ट्रंप की घोषणा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन रवाना होने से पहले ईरान के मुद्दे पर अपनी भावी रणनीति स्पष्ट की है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत अब अंतिम सांसें ले रही है और वह हार की कगार पर है। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका इस संघर्ष को शांतिपूर्ण ढंग से या किसी अन्य तरीके से जीत लेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है।
सैन्य विनाश का दावा: राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार ईरान की एयरफोर्स और नेवी अब क्रियाशील नहीं हैं और उनका अस्तित्व समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि ईरान की युद्ध मशीनरी का हर कल्पपुर्जा तबाह हो गया है जिससे वह मुकाबला करने में अक्षम है। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी कि या तो ईरान के नेता सही निर्णय लें या फिर अमेरिका सैन्य कार्रवाई पूरी करेगा। उनके मुताबिक ईरान के पास अब अमेरिका की शक्ति के सामने झुकने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
प्रतिबंधों का असर: ईरान पर लगाए गए कड़े समुद्री प्रतिबंधों और नाकेबंदी को ट्रंप ने अपनी एक बड़ी रणनीतिक जीत के रूप में पेश किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान की घेराबंदी 100 प्रतिशत सफल रही है और इसके परिणाम सबके सामने हैं। इन प्रतिबंधों ने ईरान की आर्थिक और सैन्य गतिविधियों को पूरी तरह से ठप कर दिया है जिससे वह पंगु हो गया है। ट्रंप ने इसे अपनी सरकार की विदेश नीति की एक प्रभावी और सफल उपलब्धि के तौर पर रेखांकित किया।
चीनी हस्तक्षेप पर रुख: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ईरान मामले में संभावित भूमिका को ट्रंप ने पूरी तरह से अनावश्यक करार दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ईरान जैसे मामलों को सुलझाने के लिए किसी अन्य देश की सहायता की कोई जरूरत नहीं है। ट्रंप का मानना है कि अमेरिका अकेले ही इस स्थिति को नियंत्रित करने और जीत हासिल करने के लिए पर्याप्त शक्तिशाली है। उन्होंने किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की संभावना को सिरे से खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा।
नाटो पर प्रहार: अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मुद्दे पर ट्रंप ने नाटो पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने संकट में साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि नाटो उनके लिए निराशा का कारण रहा है क्योंकि वह जरूरत के समय अमेरिका के साथ नहीं था। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि अमेरिका को भविष्य में नाटो की सहायता की कोई आवश्यकता महसूस नहीं होती है। उनका यह बयान अमेरिका और उसके पुराने सहयोगियों के बीच बढ़ती दूरियों को साफ तौर पर दर्शाता है।
भविष्य की सुरक्षा: हालांकि मार्क रुट ने नाटो की मजबूती और भविष्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए संगठन का बचाव किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान संकट वर्तमान में वैश्विक सुरक्षा के लिए एक गंभीर और महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। रुट ने कहा कि वह नाटो की एकता और भविष्य को लेकर आशावादी हैं और संगठन सुरक्षा प्रदान करता रहेगा। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में नाटो की भूमिका को कमतर करके नहीं देखा जाना चाहिए।



































