
आज की विशेष सावधानी और उपाय
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आज मंगलवार होने के साथ अंगारकी चतुर्थी और महाभरणी श्राद्ध का संयोग है, इसलिए भगवान गणेश की आराधना, पितरों के निमित्त तर्पण और धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है। आज दोपहर 03:10 बजे से शाम 04:40 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस दौरान किसी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी गई है। आज के ग्रह गोचर में जिन राशियों के लिए अशुभ प्रभाव बताए गए हैं, उन्हें विशेष रूप से वाद-विवाद, अनावश्यक खर्च, वाहन चलाते समय लापरवाही, जोखिमपूर्ण निर्णय और बड़े आर्थिक लेन-देन में सावधानी बरतनी चाहिए।













































