आज से बजट सत्र की शुरुआत हो गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के भाषण से सत्र को शुरू किया गया। राष्ट्रपति ने अपने भाषण में मोदी सरकार की उपलब्धियों को गिनाया।
राष्ट्रपति ने कई पहलुओं पर अपनी बात रखी। अब राष्ट्रपति के भाषण पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई है। नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के सांसद फारूक अब्दुल्ला ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन की सराहना करते हुए इसे “अच्छा संबोधन” बताया। वहीं, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ने इसे चुनावी भाषण करार दिया। थरूर ने कहा कि अमूमन राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ते लेकिन, ऐसा लग रहा था कि भाजपा सरकार उनके माध्यम से अपना अगला अभियान चला रही है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बजट सत्र की शुरुआत करते हुए अपने संबोधन में रक्षा, अंतरिक्ष, महिला सशक्तिकरण, विकसित भारत के निर्माण के लिए अमृत काल के दौरान कर्तव्यों के महत्व सहित कई मुद्दों को छुआ। देश के विकास में राजनीतिक स्थिरता की भूमिका को रेखांकित करते हुए मुर्मू ने कहा कि भारत केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रहित में लिये गये निर्णयों के कारण अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है। कल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार 2.0 का आखिरी पूर्ण बजट पेश करेंगी। इससे पहले विपक्षी नेताओं ने तीखे तेवर अख्तियार किये हैं।
विपक्षी फारूक ने तारीफ की, अधीर रंजन बोले- बेरोजगारी का मुद्दा गायब
शनल कांफ्रेंस (नेकां) के सांसद फारूक अब्दुल्ला ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन की सराहना करते हुए इसे “अच्छा संबोधन” बताया। उधर, कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के रुख को दोहराता है। उन्होंने कहा कि “राष्ट्रपति का अभिभाषण दोहराता है कि सरकार क्या चाहती है और क्या करती है। स्वाभाविक रूप से राष्ट्रपति सरकार का बयान प्रस्तुत करते हैं। फिर भी, हम राष्ट्रपति के अभिभाषण का सम्मान करते हैं। जब सदन में अभिभाषण पर चर्चा होगी, तो हम अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।”
अधीर रंजन ने एएनआई से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में बेरोजगारी के मुद्दे का कोई उल्लेख नहीं था। चौधरी ने कहा कि नागरिक केवल सरकार की विफलताओं को देख सकते हैं। “सरकार के खिलाफ बहुत सारे मुद्दे हैं। हम इन मुद्दों को एक के बाद एक संसद में उठाएंगे।”
थरूर ने की तीखी आलोचना
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन की आलोचना करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी के लिए ‘चुनावी भाषण’ बताया। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि भाजपा सरकार उनके माध्यम से अपना अगला अभियान चला रही है। पूरा भाषण एक चुनावी भाषण था जो सरकार द्वारा किए गए हर काम के लिए उसकी प्रशंसा करने की कोशिश कर रहा था।”
गौरतलब है कि अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने सरकार के ‘विकास’ की प्रशंसा की। अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर ‘कार्रवाई’ करने, विवादास्पद तीन तलाक को खत्म करने और रक्षा क्षेत्र के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए इसकी सराहना की।





























