समाजवादी पार्टी द्वारा आयोजित किए जा रहे ब्राह्मण सम्मेलन को लेकर भी एक नया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। सुभासपा के प्रमुख नेता ने इस विशेष सम्मेलन के आयोजन पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया और तंज व्यक्त किया है। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्य विपक्षी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस कदम को महज एक दिखावा करार दिया है। उनका कहना है कि जो लोग इस तरह के सम्मेलन कर रहे हैं, वे असलियत में केवल अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। इस बयान के सामने आने के बाद राज्य के जातीय सम्मेलनों की राजनीति एक बार फिर से पूरी तरह गरमा गई है।
अखिलेश यादव पर सीधा निशाना सुभासपा प्रमुख ने विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की समझ और उनके ज्ञान पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने अपने बयान में बहुत स्पष्ट रूप से कहा कि हमारी जाति व्यवस्था में ब्राह्मण को सबसे ज्यादा विद्वान माना जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब उसी विद्वान समाज को विपक्षी पार्टी के नेता समझाने और ज्ञान देने का काम कर रहे हैं। उनका यह कटाक्ष इस बात की ओर इशारा करता है कि विपक्षी पार्टी केवल चुनावी फायदे के लिए यह सब कर रही है। इस सीधे हमले ने प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का एक बिल्कुल नया दौर शुरू कर दिया है।
इटावा के कथावाचक विवाद का जिक्र अपने राजनीतिक प्रहार को पैना करने के लिए उन्होंने एक पुराने और बहुचर्चित विवाद की याद भी दिलाई है। उन्होंने अपने भाषण में विपक्षी दल के नेता द्वारा दिए गए उस विवादित बयान का प्रमुखता से जिक्र किया है। उस पुराने बयान में नेता ने खुले तौर पर यह दावा किया था कि उनका अपना समाज भी कथावाचक बन सकता है और कथा कह सकता है। इस पुराने विवाद को उठाकर सुभासपा प्रमुख ने यह जताने की कोशिश की है कि विपक्षी दल की नीतियां हमेशा से दोहरी रही हैं। इस पुरानी घटना के जिक्र से ब्राह्मण समाज को लुभाने की विपक्षी दल की कोशिशों को एक बड़ा झटका लग सकता है।
बसपा की तर्ज पर सपा का काम इस ब्राह्मण सम्मेलन के असली स्वरूप को लेकर भी मंत्री ने अपनी एक बहुत ही दिलचस्प और अलग राय रखी है। उन्होंने बहुत ही तीखा दावा करते हुए कहा है कि इस आगामी ब्राह्मण सभा में सिर्फ एक ही विशेष जाति के लोग नजर आएंगे। अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने राज्य की एक अन्य प्रमुख दलित पार्टी की पुरानी कार्यशैली का भी सटीक उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि जिस तरह उस पार्टी के नेता जनेऊ पहनकर कैडर की बैठकों में बैठते थे, ठीक वैसा ही नाटक यहां भी होने वाला है। उनके अनुसार, यह सम्मेलन केवल कुछ विशेष लोगों को ब्राह्मण बनाकर बैठाने का एक बड़ा राजनीतिक ढोंग मात्र है।
घोटालों की आंच से डरी पार्टी सम्मेलनों के इस विवाद के बीच मंत्री ने पार्टी के भीतर मची अंदरूनी उथल-पुथल की भी विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया है कि मुख्य विपक्षी दल इस समय पुराने घोटालों की आंच से बहुत ज्यादा डरा हुआ है। राज्य में हुए चर्चित गोमती रिवर फ्रंट और बड़े खनन घोटालों का जिक्र करते हुए उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा निशाना साधा है। उनका दावा है कि इन घोटालों की लगातार हो रही जांच से बचने के लिए ही पार्टी के कई नेता बेचैन हो रहे हैं। इसी डर और घबराहट के कारण पार्टी के भीतर दल-बदल की एक बहुत बड़ी योजना भी गुपचुप तरीके से तैयार हो रही है।
बंगाल और महाराष्ट्र जैसी टूट की भविष्यवाणी अपनी पूरी बात का निष्कर्ष निकालते हुए मंत्री ने मुख्य विपक्षी दल के एक बहुत ही बुरे राजनीतिक हश्र की साफ भविष्यवाणी कर दी है। उन्होंने खुलेआम यह दावा किया है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता ने केंद्रीय गृह मंत्री को एक बेहद महत्वपूर्ण चिट्ठी पहले ही सौंप दी है। इस चिट्ठी को आधार बनाते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में जल्द ही एक बहुत बड़ी राजनीतिक टूट लोगों को देखने को मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस टूट का परिणाम बिल्कुल वैसा ही होगा जैसा हाल ही में बंगाल और महाराष्ट्र के क्षेत्रीय दलों का हुआ था। कुल मिलाकर उनका यह दावा विपक्षी दल के भविष्य पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवालिया निशान खड़े कर रहा है।





































