इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप क्षेत्र में शनिवार सुबह 7.7 तीव्रता का एक बहुत ही शक्तिशाली और भीषण भूकंप आया। इस आपदा के कारण तटीय क्षेत्रों में कई इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं और 22 लोगों की जान चली गई। स्थानीय प्रशासन ने भूकंप के बाद तुरंत तटीय इलाकों में सुनामी की आधिकारिक चेतावनी जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए।
सुनामी चेतावनी और दिशा-निर्देश: मौसम विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने फ्लोरेस द्वीप के पास समुद्र में आए इस उथले भूकंप के बाद सभी को सतर्क किया है। तटीय निवासियों को समुद्र तटों और नदियों के किनारे से दूर किसी सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर शरण लेने को कहा गया है। रिंग ऑफ फायर पर बसे होने के कारण इंडोनेशिया में भूकंपीय खतरा हमेशा बना रहता है, लेकिन इस बार झटके बेहद तेज थे।
लगातार तीन भूकंपीय झटके: राष्ट्रीय सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार भारतीय समयानुसार तड़के 3:28 बजे पहला भूकंप आया जिसकी गहराई 49 किलोमीटर थी। इसके बाद सुबह 3:43 बजे 6.3 तीव्रता का दूसरा झटका और 3:58 बजे 6.0 तीव्रता का तीसरा झटका फ्लोरेस सागर में दर्ज किया गया। सुबह 5:58 बजे सबसे तेज झटका आया, जिसका केंद्र पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत के एंडे शहर से उत्तर-उत्तर पश्चिम में स्थित था।
राहत और बचाव अभियान: बचाव दल के अधिकारी फथुर रहमान ने मीडिया को बताया कि टीम का मुख्य ध्यान मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश पर है। प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार 20 लोगों की मौत, छह के घायल होने और दो लोगों के मलबे में फंसे होने की बात सामने आई थी। अधिकारियों का कहना है कि बचाव कार्य जारी रहने से हताहतों की कुल संख्या में अभी और बढ़ोतरी हो सकती है।
सतह पर कंपन का विज्ञान: भूवैज्ञानिकों के अनुसार 0 से 700 किलोमीटर की गहराई वाले भूकंपों में उथले भूकंप सबसे ज्यादा तबाही मचाने वाले होते हैं। फ्लोरेस क्षेत्र में आया यह भूकंप महज 10 किलोमीटर की गहराई पर था, जिसके कारण तरंगों ने सतह पर भीषण कंपन पैदा किया। कम दूरी तय करने की वजह से भूकंपीय ऊर्जा का क्षय नहीं हुआ और इमारतों को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचा।
भौगोलिक स्थिति और भारत: प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ बेल्ट में स्थित होने के कारण इंडोनेशिया में भूगर्भीय हलचलें और ज्वालामुखी का फटना बेहद आम बात है। शनिवार को आए इस भीषण आपदा से इंडोनेशिया में चीख-पुकार मच गई और बचाव कार्य तेज कर दिए गए। उल्लेखनीय है कि इससे एक दिन पूर्व शुक्रवार को भारत के भी कुछ हिस्सों में हल्के झटके महसूस किए गए थे।











































