सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर E20 पेट्रोल को लेकर तरह-तरह के दावे लगातार किए जा रहे हैं। इन तमाम भ्रामक दावों की संख्या दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ती ही जा रही है। आम जनता के बीच फैल रही इस भ्रांति को देखते हुए सरकार को खुद आगे आना पड़ा है। सरकार ने आगे आकर आम लोगों के मन में उठ रहे विभिन्न सवालों के सटीक जवाब दिए हैं। इसी बीच ऑटो इंडस्ट्री के दिग्गजों ने भी आगे आकर E20 पेट्रोल से जुड़े दावों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
मारुती सुजुकी के अधिकारी का स्पष्टीकरण मारुती सुजुकी के एक्जिक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने इस ज्वलंत मुद्दे पर कंपनी का पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने साफ तौर पर बताया कि E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर मिथक ज्यादा हैं और सच्चाई बहुत कम है। कंपनी ने ग्राहकों को आश्वस्त किया है कि वे अपनी नई गाड़ियों को E20 पेट्रोल के मानकों के हिसाब से ही बना रहे हैं। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि बीस प्रतिशत एथेनॉल मिक्स वाले पेट्रोल से गाड़ी के इंजन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। इस बयान के बाद वाहन चालकों को इंजन खराब होने जैसी अफवाहों से डरने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है।
माइलेज में गिरावट और ईंधन के फायदे ईंधन के उपयोग के बाद माइलेज से जुड़े अहम सवाल का भी राहुल भारती ने पूरी ईमानदारी से जवाब दिया है। माइलेज के सवाल को लेकर उन्होंने स्पष्ट कहा कि E20 पेट्रोल से गाड़ी की माइलेज में मामूली गिरावट आती है। परीक्षण के अनुसार नई गाड़ियों में इस ईंधन के उपयोग से माइलेज में केवल तीन प्रतिशत की ही कमी देखने को मिली है। हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ा कि इस छोटी सी गिरावट के बावजूद E20 ईंधन के कई बड़े फायदे भी मौजूद हैं। यह नया फ्यूल लंबे समय में ग्राहकों और पर्यावरण दोनों के लिए बहुत ही ज्यादा लाभदायक साबित होने वाला है।
टोयोटा के कंट्री हेड की महत्वपूर्ण राय टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट विक्रम गुलाटी ने भी अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया साझा की है। उन्होंने उद्योग की जरूरत बताते हुए कहा कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में समय-समय पर कई सारे नए रेगुलेशन लागू करने पड़ते हैं। उनके विशेषज्ञ नजरिए के अनुसार E20 पर्यावरण के लिए एक बहुत ही अच्छा और पूरी तरह से क्लीन फ्यूल है। वर्तमान समय में जब पर्यावरण को लेकर तमाम तरह की चुनौतियां सामने हैं, ऐसे में यह ईंधन बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। यह क्लीन फ्यूल आने वाली पीढ़ियों के लिए इसलिए भी फायदेमंद है क्योंकि इससे हानिकारक कार्बन उत्सर्जन काफी कम होता है।
ईआईएल की पूर्व चेयरमैन द्वारा दी गई जानकारी ईआईएल की पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर वर्तिका शुक्ला ने एथेनॉल ब्लेंडिंग के वैज्ञानिक आधार को सबके सामने रखा है। उन्होंने सबसे पहले यह भ्रम दूर किया कि देश में पेट्रोल के अंदर एथेनॉल ब्लेंडिंग रातों-रात बिल्कुल नहीं की गई है। आंकड़े देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में पेट्रोल में डेढ़ प्रतिशत एथेलॉल मिलाया जा रहा था जो अब बीस प्रतिशत हो गया है। पूर्व चेयरमैन वर्तिका शुक्ला ने स्पष्ट कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग साइंटिफिक्ली पूरी तरह से सपोर्टेड है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि देश में पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग निर्धारित बीआई स्टैण्डर्ड के पूर्णतः अनुरूप है।
आयात में कमी और वैश्विक स्तर पर उपयोग पूर्व चेयरमैन ने आगे बताया कि E20 पेट्रोल के उपयोग से देश का कार्बन उत्सर्जन काफी हद तक कम हो जाएगा। पर्यावरण की सुरक्षा के साथ-साथ इस महत्वपूर्ण कदम से कच्चे तेल के भारी आयात में भी निश्चित रूप से भारी गिरावट आएगी। अपने दावे को पुख्ता करने के लिए उन्होंने दुनिया के कई अन्य बड़े और विकसित देशों का सटीक उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि कनाडा, अमेरिका और ब्राजील में पिछले कई सालों से वाहनों के अंदर एथेनॉल का इस्तेमाल सफलतापूर्वक किया जा रहा है। इन विकसित देशों की तरह भारत में भी इस ईंधन का प्रयोग पूरी तरह सुरक्षित और आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद साबित होगा।





































