पंजाब के फगवाड़ा में स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हिंसा के बाद पुलिस ने मामले को लेकर तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं। इन मामलों में प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम करने, विश्वविद्यालय के अंदर लूटपाट और तोड़फोड़ करने तथा पुलिस की गाड़ियों में आग लगाने जैसी घटनाओं से जुड़े आरोप शामिल हैं। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध किए जाने से राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा पैदा हुआ। यह मार्ग पाकिस्तान से सटे जम्मू-कश्मीर को देश के बाकी राज्यों से जोड़ता है, इसलिए इसके बाधित होने के मामले को गंभीरता से लिया गया है। पूरे घटनाक्रम पर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। मामले की जांच के लिए आठ सदस्यीय विशेष जांच दल भी गठित किया गया है, जिसकी अध्यक्षता फगवाड़ा के पुलिस अधीक्षक मेजर सिंह करेंगे।
लोक सेवकों पर हमले और बाधा के आरोप: सदर थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 106 में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराएं लगाई हैं। इसमें धारा 109 के तहत हत्या के प्रयास, धारा 132 के तहत लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग और धारा 221 के तहत लोक सेवक को सार्वजनिक कार्य करने में बाधा पहुंचाने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा धारा 326 और 324 के तहत भी कार्रवाई की गई है। इस प्राथमिकी में हिंसा के दौरान पुलिस और अन्य लोक सेवकों के सामने आई बाधाओं तथा गंभीर आपराधिक गतिविधियों को जांच के दायरे में रखा गया है। प्राथमिकी अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है, इसलिए पुलिस अब उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर उन लोगों की पहचान करने की कोशिश करेगी, जिन पर इन घटनाओं में शामिल होने का आरोप है।
राष्ट्रीय राजमार्ग रोकने पर अलग प्राथमिकी: फगवाड़ा के सदर थाने में ही दर्ज प्राथमिकी संख्या 105 में राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध करने से जुड़े आरोपों पर कार्रवाई की गई है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 285 के तहत सार्वजनिक रास्ते या नौवहन मार्ग में खतरा या बाधा उत्पन्न करने से संबंधित प्रावधान लगाया गया है। इसके साथ राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम की अन्य धाराएं भी शामिल की गई हैं। प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग को रोके जाने को इस प्राथमिकी का प्रमुख आधार बनाया गया है। यह मार्ग पाकिस्तान से सटे जम्मू-कश्मीर को देश के दूसरे राज्यों से जोड़ता है और इसी वजह से याचिका में राजमार्ग को अवरुद्ध करने की कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाला बताया गया है। पुलिस अब इस मामले में प्रदर्शन के दौरान राजमार्ग बाधित किए जाने की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच करेगी।
विश्वविद्यालय में लूट और संपत्ति नुकसान की जांच: सतनामपुरा थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 163 विश्वविद्यालय परिसर के भीतर हुई लूटपाट, तोड़फोड़ और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े आरोपों पर आधारित है। पुलिस ने इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 326 के तहत संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की नीयत से शरारत, धारा 324 के तहत संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और धारा 309 के तहत लूट का प्रावधान लगाया है। इसके अलावा सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान से बचाव से संबंधित कानून की अन्य धाराएं भी जोड़ी गई हैं। इस मामले में भी प्राथमिकी अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज हुई है। पुलिस के सामने अब विश्वविद्यालय परिसर में हुई घटनाओं की परिस्थितियों को स्पष्ट करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा लूटपाट में शामिल लोगों की पहचान करने की चुनौती है। मामले की जांच विशेष जांच दल के स्तर पर भी आगे बढ़ाई जाएगी।
आठ सदस्यीय विशेष जांच दल के हाथ में जांच: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी हिंसा मामले को गंभीरता से लेते हुए आठ सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया गया है। फगवाड़ा के पुलिस अधीक्षक मेजर सिंह इस दल की अध्यक्षता करेंगे। विशेष जांच दल के सामने तीनों प्राथमिकी में दर्ज अलग-अलग आरोपों की जांच करने की जिम्मेदारी होगी। इसमें लोक सेवकों को रोकने और उन पर हमला करने से जुड़े आरोप, राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित करने का मामला तथा विश्वविद्यालय के भीतर लूटपाट और सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े आरोप शामिल हैं। चूंकि तीनों प्राथमिकी अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई हैं, इसलिए जांच दल को घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान भी करनी होगी। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ अलग-अलग घटनाओं में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।
8 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा के मामले में अब अदालत की कार्यवाही और पुलिस जांच दोनों महत्वपूर्ण हो गई हैं। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से पूरे मामले पर रिपोर्ट तलब की है। याचिका में राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध करने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाया गया है, जबकि पुलिस की प्राथमिकी में हिंसा, लोक सेवकों के काम में बाधा, राजमार्ग अवरुद्ध करने, विश्वविद्यालय परिसर में लूटपाट और तोड़फोड़ तथा संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप दर्ज हैं। पुलिस ने तीनों मामले अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज किए हैं और जांच के लिए विशेष दल बनाया है। इस मामले में अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी, जहां राज्य सरकार की रिपोर्ट और जांच से जुड़ी स्थिति पर आगे की कार्रवाई हो सकती है।














































