एंग्जाइटी और उसका प्रभाव: क्या अचानक आपकी सांसें काफी तेज हो जाती हैं और दिल की धड़कन बढ़ जाती है। इसके साथ ही क्या आपके कंधे जकड़े हुए महसूस होते हैं और सिरदर्द होने लगता है। जान लें कि यह कोई वायरल इंफेक्शन नहीं बल्कि एंग्जाइटी की समस्या है। एंग्जाइटी को हिंदी में चिंता कहते हैं और चिंता चिता के समान मानी जाती है। अगर किसी को चिंता लग जाए तो बिना बीमारी के भी शरीर पनप नहीं पाता।
चिंता की बढ़ती बीमारी: आजकल लोगों में चिंता की ये बीमारी एक महामारी की तरह तेजी से फैल रही है। लोगों ने आज अपनी जिंदगी में न जाने कितने मापदंड बना लिए हैं। जब जीवन के ये मापदंड पूरे नहीं होते हैं तो व्यक्ति की चिंता बढ़ जाती है। कई बार यह चिंता बाहरी कारणों से और कई बार अंदरूनी कारणों से हो सकती है। चिंता केवल मन की एक अवस्था है जिसे मन महसूस करता है।
खतरे और अलर्ट मोड: हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो एंग्जाइटी एक ऐसी स्थिति है जिसमें हम खतरा महसूस करते हैं। यह बाहरी खतरा हो सकता है जहां शरीर या मन को बाहरी कारण से नुकसान पहुंचता है। यह आंतरिक खतरा भी हो सकता है जहां हम अपनी क्षमताओं या अक्षमताओं को लेकर परेशान रहते हैं। कुल मिलाकर व्यक्ति, मन और शरीर गंभीर रूप से चुनौती का सामना करते हैं। इससे पूरा शरीर बहुत ज्यादा अलर्ट मोड में चला जाता है।
हार्मोन और सीने में जकड़न: एंग्जाइटी होने पर एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल जैसे तनाव से जुड़े हार्मोन शरीर से निकलते हैं। इन हार्मोंस की वजह से ही शरीर में एंग्जाइटी के कई लक्षण महसूस होते हैं। मन और दिमाग में चिंता बढ़ने से दिल और छाती में लक्षण दिखाई देते हैं। शरीर बाहरी रूप से कोई संकेत दे उससे पहले ही ये लक्षण दिखते हैं। तेज नाड़ी और छाती में जकड़न एंग्जाइटी के सबसे प्रमुख लक्षण हैं।
सांस और पेट की समस्या: एंग्जाइटी होने पर व्यक्ति की सांस बढ़ने लगती है और तेज सांसें आने लगती हैं। कई बार इसमें सांस लेने में तकलीफ या फिर घुटन सी भी महसूस होती है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को चक्कर आना और थकान होने की भी पूरी संभावना रहती है। जब आप बहुत ज्यादा एंग्जाइटी फील करते हैं तो गट हेल्थ प्रभावित होती है। इससे आंतें संवेदनशील हो जाती हैं और पाचन तंत्र पर असर पड़ता है।
मांसपेशियों और आंतों की स्थिति: तनाव में शरीर का ज्यादातर खून मांसपेशियों की ओर प्रवाहित होने लगता है। इससे आंतों की कार्यप्रणाली धीमी हो जाती है जिससे मतली और पेट फूलता है। कई बार इस स्थिति में बार-बार शौचालय जाने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। चिंता और डर की वजह से शरीर को सुरक्षित रखने के लिए मसल्स सिकुड़ जाती हैं। मांसपेशियां अत्यधिक सतर्क होकर सिकुड़ती हैं जिससे गर्दन और पीठ में अकड़न होती है।





































