सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्र में स्थित दम्मम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बुधवार देर रात हुए हमले में एक सऊदी नागरिक की जान चली गई और आठ लोग घायल हो गए। सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने गुरुवार तड़के घटना की जानकारी देते हुए बताया कि हमले से हवाई अड्डे को भी भौतिक नुकसान पहुंचा है। फारस की खाड़ी के निकट स्थित यह हवाई अड्डा क्षेत्र के महत्वपूर्ण हवाई यातायात केंद्रों में शामिल है। घटना के बाद हवाई अड्डे की ओर आ रही उड़ानों के मार्ग बदलने पड़े, जिससे यात्रियों और विमान संचालन पर असर पड़ा। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक यह नहीं बताया है कि हमला किसने किया और इसके लिए किस प्रकार के हथियार का इस्तेमाल हुआ। हमले की जिम्मेदारी तय नहीं होने के बावजूद घटना ने सऊदी अरब में हवाई अड्डों और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
उड़ानों को दूसरे मार्गों पर भेजा गया, हमले की जिम्मेदारी अब भी अनिश्चित: हवाई अड्डे पर हमले के बाद विमानन गतिविधियों पर तत्काल असर देखने को मिला। उड़ानों पर नजर रखने वाली सेवा के अनुसार, किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर आ रहे विमानों के मार्ग बदल दिए गए। उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कितनी उड़ानों को मोड़ा गया या विमान संचालन सामान्य होने में कितना समय लगा। अधिकारियों ने भी हमले की प्रकृति और उससे हुए नुकसान का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया है। सऊदी अरब के प्रमुख हवाई अड्डे पहले भी हूती विद्रोहियों के मिसाइल और अन्य प्रक्षेपास्त्र हमलों के निशाने पर रहे हैं, और किंग फहद हवाई अड्डे पर भी पूर्व में हमले हो चुके हैं। इसके बावजूद ताजा घटना के लिए हूती विद्रोहियों को आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। ईरान समर्थित हूती संगठन ने भी अब तक इस हमले पर कोई बयान जारी नहीं किया है।
पूर्वी सऊदी अरब में चार ड्रोन हमले नाकाम करने का दावा: हवाई अड्डे पर हमले की खबर के बीच सऊदी गठबंधन ने बताया कि उसने देश के पूर्वी क्षेत्र में चार ड्रोन हमलों को विफल कर दिया। यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब सऊदी अरब में हवाई और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं। हालांकि, गठबंधन के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इन चार ड्रोन का लक्ष्य क्या था और क्या उनका दम्मम हवाई अड्डे पर हुए हमले से कोई संबंध था। इसी तरह, अधिकारियों ने यह भी नहीं बताया कि हवाई अड्डे पर हमला करने वाले पक्ष की पहचान करने के लिए जांच किस स्तर पर पहुंची है। एक ओर ड्रोन हमलों को नाकाम करने की जानकारी सामने आई है, वहीं दूसरी ओर हवाई अड्डे पर मौत और घायलों की घटना यह दिखाती है कि क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बने हुए हैं। फिलहाल दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध स्थापित करने वाली पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अमेरिका ने कुछ राजनयिकों और कर्मचारियों के परिवारों को देश छोड़ने को कहा: सऊदी अरब में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताओं के बीच अमेरिका ने बुधवार देर रात अपने कुछ राजनयिकों और अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया। यह कदम यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के कई घातक हमलों और संघर्ष के आगे बढ़ने की आशंका के बीच उठाया गया है। हालांकि, आदेश के दायरे, प्रभावित परिवारों की संख्या और देश छोड़ने की अंतिम समय-सीमा के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। यह फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब सऊदी अरब के हवाई अड्डे और तेल प्रतिष्ठान हमलों तथा ड्रोन गतिविधियों से जुड़े घटनाक्रम के केंद्र में हैं। अमेरिकी प्रशासन की ओर से परिवारों को हटाने का निर्देश सुरक्षा संबंधी जोखिमों को गंभीरता से लेने का संकेत देता है। फिर भी, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि अमेरिका ने सऊदी अरब से सभी राजनयिकों या सरकारी कर्मचारियों को वापस बुलाने का आदेश दिया है।
तेल क्षेत्र में ड्रोन का मलबा गिरने से चार लोग प्रभावित, दो की मौत: हवाई अड्डे पर हमले के आसपास के घटनाक्रम में सऊदी अरब के दक्षिण-पूर्व में अरामको के संचालन वाले एक तेल क्षेत्र में हुई घटना भी महत्वपूर्ण है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि एक ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद उसका मलबा गिरा, जिसकी चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए। मृतक नेपाल और फिलीपींस के नागरिक थे, जबकि घायलों में पाकिस्तान और भारत के नागरिक शामिल थे। यह घटना दिखाती है कि ड्रोन को हवा में रोकने के बाद भी उसके मलबे से जानलेवा नुकसान हो सकता है। हालांकि, मंत्रालय की जानकारी में इस घटना को दम्मम हवाई अड्डे पर हुए हमले से जोड़ने वाला कोई विवरण नहीं दिया गया। सऊदी अरब में ऊर्जा प्रतिष्ठानों की अहमियत को देखते हुए ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बनती हैं और इनका असर वहां काम करने वाले स्थानीय तथा विदेशी नागरिकों पर भी पड़ता है।
अरामको की इमारत में आग की घटना से बढ़ी चिंता, सऊदी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर सवाल: सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में अरामको की एक प्रशासनिक इमारत में भी इसी महीने की शुरुआत में आग लग गई थी। यह इमारत दुनिया की सबसे बड़ी तेल सुविधाओं में से एक से जुड़ी बताई गई है और आग लगने की घटना एक हमले के दौरान हुई थी। इससे पहले पिछले महीने हूती विद्रोहियों के एक ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद उसका मलबा गिरने से सऊदी अरब में रह रहे यमन के एक नागरिक की मौत हुई थी। उस समय इसे हूती हमलों के तेज होने के बाद आम नागरिक की मौत का पहला मामला बताया गया था। सऊदी अरब के जहाजों और तेल सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बीच अब हवाई अड्डे पर हमला और तेल क्षेत्र में हुई मौतों ने सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है। हालांकि, ताजा हवाई अड्डा हमला किसने किया, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लगातार सामने आ रहे घटनाक्रम के कारण सऊदी अरब में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और क्षेत्रीय संघर्ष के संभावित विस्तार पर नजर बनी हुई है।














































