भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को बिकवाली का दबाव बना रहा और कारोबार समाप्त होने पर दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार की कमजोरी का असर बड़ी कंपनियों के शेयरों के साथ-साथ मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दिया। बीएसई सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17 प्रतिशत गिरकर 73,123.83 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 87.65 अंक यानी 0.39 प्रतिशत टूटकर 22,600 के स्तर पर आ गया। बाजार में अलग-अलग क्षेत्रों के शेयरों में मुनाफावसूली होने से प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ा। सबसे अधिक चिंता व्यापक बाजार में आई गिरावट को लेकर रही, जहां छोटे और मझोले शेयरों में बड़ी बिकवाली देखने को मिली। स्मॉलकैप सूचकांक करीब 2.9 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि सभी क्षेत्रीय सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।
धातु, रियल्टी और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट: शुक्रवार के कारोबार में किसी भी क्षेत्रीय सूचकांक को बढ़त नहीं मिली और सभी लाल निशान में बंद हुए। धातु क्षेत्र के सूचकांक में 2.71 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह 11,478.20 के स्तर पर आ गया। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं का सूचकांक 2.63 प्रतिशत टूटकर 33,922.00 पर बंद हुआ। रियल्टी क्षेत्र में 2.38 प्रतिशत और रसायन क्षेत्र में 2.32 प्रतिशत की गिरावट रही। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सूचकांक भी 2.26 प्रतिशत लुढ़क गया। इसके अलावा मीडिया क्षेत्र में 1.33 प्रतिशत, बैंकिंग क्षेत्र में 1.16 प्रतिशत और दवा क्षेत्र में 1.04 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। तेजी से बिकवाली के दबाव में दैनिक उपयोग की उपभोक्ता वस्तुओं का सूचकांक 0.99 प्रतिशत और वाहन क्षेत्र का सूचकांक 0.60 प्रतिशत गिरा। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भी 0.27 प्रतिशत की गिरावट रही। व्यापक बिकवाली ने बाजार के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों के प्रदर्शन को प्रभावित किया।
श्रीराम फाइनेंस और अदाणी समूह के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव: प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट की बात करें तो श्रीराम फाइनेंस निफ्टी के प्रमुख शेयरों में सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला रहा। इसके शेयर में 3.98 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अदाणी एंटरप्राइजेज 2.86 प्रतिशत और जेएसडब्ल्यू स्टील 2.83 प्रतिशत टूटे। जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयर में 2.74 प्रतिशत तथा अदाणी पोर्ट्स और टाटा स्टील के शेयरों में 2.70-2.70 प्रतिशत की गिरावट आई। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स का शेयर भी 2 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। इन शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाने में भूमिका निभाई। खास तौर पर वित्तीय सेवाओं, धातु और अदाणी समूह से जुड़े शेयरों में कमजोरी दिखाई दी। प्रमुख सूचकांकों की गिरावट के बीच इन कंपनियों के शेयरों में नुकसान ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया।
इटर्नल बना सबसे बड़ा लाभार्थी, कई दिग्गज शेयरों में भी तेजी: बाजार में चौतरफा गिरावट के बावजूद कुछ कंपनियों के शेयर बढ़त दर्ज करने में सफल रहे। इटर्नल का शेयर 4.25 प्रतिशत उछलकर 317.40 रुपये पर बंद हुआ और निफ्टी के प्रमुख शेयरों में सबसे ज्यादा लाभ दर्ज करने वाला रहा। अपोलो हॉस्पिटल्स के शेयर में 1.65 प्रतिशत और ओएनजीसी में 1.11 प्रतिशत की तेजी आई। एशियन पेंट्स 0.97 प्रतिशत, टीसीएस 0.92 प्रतिशत और अल्ट्राटेक सीमेंट 0.84 प्रतिशत चढ़े। मारुति सुजुकी के शेयर में 0.54 प्रतिशत तथा सिप्ला में 0.53 प्रतिशत की बढ़त रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 0.46 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ, जबकि इन्फोसिस में 0.04 प्रतिशत की मामूली तेजी दर्ज की गई। इन शेयरों में खरीदारी के बावजूद बाजार की समग्र दिशा कमजोर बनी रही और अधिकांश क्षेत्रीय सूचकांकों में गिरावट के कारण तेजी का असर सीमित रहा।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में लार्जकैप के मुकाबले ज्यादा नुकसान: शुक्रवार को बाजार की कमजोरी का सबसे व्यापक असर छोटी और मझोली कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट की तुलना में व्यापक बाजार में बिकवाली अधिक तीव्र रही। निफ्टी मिडकैप सूचकांक करीब 2.5 प्रतिशत गिर गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक में लगभग 2.9 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि निवेशकों ने केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों के शेयरों में ही नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों में भी जमकर मुनाफावसूली की। व्यापक बाजार में इस तरह की गिरावट का असर उन निवेशकों पर विशेष रूप से पड़ सकता है, जिनका निवेश मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अधिक है। क्षेत्रीय सूचकांकों की कमजोरी के साथ इन शेयरों में आई तेज गिरावट ने कारोबार के दौरान बने नकारात्मक माहौल को और गहरा किया।
सभी क्षेत्रीय सूचकांक गिरावट में बंद, बाजार की दिशा रही कमजोर: कारोबार के अंतिम आंकड़ों ने दिखाया कि शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में तेजी के मुकाबले बिकवाली का प्रभाव अधिक रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि सभी क्षेत्रीय सूचकांकों में नुकसान दर्ज किया गया। धातु, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं, रियल्टी, रसायन और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सबसे ज्यादा दबाव वाले क्षेत्रों में शामिल रहे। श्रीराम फाइनेंस सहित कई प्रमुख शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली, हालांकि इटर्नल, अपोलो हॉस्पिटल्स, ओएनजीसी और कुछ अन्य कंपनियों के शेयरों ने बढ़त दर्ज की। सबसे अहम संकेत मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों की बड़ी गिरावट रही, जिसने व्यापक बाजार में बिकवाली की तीव्रता को उजागर किया। इस तरह 23 अक्टूबर का कारोबार निवेशकों के लिए कमजोर रहा और बाजार के प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।














































