अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘एक्सियोस’ को दिए अपने इंटरव्यू में ईरान को लेकर कई सनसनीखेज दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे के समय ईरान का पूरा नेतृत्व एक ही जगह मौजूद है। ट्रंप के अनुसार, वे चाहते तो सिर्फ “एक शॉट” में देश के बचे हुए पूरे नेतृत्व को हमेशा के लिए खत्म कर सकते थे। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह ऐसा कदम नहीं उठाएंगे। ट्रंप ने दलील दी कि ऐसा करने पर भविष्य में बातचीत करने के लिए कोई भी नेता नहीं बचेगा।
समझौते के लिए भीख मांगने का दावा डोनाल्ड ट्रंप ने अपने इंटरव्यू में आगे दावा किया कि ईरान के नेता अब डील करने के लिए भीख मांग रहे हैं। इसी वजह से दोनों पक्षों ने खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम खत्म होने तक बातचीत से एक हफ्ते का ब्रेक लेने का फैसला किया है। ट्रंप के मुताबिक, इस तय अवधि के दौरान कोई भी पक्ष एक-दूसरे पर किसी भी तरह का हमला नहीं करेगा। यह फैसला मिडल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच दोनों पक्षों को अपनी आगे की रणनीति तैयार करने का मौका देगा। फिलहाल एक हफ्ते तक दोनों ओर से शांति बनाए रखने की उम्मीद है।
ईरानी नेताओं के आंसुओं पर संदेह इस ऐतिहासिक जनाजे के दौरान सड़कों पर लाखों ईरानियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। शनिवार को हुए विदाई समारोह के दौरान ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची को भावुक होकर रोते हुए देखा गया। इन वरिष्ठ नेताओं को इस तरह रोता देख अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी प्रतिक्रिया में गहरी हैरानी व्यक्त की। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें लगता था कि लोग खामेनेई से “नफरत” करते थे। उन्होंने आगे कहा, “शायद ये नकली आंसू हैं।”
इस्लामिक परंपरा में बड़ा अपवाद ईरान पर 36 सालों तक एकछत्र राज करने वाले अली खामेनेई इस साल 28 फरवरी को मारे गए थे। इसी दिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर भीषण हवाई हमले शुरू किए थे, जिससे मिडल ईस्ट में एक बड़ा युद्ध छिड़ गया था। आमतौर पर इस्लामिक परंपरा के अनुसार, शव को 24 घंटे के भीतर दफनाया जाता है, लेकिन युद्ध की स्थिति के कारण खामेनेई के अंतिम संस्कार में यह बड़ा अपवाद देखा गया। ईरान ने खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए 4 जुलाई का दिन चुना, जो कि अमेरिका की स्थापना की 250वीं वर्षगांठ भी है।
धार्मिक अनुष्ठान और दफनाने की तिथि दिवंगत नेता के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 4 जुलाई को धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत के साथ आरंभ हो चुकी है। इसके बाद आगामी 7 जुलाई को तेहरान के दक्षिण में स्थित पवित्र शहर ‘कोम’ में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन सभी कार्यक्रमों के समापन के बाद आगामी 9 जुलाई को अली खामेनेई के गृहनगर ‘मशहद’ में उन्हें पूरे सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। ईरान सरकार ने इस पूरे कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।
वैश्विक राजनीति पर असर अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान ने यह साबित कर दिया है कि मिडल ईस्ट का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। भले ही अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों के कारण एक हफ्ते का ब्रेक लिया गया हो, लेकिन तनाव बरकरार है। ट्रंप के दावों के अनुसार ईरानी नेतृत्व इस समय बेहद दबाव में है और समझौते का रास्ता तलाश रहा है। अब पूरी दुनिया की नजरें 9 जुलाई को मशहद में होने वाले अंतिम संस्कार पर टिकी हैं। इसके बाद ही तय होगा कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध थमेगा या और भड़केगा।





































