बढ़ती चुनावी तपिश: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता Brijbhushan Sharan Singh के पाला बदलने की खबरों ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। कैसरगंज के पूर्व सांसद के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की संभावनाओं को लेकर कई दिनों से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं।
विधायक का खंडन: इन अटकलों के बीच Gonda से भारतीय जनता पार्टी के विधायक Pratik Bhushan Singh ने मोर्चा संभाला और स्थिति स्पष्ट की। अपने पिता के भविष्य के राजनीतिक कदमों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि बृजभूषण शरण सिंह का फिलहाल सपा में जाने का कोई इरादा नहीं है। प्रतीक भूषण ने हंसते हुए इन खबरों को खारिज कर दिया और कहा कि उनके पिता के राजनीतिक प्लान में ऐसा कुछ भी शामिल नहीं है।
सपा प्रमुख का रुख: समाजवादी पार्टी के प्रमुख Akhilesh Yadav ने भी इन अटकलों पर अपनी टिप्पणी दी है। उन्होंने सीधे तौर पर कुछ न कहते हुए गेंद बृजभूषण सिंह के पाले में डाल दी। अखिलेश ने कहा कि राजनीतिक परिस्थितियां समय के साथ बदलती रहती हैं और इस बारे में स्वयं पूर्व सांसद ही ज्यादा बेहतर तरीके से जवाब दे सकते हैं। उनके इस संतुलित बयान ने राजनीतिक जानकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
पुराने विवाद और प्रशंसा: बृजभूषण शरण सिंह और बीजेपी के बीच की कड़वाहट नई नहीं है, क्योंकि वे पहले भी कई बार पार्टी की नीतियों की सार्वजनिक आलोचना कर चुके हैं। हाल ही में जब अखिलेश यादव ने झुलसी हुई बीजेपी विधायक अनुपमा जायसवाल से अस्पताल में मुलाकात की, तो बृजभूषण ने इसे उनका बड़प्पन बताया। विपक्षी नेता की इस सार्वजनिक सराहना को उनके सपा की ओर बढ़ते झुकाव के रूप में देखा जा रहा था।
महिला सशक्तीकरण: राजनीति के अलावा प्रतीक भूषण सिंह ने सरकार के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार का एक बड़ा कदम है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में महिलाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश की नारी शक्ति ही भविष्य में बड़े और सकारात्मक बदलावों की सूत्रधार बनेगी।
अन्य नेताओं पर प्रहार: अपने संबोधन के अंत में प्रतीक भूषण सिंह ने पप्पू यादव को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वह पप्पू यादव को कोई महत्वपूर्ण या बड़ा नेता नहीं मानते हैं, इसलिए उनके बारे में चर्चा करना समय की बर्बादी है। प्रतीक भूषण ने इस तरह स्पष्ट कर दिया कि उनके पिता बीजेपी के प्रति वफादार हैं और विपक्ष के साथ उनकी प्रशंसा केवल एक शिष्टाचार है, न कि दल बदलने का संकेत।



































