लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद फैजुल्लागंज समेत कई इलाकों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। करीब पांच दिनों से 10 हजार से ज्यादा परिवार जलभराव की समस्या का सामना कर रहे हैं और कई घरों में पानी घुस चुका है। कुछ परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है, जबकि कई लोग अब भी छतों के सहारे दिन गुजार रहे हैं। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में नाव चलानी पड़ी है। लोहरामऊ, श्याम सुंदर कॉलोनी, गोमती पुरम, गणेश विहार, मामा कॉलोनी, दाऊद नगर, दुर्गा कॉलोनी, पवन विहार और कृष्णा विहार में बड़ी संख्या में घर जलभराव से प्रभावित हैं। दाऊदनगर, मिलनतनगर, रामनगर, गणेश विहार और मामा कॉलोनी में कई मकानों पर ताले लगे दिखाई दे रहे हैं।
राहत सामग्री बस्तियों तक पहुंचाने की चुनौती: जलभराव के कारण प्रभावित लोगों के सामने भोजन और पीने के पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है। स्थानीय निवासी ममता त्रिपाठी ने बताया कि राहत सामग्री राहत केंद्रों तक तो पहुंच रही है, लेकिन बस्तियों के भीतर रहने वाले लोगों को पर्याप्त भोजन और पेयजल नहीं मिल पा रहा है। पानी से घिरे कई परिवारों ने सुरक्षित स्थानों का रुख कर लिया है। घरों के भीतर और आसपास पानी जमा होने से रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हैं और लोगों को जरूरी सामान बचाने के साथ-साथ खाने-पीने की व्यवस्था की भी चिंता करनी पड़ रही है। लगातार पांच दिनों से बनी इस स्थिति के कारण लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है और राहत कार्यों को प्रभावित बस्तियों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की मांग तेज हो रही है।
चोरी के डर से रातभर जाग रहे लोग: जलभराव से प्रभावित परिवारों की मुश्किल केवल पानी तक सीमित नहीं है। कई लोगों को इस बात का डर है कि घर खाली छोड़ने पर चोरी की घटना हो सकती है। इसी कारण लोग रात के दो से तीन बजे तक जागकर अपने घरों और सामान की निगरानी कर रहे हैं। बढ़ते पानी को रोकने के लिए कुछ परिवारों ने घर के मुख्य दरवाजों के सामने ईंटों की छोटी दीवारें बनाई हैं, लेकिन पानी का दबाव बढ़ने के कारण ये उपाय भी ज्यादा कारगर साबित नहीं हो रहे हैं। जिन परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है, वे अपने घरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इस दोहरी परेशानी ने जलभराव से प्रभावित लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा: बाढ़ की समस्या को लेकर प्रभावित ग्रामीणों में नाराजगी भी सामने आई है। बीकेटी विधायक योगेश शुक्ला इटौंजा में राहत सामग्री बांटने पहुंचे थे, लेकिन ग्रामीणों ने उनकी गाड़ी रोककर विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने दुघरा और अकड़रिया क्षेत्रों के लिए मोटरबोट उपलब्ध कराने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने भोजन और राशन की व्यवस्था बढ़ाने की भी मांग रखी। ग्रामीणों का कहना था कि जलभराव के कारण कई इलाकों में सामान्य आवाजाही मुश्किल हो गई है और ऐसे में राहत सामग्री तथा आवश्यक सामान पहुंचाने के लिए अतिरिक्त साधनों की जरूरत है। विधायक के सामने लोगों ने अपनी समस्याएं रखीं और प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेज करने की मांग की।
गोमती के पानी ने कई प्रमुख स्थानों को घेरा: बढ़े हुए जलस्तर का प्रभाव गोमती नगर के रिवर फ्रंट और आसपास चल रहे विकास कार्यों पर भी पड़ा है। रिवर फ्रंट पर नदी का पानी पहुंचने से हजारों पेड़-पौधे जलमग्न हो गए हैं। क्रूज निर्माण के लिए रखा गया सामान भी पानी में फंस गया है। लामार्ट की ओर बनाए जा रहे हरित गलियारे के निर्माण स्थल पर भी पानी भर गया है। इसके अलावा प्राचीन लेटे हनुमान जी मंदिर के गर्भगृह और हनुमत धाम परिसर तक पानी पहुंचने से धार्मिक स्थल भी प्रभावित हुए हैं। इससे जलस्तर बढ़ने के असर का दायरा काफी बड़ा होने का पता चलता है और शहर के कई हिस्सों में जल निकासी की चुनौती बनी हुई है।
तीन दिन में घट सकता है जलस्तर, Rajnath Singh ने दिए निर्देश: शारदा सहायक खंड के अधिशासी अभियंता मुकेश वैश्य ने बताया कि पीलीभीत और लखीमपुर से छोड़े जा रहे बारिश के पानी के कारण गोमती का जलस्तर बढ़ा है। लखनऊ में बैराज के सभी गेट खोल दिए गए हैं और पीछे से नदियों में पानी उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उनके अनुसार स्थिति को सामान्य होने में करीब तीन दिन का समय लग सकता है। स्थानीय लोगों ने याद दिलाया कि वर्ष 2008 में भी गोमती का जलस्तर बढ़ने के बाद हजारों घर जलभराव की चपेट में आए थे और करीब 18 साल बाद फिर वैसी स्थिति बनी है। इस बीच रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला अधिकारी से फोन पर बातचीत की और प्रभावित क्षेत्रों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता से चलाने, जरूरतमंद लोगों को हरसंभव सहायता और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रशासनिक स्तर पर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होने देने को कहा गया है।















































