रात में सोते समय दिखाई देने वाले सपने अक्सर सुबह उठने के बाद भी मन में बने रहते हैं। कई बार कोई सपना इतना स्पष्ट होता है कि व्यक्ति उसके अर्थ को जानने के लिए उत्सुक हो जाता है। भारतीय परंपरा में स्वप्नों को समझने के लिए स्वप्न शास्त्र में अलग-अलग संकेतों और उनके संभावित फलों का वर्णन मिलता है। इसमें सपने में दिखाई देने वाली वस्तु, घटना, व्यक्ति या परिस्थिति के आधार पर अलग-अलग अर्थ बताए गए हैं। कहीं गाय, घोड़ा, दही, दीपक, फूल और देव प्रतिमा जैसे स्वप्नों को शुभ संकेतों से जोड़ा गया है, तो कहीं गिरने, भूकंप, चिता, कुछ विशेष पशुओं या अशुभ दृश्यों को कष्ट और अनिष्ट से संबंधित बताया गया है। इतना ही नहीं, स्वप्न किस तिथि को देखा गया, इसका भी उसके फल पर प्रभाव माना गया है। इसी वजह से स्वप्न शास्त्र में किसी सपने को समझने के लिए उसके पूरे संदर्भ को महत्वपूर्ण माना जाता है।
स्वप्नों की पहली पहचान और उनके अलग-अलग संकेत: स्वप्न शास्त्र में अलग-अलग दृश्य अलग-अलग फल से जुड़े बताए गए हैं। ऊंचे स्थान से अंधकारमय गर्त में गिरना रोगी के लिए मृत्यु और स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोग का संकेत माना गया है तथा गर्त में गिरने के बाद प्रयास करने पर भी बाहर न निकल पाने वाले स्वप्न को दस दिन के भीतर मृत्यु से जोड़ा गया है। गाय या बैलों से खिंचने वाली गाड़ी पर बैठे हुए दिखाई देना पृथ्वी के नीचे से लंबे समय से संचित धन मिलने का संकेत बताया गया है। एक ही स्थान पर कई दिनों तक पीतांबर धारण किए स्त्री को देखना उस स्थान पर धन मिलने से जोड़ा गया है, जबकि दाहिने हाथ में सांप को काटते देखना शीघ्र बड़ी धनराशि मिलने का संकेत माना गया है। स्वयं को गाते देखना कष्ट से जुड़ा बताया गया है, हालांकि मधुर गीत गाते हुए स्वयं या किसी दूसरे को देखना कुछ मतों में मुकदमे में विजय, व्यापार में लाभ, यश और अर्थ लाभ का संकेत माना गया है। दुहने वाले के साथ गाय देखना कीर्ति और पुण्य लाभ से संबंधित है तथा जल पीती गाय को देखने के बारे में संतान संबंधी शुभ संकेत बताए गए हैं। लड़खड़ाकर गिरना दुःख, चिंता और मृत्यु से जोड़ा गया है। कच्ची घास, धान, गेहूं या चने के पौधे देखने को गर्भधारण का संकेत बताया गया है, जबकि उन्हें काटना या खाना गर्भपात से जोड़ा गया है। घी देखने से मंदाग्नि, किसी दूसरे से घी लेना यश, घी पीना रोग और शरीर पर लगाना मानसिक चिंता तथा शारीरिक कष्ट का संकेत बताया गया है। घोड़ा देखने से अर्थ लाभ, घोड़े पर चढ़ने से कुटुंब वृद्धि और घोड़ी को प्रसव करते देखने से संतान लाभ की मान्यता है।
जल, जूते, दही, दांत और दीपक के स्वप्न: स्वप्न में दोनों आंखों के अचानक नष्ट होने का दृश्य मृत्यु का संकेत और आंख फूटना कुटुंब में किसी की मृत्यु से संबंधित बताया गया है। चादर के रंग को भी स्वप्न फल से जोड़ा गया है और एक विशेष रंग की चादर को संतान हानि का संकेत बताया गया है। स्वयं को चिता पर बैठे देखना बीमार व्यक्ति के लिए मृत्यु और स्वस्थ व्यक्ति के लिए बीमारी का संकेत माना गया है। निर्मल जल का दिखाई देना कल्याण, जल से अभिषेक भूमि प्राप्ति, जल में डूबकर अलग होना मृत्यु, तैरकर जल पार करना सुख और जल पीना कष्ट का संकेत बताया गया है। जूता दिखाई देना विदेश यात्रा, जूता प्राप्त कर उसका उपयोग करना ज्वर और जूते से मारपीट करना मृत्यु तुल्य कष्ट से संबंधित बताया गया है। तिल का तेल या उसकी खली मिलना मृत्यु तुल्य कष्ट, उसे पीना या खाना मृत्यु और उससे मालिश करना भी गंभीर कष्ट का संकेत माना गया है। दही देखने से प्रीति, दही खाने से यश, भात के साथ दही खाने से संतान लाभ तथा दूसरे को दही देने या उससे लेने से अर्थ लाभ बताया गया है। कमजोर होकर गिरते हुए दांत धन के नाश और शारीरिक कष्ट का संकेत माने गए हैं तथा नख, दांत और बालों का गिरना मृत्युसूचक बताया गया है। जलता हुआ दीपक अर्थ लाभ, अचानक बुझ जाना मृत्यु और ऊपर उठती लौ यश प्राप्ति का संकेत बताई गई है। इष्ट देव के दर्शन, पूजन और आह्वान को विपुल धन तथा परंपरागत रूप से मोक्ष प्राप्ति से जोड़ा गया है, जबकि देव प्रतिमा का कांपना, गिरना, हिलना, चलना, नाचना या गाते दिखाई देना आधि-व्याधि और मृत्यु का संकेत बताया गया है।
फूल, फल, नृत्य और अन्य दृश्यों के शुभ-अशुभ अर्थ: स्वप्न में नग्न होकर सिर पर लाल फूलों की माला धारण करना मृत्यु से संबंधित बताया गया है। स्वयं को नृत्य करते देखना रोग और दूसरे को नृत्य करते देखना अपमान का संकेत माना गया है तथा नृत्य का किसी भी रूप में दिखाई देना अशुभ बताया गया है। पकवान प्राप्त कर खाते हुए देखना रोगी की मृत्यु और स्वस्थ व्यक्ति के बीमार होने का संकेत बताया गया है, जबकि पूड़ी, कचौड़ी, मालपुआ और मिठाई खाने के स्वप्न को भी शीघ्र मृत्यु से जोड़ा गया है। फल दिखाई देना धन प्राप्ति, फल खाना रोग और संतान नाश तथा फल का अपहरण करना चोरी और मृत्यु जैसे अनिष्ट परिणामों का संकेत बताया गया है। सफेद फूल मिलना धन लाभ, लाल फूल रोग, पीले फूल यश और धन लाभ, हरे फूल इष्ट मित्रों से मिलना और काले फूल मृत्यु का संकेत बताए गए हैं। भूकंप देखने को रोगी की मृत्यु और स्वस्थ व्यक्ति के बीमार होने से जोड़ा गया है तथा कुछ मान्यताओं में इसे राजा की मृत्यु और राज्य या देश में बड़े उपद्रव का संकेत भी बताया गया है। शरीर पर मल-मूत्र लगना धन प्राप्ति, उसका सेवन सुख और स्पर्श सम्मान मिलने का संकेत माना गया है। जौ देखने से घर में पूजा और मांगलिक कार्य होने की मान्यता है। किसी की मृत्यु का सपना देखना शुभ बताया गया है और जिसके मरने का सपना देखा जाए, उसके दीर्घायु होने की बात कही गई है, हालांकि इसके साथ अन्य दुःखद घटनाएं सुनने को मिलने का भी उल्लेख है। युद्ध में विजय का स्वप्न शुभ, पराजय अशुभ और युद्ध से जुड़ी वस्तुएं देखना चिंता का संकेत बताया गया है। शरीर से रक्त निकलना धन-धान्य की प्राप्ति, रक्त से अभिषेक सुख, रक्त से स्नान अर्थ लाभ और रक्त पीना विद्या तथा अर्थ लाभ से संबंधित बताया गया है। लोहे का दिखाई देना अनिष्ट और लोहे की वस्तु प्राप्त करना आधि-व्याधि तथा मृत्यु से जोड़ा गया है। कांटेदार लता रोग, फल-फूल वाली सामान्य लता नृपदर्शन और लता से खेलना रोग का संकेत बताया गया है।
संतान, विवाह और मृत्यु से जुड़े विशेष स्वप्न: स्वप्न में उल्टी और दस्त होते देखना रोगी की मृत्यु से जुड़ा है, जबकि मल-मूत्र अथवा सोना-चांदी की उल्टी को निकट मृत्यु और रक्त की उल्टी को छह महीने की आयु शेष रहने का संकेत बताया गया है। दूध की उल्टी को पुत्र प्राप्ति से जोड़ा गया है। किसी दूसरे का विवाह या विवाहोत्सव में शामिल होना पीड़ा, दुःख या किसी आत्मीय की मृत्यु का संकेत माना गया है, जबकि अपना विवाह देखना मृत्यु या मृत्यु तुल्य पीड़ा से संबंधित बताया गया है। स्वयं वीणा बजाते देखना पुत्र प्राप्ति और दूसरे को वीणा बजाते देखना मृत्यु या मृत्यु तुल्य पीड़ा का संकेत बताया गया है। सींग और नख वाले पशुओं को मारने के लिए दौड़ना राज्य भय तथा उन्हें मारते देखना रोग का संकेत माना गया है। सफेद वस्त्र पहने, सफेद फूल या माला धारण किए और सुंदर आभूषणों से सजी स्त्री को देखना या उसका आलिंगन करना धन प्राप्ति और रोग मुक्ति से संबंधित बताया गया है। पीले वस्त्र या पीले फूलों वाली स्त्री को देखना कल्याण का संकेत है, जबकि मैले वस्त्रों वाली, खुले बालों वाली और अशोभनीय रूप में दिखाई देने वाली स्त्री के दर्शन या आलिंगन को शीघ्र मृत्यु से जोड़ा गया है। संतान से जुड़े स्वप्नों में वृषभ, कलश, माला, गंध, चंदन, सफेद फूल, आम, अमरूद, केला, संतरा, नींबू और नारियल जैसे संकेत बताए गए हैं। देवमूर्ति, हाथी, सिद्ध, गंधर्व, गुरु, सोना, रत्न, जौ, गेहूं, सरसों, कन्या, रक्तपान, अपनी मृत्यु, कल्पवृक्ष, तीर्थ, तोरण, आभूषण, राजमार्ग और मट्ठा देखने को भी शीघ्र संतान प्राप्ति से जोड़ा गया है, जबकि फल और फूल खाने के स्वप्न को संतान मृत्यु या गर्भपात का संकेत बताया गया है। मृत्यु से जुड़े स्वप्नों में तेल लगे नग्न होकर भैंस, गधे, ऊंट, काले बैल या काले घोड़े पर दक्षिण दिशा की ओर जाना, रसोई या सूतिका गृह में विशेष प्रकार के व्यक्ति का प्रवेश, झूलना, गाना, खेलना, कुछ फोड़ना, हंसना, नदी में नीचे चले जाना तथा सूर्य, चंद्रमा, ध्वजा और तारों का गिरना शामिल बताए गए हैं। भस्म, घी, लोहा, लाख, गीदड़, मुर्गा, बिल्ली, गोह, नेवला, बिच्छू, मक्खी और सांप तथा विवाह जैसे उत्सवों को भी मृत्यु सूचक स्वप्नों में रखा गया है। दाढ़ी, मूंछ और सिर के बाल मुंडवाने का स्वप्न भी इसी श्रेणी में बताया गया है।
तिथि के अनुसार स्वप्न का फल और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण: स्वप्न शास्त्र में सपने के फल के लिए तिथि को भी महत्वपूर्ण माना गया है। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा का सपना विलंब से फल देने वाला, द्वितीया का विपरीत फल देने वाला और तृतीया का भी विपरीत फल देने वाला लेकिन विलंब से परिणाम देने वाला बताया गया है। चतुर्थी और पंचमी के स्वप्न दो महीने से लेकर दो वर्ष के भीतर फल देने वाले माने गए हैं। षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी के स्वप्न शीघ्र फल देने वाले तथा सत्य होने वाले बताए गए हैं। एकादशी और द्वादशी के स्वप्नों का फल विलंब से मिलने की बात कही गई है, जबकि त्रयोदशी और चतुर्दशी के स्वप्नों को मिथ्या बताया गया है। पूर्णिमा का स्वप्न फल देने वाला माना गया है। कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा का स्वप्न फलहीन, द्वितीया का विलंब से फल देने वाला, तृतीया और चतुर्थी का मिथ्या, पंचमी और षष्ठी का दो महीने बाद से तीन वर्ष के भीतर फल देने वाला, सप्तमी का अवश्य फल देने वाला, अष्टमी और नवमी का विपरीत फल देने वाला तथा दशमी से त्रयोदशी तक के स्वप्न मिथ्या बताए गए हैं। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का स्वप्न सत्य और शीघ्र फल देने वाला, जबकि अमावस्या का स्वप्न मिथ्या माना गया है। वहीं स्वप्नों को लेकर एक अलग विचार यह भी बताता है कि वे मन की अतृप्त इच्छाओं, चिंताओं और गुप्त भावनाओं के प्रतीक हो सकते हैं। लंबे समय से मन में बनी कोई इच्छा स्वप्न में किसी प्रतीक के रूप में दिखाई दे सकती है और बाद में वही इच्छा व्यक्ति के कार्यों को प्रभावित कर सकती है। इसी दृष्टिकोण में माना गया है कि मन की स्वाभाविक धारा स्वप्न में चलती रहती है और अनेक गुप्त भाव तथा चिंताएं प्रतीकों के माध्यम से सामने आती हैं। इसी क्रम में स्वयं को अस्वस्थ देखना कुछ मतों में कुटुंब के साथ मेलमिलाप और बाद में शारीरिक कष्ट, तो कुछ मतों में सुख-शांति या निरोगी होने का संकेत माना गया है, जबकि दूसरे व्यक्ति को अस्वस्थ देखना कष्ट, विपत्ति या उसके रोग का संकेत बताया गया है। विचित्र आवाज सुनना अशुभ समाचार, आवाज से नींद खुलना कार्यों में बदलाव, किसी दूसरे की आवाज सुनना पुत्र या पत्नी के कष्ट और निकट कुटुंबी की आवाज सुनना आत्मीय की मृत्यु का संकेत बताया गया है। ऊपर कोई वस्तु लटकती और गिरने का भय दिखाई देना शत्रु द्वारा धोखे, ऊपर गिरना धन नाश और पास गिरना धन हानि के साथ परिवार को कष्ट से जोड़ा गया है। कटार देखना कष्ट, कटार चलाना धनहानि और उसके कुछ रूपों को निकट व्यक्ति के रोग का समाचार मिलने से जोड़ा गया है। कनेर का वृक्ष मान-प्रतिष्ठा, फूल-पत्ते गिरना निकट आत्मीय की मृत्यु और उसका फल खाना रोग तथा अशांति का संकेत बताया गया है, जबकि कनेर के नीचे बैठकर पुस्तक पढ़ने का स्वप्न दो वर्ष बाद साहित्यिक क्षेत्र में यश और नए प्रयोगों के आविष्कार से संबंधित बताया गया है।














































