ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर प्रयास चल रहे हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच समझौते की शर्तों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने न्यूयॉर्क में ईरान की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और वह युद्ध को बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि शांति स्थापित करने के लिए वहां पहुंचे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान के राष्ट्रपति ने भी दुनिया में चल रही घटनाओं पर अपना पक्ष रखा और अमेरिका तथा इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ किए गए युद्ध और हमलों को लेकर अपने देश की स्थिति सामने रखी। अराघची ने एक तरफ शांति की इच्छा जताई, वहीं यह भी स्पष्ट किया कि अगर युद्ध दोबारा शुरू होता है तो ईरान उसका सामना करने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक ईरान सच्ची और वास्तविक कूटनीति के लिए भी तैयार है और अब आगे का फैसला अमेरिका को करना है।
युद्ध का खतरा कायम लेकिन बातचीत से इनकार नहीं: अराघची ने कहा कि ईरान युद्ध फिर शुरू होने की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है, चाहे वह बेहद विनाशकारी ही क्यों न हो। इसके बावजूद उन्होंने कूटनीतिक समाधान की संभावना को खत्म नहीं किया। उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से बातचीत का रास्ता खुला है और न्यूयॉर्क में हुई बैठकों का मुख्य विषय होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की शर्तें रही हैं। ईरान ने संघर्ष रोकने और जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने से जुड़ा प्रस्ताव अमेरिका तक पहुंचाया था। इस प्रस्ताव के तहत सात दिनों के भीतर समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने तथा व्यापक बातचीत को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने की बात कही गई थी। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि जलडमरूमध्य को खोलने की प्रक्रिया उसकी निर्धारित शर्तों की पूर्ति पर निर्भर होगी। इस तरह तेहरान की ओर से युद्ध और कूटनीति दोनों संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अपना रुख सामने रखा गया है।
होर्मुज को लेकर दोनों देशों में सबसे बड़ा टकराव: मौजूदा शांति प्रयासों में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम मुद्दा बन गया है। ईरान का कहना है कि वह इस समुद्री मार्ग को दोबारा खोल सकता है, लेकिन इसके लिए उसकी शर्तों को पूरा करना होगा। ईरानी प्रस्ताव में अमेरिकी सैन्य दबाव कम करने और ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए नौसैनिक अवरोध को हटाने की मांग शामिल रही है। इसके अलावा जमे हुए ईरानी धन को जारी करने और ईरान के तेल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों में राहत की बात भी प्रस्ताव से जुड़ी रही है। ईरान की ओर से कहा गया है कि इन कदमों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को सामान्य समुद्री आवाजाही के लिए दोबारा खोला जा सकता है और इसके बाद अंतिम समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ाई जा सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल इसी मुद्दे पर सबसे बड़ा गतिरोध दिखाई दे रहा है।
ट्रंप ने प्रस्ताव को बताया दबाव का नतीजा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की पेशकश को खारिज करते हुए कहा कि ईरान दबाव की स्थिति में ऐसा समझौता करना चाहता है। इसके जवाब में ईरानी विदेश मंत्री ने संकेत दिया कि तेहरान अपनी शर्तों से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। अराघची के मुताबिक ईरान को अमेरिकी राष्ट्रपति की शुरुआती प्रतिक्रिया मिल चुकी थी, लेकिन मध्यस्थों के जरिए अमेरिका का अंतिम रुख अभी पहुंचना बाकी था। ईरान ने कहा है कि आगे की प्रगति उसकी शर्तों के पूरा होने पर निर्भर करेगी। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाओं को पूरी तरह खत्म नहीं किया है, लेकिन प्रस्ताव को अमेरिका की ओर से अस्वीकार किए जाने के कारण समझौते की राह में नया गतिरोध पैदा हुआ है।
तेल की कीमतों पर भी पड़ा तनाव का असर: ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका के रुख पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका यह दावा कर रहा है कि ईरान का इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण नहीं है, जबकि तेल की कीमतें 35 डॉलर से बढ़कर 50 डॉलर तक पहुंची हुई हैं। गालिबाफ ने इस स्थिति को लेकर कहा कि या तो बाजार को समझ नहीं है या अमेरिका झूठ बोल रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है और इसी वजह से यह मार्ग दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष और बातचीत का केंद्रीय मुद्दा बन गया है। समुद्री मार्ग को लेकर पैदा हुआ गतिरोध केवल दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर तेल की आवाजाही और ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। इसी कारण शांति समझौते में होर्मुज को दोबारा खोलने की शर्त को विशेष महत्व मिल रहा है।
शांति वार्ता की राह में अभी कई अड़चनें: अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोशिश लंबे समय से चल रही है और मौजूदा संघर्ष को खत्म करने के लिए भी कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं। ईरान का कहना है कि वह शांति चाहता है और वास्तविक कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही वह युद्ध दोबारा शुरू होने की स्थिति में पूरी तरह तैयार रहने की बात भी कह रहा है। अमेरिका ने ईरान के हालिया प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जबकि ईरान अपनी शर्तों पर कायम है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुला होने के बावजूद अंतिम समझौता अभी नहीं हो पाया है। होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की शर्त, अमेरिकी सैन्य दबाव, ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक अवरोध और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दे वार्ता में अहम बने हुए हैं। तेल की आवाजाही पर पड़े असर ने भी इस गतिरोध को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अब आगे की बातचीत में दोनों देशों की शर्तों के बीच कितना रास्ता निकलेगा, इसी पर संघर्ष खत्म करने की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।














































