सभी धर्मों व शास्त्रों में सत्य को उत्तम माना गया है ये संसार की सबसे सुंदर चीज है शास्त्रों और ग्रंथों में भी इसे महत्वपूर्ण बताया गया है मान्यता है कि सत्य के लिए किसी से भी संघर्ष करने के लिए हमेशा मनुष्य को तैयार रहना चाहिए।

सत्य इतना अधिक मूल्यवान है कि यह मनुष्य को सौ झूठ बोलने से भी बचा सकता है सच इतना महत्वपूर्ण होने के बाद भी इस दुनिया में झूठ यानी असत्य का ही बोलबाला है। अगर आप सत्य की शक्ति व इसकी महिमा को विस्तार से जानना चाहते है तो हमारा ये पूरा लेख आपको पढ़ना होगा।

सनातन धर्म और आध्यात्मिक तौर पर सत्य को सबसे अधिक जरूरी व उपयोगी माना गया है, असत्य का आश्रय लेने वालों को सदैव यह स्मरण रखना चाहिए कि अंत में वियज सत्य की ही होती है यह भी कहा जा सकता है कि जहां सत्य होता है वहीं धर्म भी होता है और जहां धर्म होता है वहीं विजय होती है सत्य का पालन करने वालों को हमेशा ही सफलता और विजय की प्राप्ति होती है। अगर मनुष्य की जीवन रूपी इमारत सत्य रूपी नींव पर खड़ी होती है तो मनुष्य दिन रात तरक्की करता है और अपनी इसी प्रकृति को वह संरक्षित भी रखता है।

सत्य के महत्व पर भगवान बुद्ध ने कहा है कि सत्य को छोड़कर जो भी मनुष्य असत्य मार्ग पर चलता है या झूठ बोलता है वह धर्म का उल्लंघन करता है जिस मनुष्य को परलोक की चिंता नहीं होती है वह दुनिया में बड़े से बड़ा पाप भी कर सकता है इसलिए असत्य का त्याग करना ही लाभकारी होता है मनुष्यों को कभी किसी स्थिति, समस्या व दुख में असत्य के मार्ग को नहीं अपनाना चाहिए बल्कि सत्य के मार्ग पर चलता चाहिए इससे मनुष्य की विजय होती है और समाज में उसका सम्मान भी बढ़ता है।






























