सावन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली कामिका एकादशी का सनातन धर्म में अत्यंत विशेष और पवित्र स्थान है। इस दिन सर्वव्यापी भगवान श्री हरि विष्णु के ‘उपेन्द्र’ स्वरूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस एकादशी को कई स्थानों पर ‘पवित्रा एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है।
धर्म-ग्रंथों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत रखने से साधक के जीवन के समस्त जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय हो जाता है और उसे अक्षय सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
कामिका एकादशी का पौराणिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत व पूजन करने से व्यक्ति को एक हजार गौ-दान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
- तीर्थ स्नान का फल: इस शुभ तिथि पर पवित्र नदियों या तीर्थ स्थलों पर स्नान करने से अश्वमेघ यज्ञ करने के बराबर पुण्य मिलता है।
- कष्टों से मुक्ति: इस दिन व्रत रखने से जीवन के बिगड़े काम बनने लगते हैं और पितृ दोष व अन्य ग्रहों की अशुभता से राहत मिलती है।
- लक्ष्मी-विष्णु कृपा: इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है, जिससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।
तिथि एवं पारण का समय (2026)
वर्ष 2026 में कामिका एकादशी की तिथि और पारण का समय इस प्रकार रहेगा:
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 8 अगस्त 2026 को दोपहर 01:59 बजे से
- एकादशी तिथि समाप्त: 9 अगस्त 2026 को सुबह 11:04 बजे तक
- व्रत तिथि (उदया तिथि): 9 अगस्त 2026, रविवार
- व्रत पारण का समय: 10 अगस्त 2026 को सुबह 05:47 बजे से 08:00 बजे तक
9 अगस्त 2026 के शुभ मुहूर्त
पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए कामिका एकादशी के दिन निम्नलिखित शुभ समय रहेंगे:
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:22 से प्रातः 05:04 तक
- प्रातः सन्ध्या: प्रातः 04:43 से प्रातः 05:47 तक
- अमृत काल: प्रातः 06:42 से प्रातः 08:09 तक
- द्विपुष्कर योग: प्रातः 11:04 से दोपहर 02:43 तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 से दोपहर 12:53 तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:40 से दोपहर 03:33 तक
- गोधूलि मुहूर्त: सायं 07:06 से सायं 07:27 तक
- सायाह्न सन्ध्या: सायं 07:06 से रात्रि 08:10 तक
व्रत एवं पूजा की विस्तृत विधि
कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए इस प्रकार पूजा-अर्चना करें:
- संकल्प व स्नान: एकादशी के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर दैनिक क्रियाओं से निवृत्त हों और स्नान करें। इसके पश्चात हाथ में जल लेकर शुद्ध मन से व्रत का संकल्प लें।
- पूजन सामग्री: पूजा स्थल पर भगवान विष्णु के उपेन्द्र स्वरूप की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें रोली, अक्षत, फल, फूल, तिल, दूध और पंचामृत अर्पित करें।
- तुलसी दल का अर्पण: भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है। उन्हें तुलसी पत्र अवश्य चढ़ाएं, क्योंकि बिना तुलसी के श्री हरि का भोग पूर्ण नहीं माना जाता।
- पाठ व कथा: पूजा के समय विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करें। इसके बाद कामिका एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- आरती व फलाहार: अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती गाएं। दिन भर निराहार या फलाहारी व्रत का पालन करें।
- पारण नियम: अगले दिन (10 अगस्त) द्वादशी तिथि को किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं, दान-दक्षिणा दें और तत्पश्चात शुभ मुहूर्त में अपना व्रत खोलें।
तुलसी पूजन का विशेष महत्व
कामिका एकादशी के दिन तुलसी पूजन का विशेष विधान है। इस दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित कर दीप जलाने से जीवन के तमाम कष्ट दूर होते हैं। पौराणिक मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल समर्पित करता है, वह संसार के समस्त बंधनों और दुखों से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त करता है।









































