ज्योतिषाचार्य पं.अविनाश मिश्र शास्त्री (चित्रकूटधाम)

कामिका एकादशी व्रत सबके लिए 21 जुलाई 2025 दिन सोमवार को होगा।
कामिका एकादशी सावन महीने की प्रथम एकादशी होगी। संयोग की बात यह है कि कामिका एकादशी पर सावन सोमवार का व्रत भी किया जाएगा। ऐसे में भक्तों को भगवान विष्णु और महाकाल को साथ में प्रसन्न करने का अवसर प्राप्त हो रहा है।
हर साल सावन माह के कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि पर कामिका एकादशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से साधक की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। इसके अलावा एकादशी का उपवास रखने से व्यक्ति का भाग्योदय भी होता है, जिसके प्रभाव से धन लाभ, सुख-समृद्धि और यश कीर्ति की प्राप्ति होती हैं।
इस वर्ष 21 जुलाई 2025 को कामिका एकादशी है। यह सावन महीने की प्रथम एकादशी भी होगी। यदि इस दिन केवल महादेव को जल और विष्णु जी को पीला फल अर्पित किया जाए, तो सभी दुख-दर्द का निवारण होता है। हालांकि इस खास संयोग पर शिव और विष्णु चालीसा का पाठ करने से करियर, व्यापार और निवेश में अच्छा लाभ हो सकता है।
कामिका एकादशी पर इस बार दो शुभ योग बन रहे हैं, जो इस दिन की महत्ता को और बढ़ाते हैं।
वृद्धि योग – यह योग सफलता, उन्नति और समृद्धि से जुड़ा हुआ है। जो भी कार्य इस योग में किया जाए, उसमें प्रगति के संकेत होते हैं पूजा पाठ से लेकर धार्मिक यात्रा तक वृद्धि योग के दौरान किए गए सभी कार्य शुभ माने जाते हैं।
ध्रुव योग – यह योग स्थायित्व का प्रतीक माना गया है। इस योग में किए गए पूजा-पाठ का फल लंबे समय तक बना रहता है। भक्तजन इस योग में भगवान विष्णु की भक्ति कर अपने जीवन में स्थिरता और शांति के काम में करते हैं।
इन दोनों शुभ योगों के चलते 21जुलाई की कामिका एकादशी विशेष रूप से फलदायक मानी जा रही है।
कामिका एकादशी और सावन सोमवार का एक ही दिन होना एक दुर्लभ संयोग है।
इस संयोग को “हरिहर योग” भी कहा जा रहा है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की पूजा की जाएगी।
इस दिन रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा वृष राशि में रहेंगे और सर्वार्थ सिद्धि का योग बनेगा.।
इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में शुभता का आगमन होता है।
भगवान शिव की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं।
इस दिन व्रत रखें और भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करें।
भगवान शिव को जल चढ़ाएं और बेलपत्र, धतूरा आदि अर्पित करें।
यह एक शुभ संयोग है जिसका लाभ उठाने के लिए 21 जुलाई 2025 को भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा अवश्य करें।
जो मनुष्य इस श्रावण मास की एकादशी के दिन भक्तिपूर्वक तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पण करते हैं, वे इस संसार के समस्त पापों से दूर रहते हैं। विष्णु भगवान रत्न, मोती, मणि तथा आभूषण आदि से इतने प्रसन्न नहीं होते जितने तुलसी दल से ।
तुलसी दल पूजन का फल चार भार चाँदी और एक भार स्वर्ण के दान के बराबर होता है। हे नारद! मैं स्वयं भगवान की अतिप्रिय तुलसी को सदैव नमस्कार करता हूँ। तुलसी के पौधे को सींचने से मनुष्य की सब यातनाएँ नष्ट हो जाती हैं। दर्शन मात्र से सब पाप नष्ट हो जाते हैं और स्पर्श से मनुष्य पवित्र हो जाता है ।
कामिका एकादशी की रात्रि को दीपदान तथा जागरण के फल का माहात्म्य चित्रगुप्त भी नहीं कह सकते। जो इस एकादशी की रात्रि को भगवान के मंदिर में दीपक जलाते हैं उनके पितर स्वर्गलोक में अमृतपान करते हैं तथा जो घी या तेल का दीपक जलाते हैं, वे सौ करोड़ दीपकों से प्रकाशित होकर सूर्य लोक को जाते हैं ।
ब्रह्माजी कहते हैं कि हे नारद! ब्रह्महत्या तथा भ्रूण हत्या आदि पापों को नष्ट करने वाली इस कामिका एकादशी का व्रत मनुष्य को यत्न के साथ करना चाहिए। कामिका एकादशी के व्रत का माहात्म्य श्रद्धा से सुनने और पढ़ने वाला मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को जाता है।
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