ज्योतिषाचार्य पं.अविनाश मिश्र शास्त्री (चित्रकूटधाम)
ब्रह्मांड में कुछ ऐसे नियम काम करते हैं जो हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं, और जब हम इन नियमों को समझकर उनके अनुसार कार्य करते हैं, तो हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं,मनचाहा जीवन पाने के लिए आकर्षण के नियम के साथ डिटैचमेंट , कंपन, कर्म, ऊर्जा और कारण-प्रभाव के नियमों का पालन करना आवश्यक है। अगर आपको सफलता, धन लाभ, मनचाहा प्यार, अच्छा स्वास्थ्य, व्यापार में तरक्की, नौकरी में प्रमोशन चाहिए तो ब्रह्माण्ड के इन नियम एवं सिद्धांतों को करें आत्मसात।
अधिकांश लोग मनचाहा प्यार पाने के लिए या फिर अच्छा स्वास्थ्य, धन लाभ, उन्नति-तरक्की के लिए आकर्षण के सिद्धांत जिसे अंग्रेजी में लॉ ऑफ अट्रैक्शन कहते हैं, को ही जानते हैं, लेकिन कुछ और सहायक नियम-सिद्धान्त हैं, जिनका पालन कर पूर्ण रूप से सफलता पाई जा सकती है।
भाग्य का संचालन करने वाले अदृश्य नियम-* इस सृष्टि में सब कुछ गहरे, अदृश्य नियमों से संतुलन में संचालित होता है जिन्हें हम •’ब्रह्मांडीय या आध्यात्मिक नियम’ भी कह सकते हैं।
आकर्षण का नियम-जैसे विचार आप मन में रखते हैं यानि सोचते हैं, वैसी ही ऊर्जा आप ब्रह्मांड में निरन्तर भेजते हैं और वही ऊर्जा आपको वापस सुख-दुःख के रूप में मिलती है। इसलिए कहा जाता है कि अगर आप सकारात्मक सोचेंगे, तो सकारात्मक अनुभव ही आपके समक्ष आकर्षित होंगे। यह सिद्धान्त हमारे विचारों और भावनाओं की शक्ति पर आधारित है। अगर कोई विद्यार्थी बार-बार सोचता है कि वह फेल हो जाएगा तो वह डर, तनाव और भ्रम की ऊर्जा को विकसित करता है और अंततः वही परिणाम पाता है।
डिटैचमेंट (अनासक्ति) का नियम- यह नियम कहता है कि जब आप किसी चीज़ की प्राप्ति के लिए अत्यधिक आसक्ति छोड़ देते हैं, तब ही वह आपके पास सहज रूप से आती है। इच्छाएं रखें, लेकिन परिणाम से बंधे न रहें। यह नियम हमें मानसिक स्वतंत्रता और विश्वास का भाव देता है। जब हम किसी चीज़ को पाने की ज़िद छोड़ देते हैं, तब वह चीज़ स्वतः हमारी ओर आकर्षित होने लगती है। किसी परीक्षा में आपने खूब मेहनत की, लेकिन आप परिणाम को लेकर परेशान नहीं हैं। आपने पूरी तैयारी की, लेकिन रिज़ल्ट की चिंता छोड़ दी, यह डिटैचमेंट है, इस स्थिति में आप शांत रहते हैं और अधिक सफल होते हैं।
कंपन का नियम- इस नियम के अनुसार, सृष्टि की हर चीज़, चाहे वह विचार हो, वस्तु हो या व्यक्ति, एक विशिष्ट कंपन उत्पन्न करती है। उच्च कंपन वाले विचार, जैसे प्रेम, करुणा, शांति हमें ऊर्जावान करते हैं। आपकी हर भावना एक ऊर्जा कंपन उत्पन्न करती है। जब आप किसी से प्रेमपूर्वक बात करते हैं, तो सामने वाला भी वैसी ही ऊर्जा महसूस करता है। लेकिन अगर आप क्रोध में हैं, तो आप बिना कुछ कहे भी सामने वाले को नकारात्मक ऊर्जा भेजते हैं।
कर्म का नियम-जो जैसा करता है, वैसा ही भरता है। हमारे प्रत्येक कार्य, विचार और भावना का प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। यदि आप बिना स्वार्थ के यानि निःस्वार्थ किसी की मदद करते हैं, तो भविष्य में जब आप मुश्किल में होंगे, कोई न कोई आपकी सहायता ज़रूर करेगा, यह ब्रह्मांडीय संतुलन है।
ऊर्जा का नियम- सब कुछ ऊर्जा है, आपके विचार, आपकी भावनाएं, आपका शरीर। ऊर्जा नष्ट नहीं होती, केवल रूप बदलती है। यह नियम आत्मा की अमरता और ऊर्जा के संरक्षण की बात करता है। हर चीज़, चाहे जीवित हो या निर्जीव, ऊर्जा है। एक प्रेरणादायक पुस्तक पढ़ने से या किसी सकारात्मक व्यक्ति के साथ समय बिताने से आप खुद को ऊर्जावान महसूस करते हैं क्योंकि आप उस उच्च ऊर्जा से जुड़ते हैं।
कारण और प्रभाव का नियम- हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। हम जो बीज आज बोते हैं, वही भविष्य में फल बनकर आता है। यह वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। हर कार्य का परिणाम होता है, यदि आप आलस्य करते हैं और समय पर कार्य नहीं करते, तो परिणामस्वरूप आपको नुकसान होता है, लेकिन यदि आप अनुशासित रहते हैं, तो सफलता निश्चित होती है।
“ज्योतिष शास्त्र, वास्तुशास्त्र, वैदिक अनुष्ठान व समस्त धार्मिक कार्यो के लिए संपर्क करें: –
श्री रामकृष्ण ज्योतिष केन्द्र श्रीरामकृष्णज्योतिष अनुष्ठान केन्द्र संपर्क सूत्र:-7389695052,8085152180






























