अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी रहने के बीच ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के सामने बेहद कड़ा रुख रखा है। मंगलवार को उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रम पर कहा कि अगर ईरान किसी क्षेत्र में तेल नहीं बेच पाएगा तो वहां किसी अन्य देश को भी तेल बेचने नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को ईरान की सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि अगर उनके देश को सुरक्षित नहीं रखा गया तो क्षेत्र का कोई बुनियादी ढांचा भी सुरक्षित नहीं रहेगा। यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हाल में होर्मुज जलडमरूमध्य और उससे जहाजों के गुजरने के संबंध में दिए गए बयानों के बाद सामने आई है।
होर्मुज और तेल कारोबार पर सख्त रुख: गालिबाफ ने एक सार्वजनिक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अमेरिका और दूसरे देशों को ईरान की पहले से स्पष्ट की गई नीति को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि जिस क्षेत्र में ईरान तेल की बिक्री नहीं करेगा, वहां कोई दूसरा देश भी तेल नहीं बेच सकेगा। इसके साथ ही उन्होंने चेताया कि अगर ईरान की सुरक्षा की गारंटी नहीं होती है तो पूरे क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी सुनिश्चित नहीं की जा सकेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति के होर्मुज जलडमरूमध्य और वहां से जहाजों की आवाजाही से संबंधित हालिया बयानों का जवाब देते हुए गालिबाफ ने कहा कि इनमें नए तथ्य के बजाय पुराने दावों को दोहराया गया है और इनकी वास्तविकता से दुनिया परिचित है। इस बयान के जरिए उन्होंने होर्मुज, तेल कारोबार और ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा को एक साथ जोड़कर अपना रुख सामने रखा।
युवा पीढ़ी को दिलाया 1980 का स्मरण: अपने संबोधन के दौरान गालिबाफ ने ईरान की युवा पीढ़ी से भी सीधे संवाद किया और वर्तमान अमेरिकी नीतियों की चर्चा करते हुए वर्ष 1980 की परिस्थितियों को याद किया। उन्होंने कहा कि आज अमेरिका की ओर से नौसैनिक नाकाबंदी, हवाई रास्तों को बंद करने और ईरान के व्यापारिक मार्गों पर अधिकतम दबाव बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक ऐसी कोशिशों को उसी तरह गंभीर योजना, आर्थिक प्रबंधन और सैन्य जवाब के माध्यम से विफल किया जा सकता है, जिस तरह ईरान ने अतीत में कठिन परिस्थितियों का मुकाबला किया था। उन्होंने कहा कि ईरान के पास दबावपूर्ण परिस्थितियों से निपटने का अनुभव है और देश मौजूदा चुनौतियों के सामने भी अपने हितों की रक्षा करने और किसी दबाव का जवाब देने की क्षमता रखता है।
घेराबंदी से नहीं डरने की बात: गालिबाफ ने अमेरिका की कथित धमकियों और ईरान को घेरने की कोशिशों का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे इतिहास और मजबूत जड़ों वाले देश को ऐसी रणनीतियों के जरिए भयभीत नहीं किया जा सकता। उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वह ईरान की इस स्थिति को समझने में विफल रहता है तो उसे ईरानी जनता की ओर से लगातार कड़े जवाब मिलेंगे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और ईरान के प्रति उनके रुख का भी जिक्र किया। गालिबाफ के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति की हालिया टिप्पणियों से ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता कि ईरान को लेकर उनके व्यवहार में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि ईरान धमकियों और घेराबंदी के दबाव में अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा।
सैन्य कार्रवाई पर भी दिया संदेश: ईरानी संसद अध्यक्ष ने संभावित हमले या उकसावे को लेकर भी अमेरिका को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस के नेतृत्व को समझना चाहिए कि धमकियां, बयानबाजी, हवाई नाकाबंदी या व्यापारिक रास्तों पर दबाव ईरान को पीछे हटाने में सफल नहीं होगा। गालिबाफ के अनुसार इस्लामी गणराज्य ईरान किसी भी हमले या दुस्साहस का कड़ा, सटीक और तेज जवाब देगा और ऐसी कार्रवाई करने वाले पक्ष को उसके परिणाम पर पछताना पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान को डराकर उसकी नीतियों में बदलाव नहीं कराया जा सकता और देश किसी भी हमले या उकसावे का जवाब देने के लिए तैयार है। इस बयान के जरिए उन्होंने आर्थिक और व्यापारिक दबाव से लेकर संभावित सैन्य कार्रवाई तक सभी परिस्थितियों पर ईरान का रुख सामने रखा।
कड़े बयानों के बीच कूटनीतिक रास्ता खुला: अमेरिका के खिलाफ गालिबाफ की तीखी टिप्पणियों के समानांतर दोनों देशों के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत की प्रक्रिया भी जारी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची न्यूयॉर्क में अपने कार्यक्रम और कूटनीतिक वार्ताएं पूरी करने के बाद तेहरान के लिए रवाना हो चुके हैं। न्यूयॉर्क में उन्होंने कई कूटनीतिक बैठकों और चर्चाओं में हिस्सा लिया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच सीधे तौर पर नहीं बल्कि मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी है। सोमवार को एक अमेरिकी अधिकारी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक यदि अंतिम समझौते तक पहुंचा जाता है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने और उसके कुछ जमे हुए धन को जारी करने के लिए तैयार हो सकते हैं। इस तरह होर्मुज और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण माहौल के बावजूद परमाणु मुद्दे पर समझौते की संभावना तलाशने वाली कूटनीतिक प्रक्रिया भी जारी है।














































