24 अक्टूबर 2026, शनिवार को वैदिक ज्योतिष की दृष्टि से कई महत्वपूर्ण घटनाएं रहेंगी। इस दिन दोपहर 12 बजकर 42 मिनट पर बुध ग्रह तुला राशि में वक्री गति शुरू करेंगे। बुध की यह वक्री अवस्था 13 नवंबर 2026 की रात 9 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध बुद्धि, वाणी, तर्कशक्ति, शिक्षा, लेखन, व्यापार और संचार के कारक ग्रह हैं। इसलिए बुध के वक्री होने का प्रभाव इन क्षेत्रों से जुड़े कार्यों पर देखा जाता है। विशेष रूप से मिथुन और कन्या राशि के जातकों को इस अवधि में करियर, कारोबार, शिक्षा और निर्णय लेने के मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
इसके अलावा 24 अक्टूबर को व्याघात योग भी रहेगा। पंचांग में उपलब्ध समय के अनुसार यह योग 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार की रात लगभग 10 बजकर 9 मिनट पर शुरू हुआ और 24 अक्टूबर, शनिवार की रात 8 बजकर 1 मिनट 20 सेकंड तक रहेगा। इसके बाद हर्षण योग आरंभ होगा। पारंपरिक ज्योतिष में व्याघात योग को बाधा और व्यवधान से जोड़कर देखा जाता है। इस दौरान महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय धैर्य रखना और अनावश्यक विवादों से बचना उचित माना जाता है।
वहीं, शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में इस पूर्णिमा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होते हैं और चंद्रमा की किरणों को अमृत के समान माना जाता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्र मंत्रों का जाप, चंद्रमा को अर्घ्य, शिव पूजा और सफेद वस्तुओं का दान करने की परंपरा है। आइए जानते हैं व्याघात योग का महत्व, बुध के वक्री होने से सभी 12 राशियों पर पड़ने वाला प्रभाव और शरद पूर्णिमा पर चंद्र दोष से मुक्ति के लिए किए जाने वाले उपाय।
व्याघात योग कैसे बनता है और इसका क्या प्रभाव होता है?
वैदिक ज्योतिष में व्याघात योग 27 नित्य योगों में तेरहवें स्थान पर आता है। इसकी गणना सूर्य और चंद्रमा के निरयण देशांतर को जोड़कर की जाती है। प्राप्त योगफल को 13 अंश 20 कला के 27 बराबर भागों में विभाजित किया जाता है। सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त स्थिति जिस भाग में आती है, उसी के आधार पर नित्य योग निर्धारित होता है। सूर्य और चंद्रमा की स्थिति में परिवर्तन के साथ नित्य योग भी बदलता रहता है।
व्याघात योग की समय-सीमा: उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार व्याघात योग 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार की रात लगभग 10 बजकर 9 मिनट पर शुरू हुआ और 24 अक्टूबर 2026, शनिवार की रात 8 बजकर 1 मिनट 20 सेकंड तक रहेगा। इसके बाद हर्षण योग शुरू होगा।
पारंपरिक वैदिक ज्योतिष में व्याघात योग को सामान्य रूप से अशुभ योग माना जाता है। व्याघात शब्द का संबंध आघात, बाधा और व्यवधान से है। इस योग के दौरान विवाह, नए कारोबार की शुरुआत, महत्वपूर्ण समझौतों और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त देखने की सलाह दी जाती है। इस अवधि में जल्दबाजी में निर्णय लेने, बिना जांचे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने और छोटी बातों पर विवाद बढ़ाने से बचना चाहिए।
व्याघात योग किन राशियों के लिए शुभ और किनके लिए अशुभ है?
व्याघात योग की सामान्य अवधि के आधार पर किसी विशेष राशि को निश्चित रूप से शुभ या अशुभ घोषित करने वाला सर्वमान्य वर्गीकरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए केवल इस योग के आधार पर किसी राशि के लिए धन लाभ, नौकरी में सफलता या नुकसान की निश्चित भविष्यवाणी करना उचित नहीं होगा। किसी जातक पर प्रभाव का ज्योतिषीय आकलन करने के लिए उसकी जन्मकुंडली और उस दिन की ग्रह स्थिति को साथ में देखना पड़ता है।
व्याघात योग में सावधानी और उपाय: इस अवधि में महत्वपूर्ण कामों की योजना सोच-समझकर बनाएं, विवादों को बढ़ाने से बचें और निर्णय लेने से पहले जरूरी तथ्यों की जांच करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ और मंत्र ॐ वायवे नमः का जाप पारंपरिक उपायों में शामिल हैं।
24 अक्टूबर को बुध होंगे वक्री, 13 नवंबर तक रहेगा प्रभाव
बुध ग्रह 24 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 42 मिनट पर तुला राशि में वक्री गति शुरू करेंगे। बुध 13 नवंबर 2026 की रात 9 बजकर 23 मिनट तक वक्री अवस्था में रहेंगे। ज्योतिषीय भाषा में वक्री गति का अर्थ ग्रह का पृथ्वी से देखने पर पीछे की ओर चलता हुआ दिखाई देना है। यह ग्रह की वास्तविक कक्षा में दिशा बदलने के बजाय दिखाई देने वाली गति का प्रभाव है।
वैदिक ज्योतिष में बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, गणना, लेखन, संचार, व्यापार और शिक्षा का कारक माना जाता है। कुंडली में बुध की स्थिति के आधार पर जातक की संवाद शैली, निर्णय लेने की क्षमता और व्यावसायिक गतिविधियों का ज्योतिषीय आकलन किया जाता है। बुध का संबंध पारंपरिक रूप से गले और कंधों से भी जोड़ा जाता है।
इस अवधि में महत्वपूर्ण दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ना, आर्थिक लेन-देन का हिसाब जांचना, कामकाज की योजना व्यवस्थित रखना और बातचीत में शब्दों का चयन सोच-समझकर करना उपयोगी रहेगा। विशेष रूप से मिथुन और कन्या राशि के जातकों को करियर, कारोबार, शिक्षा और निर्णय लेने से जुड़े मामलों में सावधानी रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि बुध इन दोनों राशियों के स्वामी हैं।
बुध के वक्री होने से सभी 12 राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
मेष राशि
बुध का गोचर: मेष राशि वालों के सातवें भाव में बुध वक्री होंगे। ज्योतिष में सातवें भाव का संबंध जीवनसाथी, वैवाहिक जीवन और साझेदारी से माना जाता है। इस अवधि में जीवनसाथी के साथ विचारों का टकराव और छोटी बातों पर बहस की स्थिति बन सकती है। कारोबारी साझेदारी में भी बातचीत और शर्तों को लेकर मतभेद सामने आ सकते हैं। रिश्तों को संभालने के लिए धैर्य रखें और दूसरे व्यक्ति की बात ध्यान से सुनें।
उपाय: मिट्टी के बर्तन में पानी में भिगोए हुए हरे मूंग मंदिर में दान करें।
वृषभ राशि
बुध का गोचर: वृषभ राशि वालों के छठे भाव में बुध वक्री होंगे। इस भाव का संबंध शत्रुओं, प्रतिस्पर्धा, ऋण और स्वास्थ्य से माना जाता है। इस अवधि में मित्रों का सहयोग मिलेगा और विरोधियों से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने का अवसर मिलेगा। प्रिंटिंग, प्रेस, कागज और लेखन सामग्री से जुड़े लोगों को कामकाज में लाभ मिलने के योग बताए गए हैं। समुद्री यात्राओं से संबंधित कार्यों में भी अनुकूल परिणाम मिल सकते हैं। हालांकि, कामकाज की शर्तों और लेन-देन के दस्तावेजों की जांच अवश्य करें।
उपाय: कोई शुभ कार्य शुरू करने से पहले कन्या का आशीर्वाद लें और सामर्थ्य के अनुसार उन्हें उपहार दें।
मिथुन राशि
बुध का गोचर: मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं। इसलिए बुध का वक्री होना इस राशि के जातकों के लिए विशेष महत्व रखता है। बुध वक्री होने की अवधि में मानसिक दबाव, निर्णय लेने में उलझन और कामकाज में देरी जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में आज का काम कल पर टालने से बचें, क्योंकि इससे आपकी छवि प्रभावित हो सकती है। किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे ध्यान से पढ़ें। विद्यार्थियों की एकाग्रता भंग हो सकती है, इसलिए पढ़ाई का नियमित समय निर्धारित करें। कुछ जातकों को एलर्जी संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। शिक्षा और करियर से जुड़े फैसले जल्दबाजी में लेने के बजाय तथ्यों की जांच करें।
उपाय: भगवान गणेश की पूजा करें और गणेश मंत्रों का जाप करें। एकाग्रता बनाए रखने के लिए योग और ध्यान को दिनचर्या में शामिल करें।
कर्क राशि
बुध का गोचर: कर्क राशि वालों के चौथे भाव में बुध वक्री होंगे। चौथे भाव का संबंध माता, घर, जमीन, संपत्ति और वाहन से माना जाता है। इस अवधि में जमीन, मकान या वाहन से जुड़े कार्यों में अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। संपत्ति से संबंधित कागजातों की जांच और खरीद-बिक्री की शर्तों को ध्यान से पढ़ना जरूरी रहेगा। माता का सहयोग प्राप्त होगा और धैर्य के साथ किए गए प्रयासों से काम आगे बढ़ेंगे।
उपाय: माथे पर केसर का तिलक लगाएं और महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय जल्दबाजी से बचें।
सिंह राशि
बुध का गोचर: सिंह राशि वालों के तीसरे भाव में बुध वक्री होंगे। तीसरे भाव का संबंध पराक्रम, संवाद, भाई-बहनों और यश से माना जाता है। इस अवधि में भाई-बहनों के साथ संबंध बेहतर होंगे और उनके सहयोग से कई काम आगे बढ़ेंगे। अपनी बात प्रभावशाली ढंग से रखने का अवसर मिलेगा। आर्थिक स्थिति सामान्य रूप से अनुकूल बनी रह सकती है। हालांकि, बातचीत में कटु शब्दों से बचना और किसी भी वादे को पूरा करने की योजना पहले बना लेना जरूरी होगा।
उपाय: 13 नवंबर तक सुबह फिटकरी से दांत साफ करने का पारंपरिक उपाय करें।
कन्या राशि
बुध का गोचर: कन्या राशि के स्वामी भी बुध हैं, इसलिए बुध की वक्री चाल इस राशि के जातकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। कारोबारियों को निवेश सोच-समझकर करना चाहिए और बिना जांचे किसी योजना में धन नहीं लगाना चाहिए। नौकरी की तलाश कर रहे जातकों को लगातार प्रयास करना होगा। कार्यक्षेत्र में जरूरी कामों को टालने और आलस्य के कारण अवसर गंवाने से बचें। सामाजिक स्तर पर बातचीत करते समय शब्दों का चयन सावधानी से करें, क्योंकि गलत बयान से छवि प्रभावित हो सकती है। विद्यार्थियों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखना और गलत संगति से दूर रहना चाहिए। स्वास्थ्य के मामले में अपने खानपान पर ध्यान दें और ऐसे खाद्य पदार्थों से बचें जिन्हें पचाने में परेशानी होती है।
उपाय: माता दुर्गा की पूजा करें। महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णयों से पहले निवेश से जुड़े जोखिम और शर्तों की जांच करें।
तुला राशि
बुध का गोचर: तुला राशि वालों के लग्न अर्थात पहले भाव में बुध वक्री होंगे। इस भाव का संबंध व्यक्तित्व, शरीर और व्यवहार से माना जाता है। इस अवधि में सामाजिक प्रतिष्ठा और लोगों के साथ संबंधों पर आपके व्यवहार का प्रभाव पड़ेगा। अपने शब्दों और कामों के प्रति जिम्मेदारी बनाए रखें। खानपान में संयम रखें और स्वाद के लिए जरूरत से ज्यादा खाने से बचें। कामकाज में सहयोग देने से पहले परिस्थितियों को अच्छी तरह समझें।
उपाय: हरे रंग की वस्तुओं का मंदिर में दान करें।
वृश्चिक राशि
बुध का गोचर: वृश्चिक राशि वालों के बारहवें भाव में बुध वक्री होंगे। बारहवें भाव का संबंध खर्च, एकांत, विदेश और शय्या सुख से माना जाता है। इस दौरान खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। आमदनी का बड़ा हिस्सा अनियोजित खर्चों में जाने से बचाने के लिए बजट बनाएं। आजीविका से जुड़े कामों में उतार-चढ़ाव आने पर जल्दबाजी में निर्णय न लें। आराम और नींद के लिए भी नियमित समय निकालें।
उपाय: 13 नवंबर तक गले में पीले रंग का धागा पहनने का पारंपरिक उपाय करें।
धनु राशि
बुध का गोचर: धनु राशि वालों के ग्यारहवें भाव में बुध वक्री होंगे। इस भाव का संबंध आय, लाभ और इच्छाओं की पूर्ति से माना जाता है। इस अवधि में आमदनी बढ़ाने के अवसर सामने आ सकते हैं और अचानक धन लाभ मिलने की स्थिति बन सकती है। सुख-सुविधाओं से जुड़ी इच्छाओं को पूरा करने का अवसर मिलेगा। फिर भी आय बढ़ने के साथ खर्च भी न बढ़ाएं और आर्थिक फैसले सोच-समझकर लें।
उपाय: 13 नवंबर तक गले में तांबे का सिक्का धारण करने का पारंपरिक उपाय करें।
मकर राशि
बुध का गोचर: मकर राशि वालों के दसवें भाव में बुध वक्री होंगे। दसवें भाव का संबंध करियर, कर्मक्षेत्र, प्रतिष्ठा और पिता से माना जाता है। इस अवधि में कामकाज की गति धीमी पड़ सकती है और कार्यस्थल पर जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। पिता के करियर या कामकाज में भी देरी की स्थिति बन सकती है। इसलिए अपनी और पिता की सेहत का ध्यान रखें। नौकरी या व्यवसाय से जुड़े फैसले लेते समय दस्तावेजों और शर्तों की जांच करें।
उपाय: मां दुर्गा की उपासना करें और कामकाज में अनुशासन बनाए रखें।
कुम्भ राशि
बुध का गोचर: कुम्भ राशि वालों के नौवें भाव में बुध वक्री होंगे। नौवें भाव का संबंध भाग्य, धर्म, गुरु और लंबी यात्राओं से माना जाता है। इस अवधि में मेहनत का फल प्राप्त करने और रुके काम आगे बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति सामान्य रूप से ठीक बनी रह सकती है। पढ़ाई, यात्रा और महत्वपूर्ण योजनाओं से जुड़े निर्णय लेते समय आवश्यक जानकारी की पुष्टि करें।
उपाय: 13 नवंबर तक हरे रंग की वस्तुओं का उपयोग करने से बचने का पारंपरिक उपाय करें।
मीन राशि
बुध का गोचर: मीन राशि वालों के आठवें भाव में बुध वक्री होंगे। आठवें भाव का संबंध आयु, अचानक होने वाली घटनाओं, शोध और गुप्त विषयों से माना जाता है। इस अवधि में नए विषयों पर विचार करने और किसी जटिल समस्या को समझने का अवसर मिलेगा। कामकाज में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ें। आर्थिक लेन-देन और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच करने में लापरवाही न करें।
उपाय: बुधवार को मिट्टी के बर्तन में थोड़ा शहद रखकर घर से दूर किसी सुनसान स्थान पर दबाने का पारंपरिक उपाय करें।
शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026: चंद्र दोष क्या है?
हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होते हैं और चंद्रमा की किरणों को अमृत के समान माना जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा, मंत्र जाप और दान करने की परंपरा है। शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026 को है।
वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, मानसिक शांति और माता का कारक माना जाता है। जन्मकुंडली में चंद्रमा के अशुभ प्रभावों को पारंपरिक रूप से चंद्र दोष कहा जाता है। मान्यता है कि चंद्रमा के साथ शनि, राहु या केतु जैसे ग्रहों की युति अथवा उनकी दृष्टि चंद्रमा पर होने से चंद्र दोष बन सकता है। वृश्चिक राशि में चंद्रमा की नीच स्थिति को भी पारंपरिक ज्योतिष में प्रतिकूल माना जाता है।
इसके अलावा, यदि जन्मकुंडली में चंद्रमा के दूसरे और बारहवें भाव में कोई ग्रह न हो तथा चंद्रमा पर किसी ग्रह की दृष्टि भी न हो, तो ऐसी स्थिति को केमद्रुम योग से जोड़ा जाता है। हालांकि, किसी योग का अंतिम फल निर्धारित करने के लिए पूरी जन्मकुंडली का आकलन आवश्यक माना जाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चंद्र दोष का संबंध मानसिक अस्थिरता, निर्णय लेने में कठिनाई, माता के साथ संबंधों में तनाव और आर्थिक परेशानियों से जोड़ा जाता है। इन प्रभावों को धार्मिक मान्यता के रूप में समझना चाहिए; इन्हें किसी स्वास्थ्य समस्या या जीवन की कठिनाई का प्रमाणित कारण नहीं माना जा सकता।
शरद पूर्णिमा पर चंद्र दोष से मुक्ति के लिए करें ये पांच उपाय
1. चंद्र मंत्रों का जाप करें
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में बैठकर चंद्र मंत्र ॐ सोम सोमाय नमः या ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः का जाप करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मंत्र जाप से मानसिक शांति और सकारात्मकता प्राप्त होती है।
2. घर में चंद्र यंत्र स्थापित करें
शरद पूर्णिमा के दिन चंद्र यंत्र स्थापित करना पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र यंत्र की पूजा से चंद्रमा से संबंधित प्रतिकूल प्रभावों को शांत करने की कामना की जाती है। यंत्र की स्थापना करते समय स्वच्छता और पूजा-विधि का ध्यान रखें।
3. सफेद वस्तुओं का दान करें
शरद पूर्णिमा के अवसर पर चंद्रमा से संबंधित मानी जाने वाली वस्तुओं का दान किया जाता है। इनमें चावल, दूध, चीनी और सफेद वस्त्र शामिल हैं। सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को इन वस्तुओं का दान करना पारंपरिक उपाय है।
4. चंद्रमा को अर्घ्य दें
शरद पूर्णिमा की रात एक लोटे में जल लेकर उसमें थोड़ा दूध और अक्षत मिलाएं। इसके बाद चंद्रमा की ओर मुख करके श्रद्धापूर्वक अर्घ्य दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह उपाय चंद्रमा की कृपा प्राप्त करने और मानसिक शांति की कामना के लिए किया जाता है।
5. भगवान शिव की पूजा करें
धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान हैं। इसलिए शरद पूर्णिमा की रात भगवान शिव की पूजा करना और शिव मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। इस अवसर पर ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं।
निष्कर्ष
24 अक्टूबर 2026 को बुध के वक्री होने और व्याघात योग की अवधि को वैदिक ज्योतिष में महत्वपूर्ण माना गया है। बुध की वक्री अवस्था 13 नवंबर की रात 9 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। इस दौरान विशेष रूप से मिथुन और कन्या राशि के जातकों को शिक्षा, करियर, कारोबार, निवेश और संवाद से जुड़े मामलों में सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। वहीं, व्याघात योग की अवधि में महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय धैर्य और विवेक बनाए रखना चाहिए। 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा पर चंद्र मंत्रों का जाप, चंद्रमा को अर्घ्य, सफेद वस्तुओं का दान और भगवान शिव की पूजा पारंपरिक धार्मिक उपाय हैं।















































