शिव योग क्यों बन रहा है और कब तक रहेगा: 5 अक्टूबर 2026 को दिन की शुरुआत शिव योग के प्रभाव में होगी। नित्य योग की गणना सूर्य और चंद्रमा की निरयन दीर्घांशों को जोड़कर की जाती है। सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त स्थिति जब शिव योग के निर्धारित अंश-क्षेत्र में आती है, तब शिव योग बनता है। 4 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:31 बजे से शुरू हुआ शिव योग 5 अक्टूबर की सुबह 9:51 बजे तक रहेगा। इसके बाद सूर्य-चंद्रमा की संयुक्त स्थिति अगले नित्य योग के क्षेत्र में प्रवेश करेगी और सिद्ध योग शुरू होगा।
शिव योग का प्रभाव: शिव योग को शांति, आत्मचिंतन, सुधार, समाधान और आध्यात्मिक कार्यों से जुड़ा माना जाता है। इस दौरान पुराने विवादों को शांत करने, बिगड़े काम को सुधारने, मानसिक तनाव कम करने और महत्वपूर्ण विषयों पर धैर्यपूर्वक विचार करने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।
शिव योग में शुभ प्रभाव: मेष: पुराने तनाव कम करने और रुके काम आगे बढ़ाने का अवसर। कर्क: पारिवारिक शांति और मानसिक संतुलन बेहतर हो सकता है। सिंह: पुरानी योजनाओं को व्यवस्थित करके लाभ मिल सकता है। कन्या: शिक्षा और योजनाबद्ध कार्यों में सफलता मिल सकती है। वृश्चिक: अटके काम में रास्ता मिल सकता है। मकर: जिम्मेदारियां पूरी करने और स्थिरता लाने का अवसर। मीन: मानसिक शांति और पारिवारिक सहयोग मिल सकता है।
शिव योग में सावधान राशियां: वृषभ: जिद से बचें। मिथुन: भ्रम में निर्णय न लें। तुला: संबंधों में छोटी बात को बड़ा न बनाएं। धनु: पुराने विवाद तनाव दे सकते हैं। कुंभ: काम के दबाव में अनावश्यक बहस से बचें।
शिव योग के उपाय: भगवान शिव को जल अर्पित करें, “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें, बेलपत्र चढ़ाएं और जरूरतमंद को भोजन कराएं। क्रोध और कटु वाणी से बचना विशेष उपाय माना जाता है।
सिद्ध योग क्यों बन रहा है और कब तक रहेगा: 5 अक्टूबर को सुबह 9:51 बजे शिव योग समाप्त होने के बाद सिद्ध योग शुरू होगा। सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त निरयन स्थिति सिद्ध नित्य योग के क्षेत्र में पहुंचने के कारण यह योग बनता है। सिद्ध योग 5 अक्टूबर सुबह 9:51 बजे से 6 अक्टूबर सुबह लगभग 7:20 बजे तक रहेगा।
सिद्ध योग का प्रभाव: सिद्ध योग को कार्यसिद्धि, सफलता, योजनाओं को आगे बढ़ाने और मेहनत को परिणाम में बदलने वाला माना जाता है।
सिद्ध योग में शुभ प्रभाव: मेष: काम में गति। वृषभ: आर्थिक और व्यावसायिक काम आगे बढ़ेंगे। मिथुन: संपर्कों से लाभ। सिंह: योजनाओं में उपलब्धि। कन्या: मेहनत और शिक्षा में सफलता। तुला: नौकरी-व्यवसाय के कार्य आगे बढ़ेंगे। धनु: प्रतिस्पर्धा में सफलता। मकर: जिम्मेदारियां पूरी होंगी। मीन: शिक्षा और रचनात्मक कार्यों में लाभ।
सिद्ध योग में सावधान राशियां: कर्क: भावनात्मक निर्णय से बचें। वृश्चिक: जल्द परिणाम पाने की कोशिश न करें। कुंभ: एक साथ बहुत सी योजनाएं न लें।
सिद्ध योग के उपाय: इष्टदेव का स्मरण करें, माता-पिता और गुरुजनों का आशीर्वाद लें, विद्यार्थी को पुस्तक या शिक्षा सामग्री दान करें और अधूरे काम पूरे करने पर ध्यान दें।
सर्वार्थ सिद्धि योग क्यों बन रहा है और कब तक रहेगा: 5 अक्टूबर को सोमवार और पुष्य नक्षत्र का संयोग होने से सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। लखनऊ के स्थानीय पंचांग के अनुसार यह योग सुबह 6:01 बजे से रात 11:09 बजे तक रहेगा, क्योंकि रात 11:09 बजे पुष्य नक्षत्र समाप्त होकर आश्लेषा शुरू होगा।
सर्वार्थ सिद्धि योग का प्रभाव: इसे इच्छित कार्यों में सफलता और योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए शुभ माना जाता है। फिर भी किसी बड़े कार्य का निर्णय केवल इसी योग के आधार पर नहीं करना चाहिए।
सर्वार्थ सिद्धि योग में शुभ प्रभाव: मेष: काम और आर्थिक प्रयासों में गति। वृषभ: धन और व्यापार के रुके काम आगे बढ़ेंगे। मिथुन: संपर्कों से लाभ। कर्क: आत्मविश्वास और महत्वपूर्ण कार्यों में सफलता। कन्या: नौकरी में सहयोग। तुला: नए अवसर। वृश्चिक: भाग्य और शिक्षा में लाभ। धनु: प्रतियोगिता में सफलता। मकर: साझेदारी में प्रगति। मीन: शिक्षा, प्रेम और रचनात्मक कार्यों में लाभ।
सर्वार्थ सिद्धि योग में सावधान राशियां: सिंह: खर्च नियंत्रित रखें। कुंभ: महत्वपूर्ण निर्णय में जल्दबाजी न करें।
सर्वार्थ सिद्धि योग के उपाय: गणेशजी का स्मरण करके कार्य शुरू करें, जरूरतमंद को भोजन या उपयोगी वस्तु दें और महत्वपूर्ण काम से पहले इष्टदेव की पूजा करें।
सोम पुष्य योग क्यों बन रहा है और कब से कब तक रहेगा: 5 अक्टूबर 2026 को सोमवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। सोमवार का संबंध चंद्रमा से और पुष्य नक्षत्र का संबंध पोषण, स्थिरता और विकास से माना जाता है। सोमवार और पुष्य नक्षत्र के संयोग को सोम पुष्य योग कहा जाता है। लखनऊ की गणना के अनुसार पुष्य नक्षत्र 5 अक्टूबर की शुरुआत के आसपास से रात 11:09 बजे तक प्रभावी रहेगा, इसलिए इसी अवधि में सोम पुष्य योग माना जाएगा।
सोम पुष्य योग का महत्व: इस योग को धन-संचय, खरीदारी, बचत, शिक्षा, धार्मिक कार्य, आध्यात्मिक साधना और भविष्य के लिए स्थायी योजनाओं के लिए शुभ माना जाता है। हालांकि 5 अक्टूबर को इसी अवधि में विडाल योग भी चल रहा है, इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण मांगलिक कार्य के लिए केवल सोम पुष्य योग देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए।
सोम पुष्य योग में शुभ प्रभाव: वृषभ: धन-संचय और आर्थिक योजना में लाभ। कर्क: परिवार और मानसिक स्थिति में मजबूती। कन्या: नौकरी-व्यवसाय की योजनाओं में लाभ। वृश्चिक: भाग्य और शिक्षा में सहयोग। मकर: साझेदारी और व्यापार में अवसर। मीन: शिक्षा, प्रेम और रचनात्मक कार्यों में शुभ परिणाम।
सोम पुष्य योग में सावधान राशियां: मेष: भावनात्मक होकर आर्थिक निर्णय न लें। मिथुन: निवेश की पूरी जांच करें। सिंह: अनावश्यक खर्च से बचें। तुला: साझेदारी में शर्तें ध्यान से देखें। धनु: अत्यधिक जोखिम न लें। कुंभ: पारिवारिक और आर्थिक विवाद से बचें।
सोम पुष्य योग के उपाय: भगवान शिव की पूजा करें, शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें। दूध, चावल, सफेद वस्त्र या भोजन का दान करें। माता-पिता और बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
विडाल योग क्यों बन रहा है और कब तक रहेगा: 5 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र के दौरान विडाल योग की अवधि भी बताई गई है। स्थानीय पंचांग के अनुसार यह अवधि सुबह 6:01 बजे से रात 11:09 बजे तक रहेगी। विडाल योग को सामान्यतः शुभ मांगलिक कार्यों के लिए प्रतिकूल माना जाता है। इसलिए सर्वार्थ सिद्धि और सोम पुष्य जैसे शुभ संयोगों के साथ इसे भी ध्यान में रखना जरूरी है।
विडाल योग का प्रभाव: काम में रुकावट, गलतफहमी, विवाद या अनिश्चितता की स्थिति बन सकती है। अत्यधिक शुभता की आवश्यकता वाले कार्यों में अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए।
विडाल योग में सावधान राशियां: मेष: विवाद से बचें। मिथुन: बिना पुष्टि की बात पर भरोसा न करें। सिंह: क्रोध से बचें। तुला: लेन-देन में सावधानी रखें। धनु: यात्रा और निर्णयों में जल्दबाजी न करें। कुंभ: आर्थिक और कानूनी मामलों में सावधानी रखें।
विडाल योग के उपाय: गणेशजी का स्मरण करें, “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें और जरूरतमंद को भोजन कराएं।
ज्वालामुखी योग क्यों बन रहा है और कब तक रहेगा: 5 अक्टूबर की रात 11:09 बजे पुष्य नक्षत्र समाप्त होकर आश्लेषा नक्षत्र शुरू होगा। इसके साथ ज्वालामुखी योग की अवधि शुरू होगी। लखनऊ के पंचांग के अनुसार यह योग 5 अक्टूबर रात 11:09 बजे से 6 अक्टूबर रात लगभग 2:07 बजे तक रहेगा।
ज्वालामुखी योग का प्रभाव: इसे तीव्र और सावधानी वाला समय माना जाता है। क्रोध, तनाव, विवाद और अचानक निर्णय से बचना बेहतर माना जाता है।
ज्वालामुखी योग में सावधान राशियां: मेष: गुस्से में निर्णय न लें। सिंह: पारिवारिक विवाद से बचें। वृश्चिक: भावनात्मक प्रतिक्रिया नियंत्रित रखें। धनु: जोखिमपूर्ण निर्णय न लें। कुंभ: अनावश्यक बहस से दूर रहें।
ज्वालामुखी योग के उपाय: भगवान शिव का स्मरण करें, “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें और शांत वातावरण बनाए रखें।
गण्डमूल की स्थिति और प्रभाव: 5 अक्टूबर को रात 11:09 बजे आश्लेषा नक्षत्र शुरू होते ही गण्डमूल की अवधि भी शुरू होगी। यह अवधि 6 अक्टूबर सुबह लगभग 6:01 बजे तक रहेगी। आश्लेषा गण्डमूल नक्षत्रों में शामिल है। इसलिए इस अवधि में जन्म लेने वाले बच्चे के लिए परंपरा के अनुसार नक्षत्र शांति का विचार किया जाता है।
गण्डमूल के उपाय: अनावश्यक भय न रखें। जन्मकुंडली की पूरी स्थिति देखकर ही प्रभाव तय किया जाना चाहिए। परंपरा के अनुसार नक्षत्र शांति, भगवान शिव की उपासना और महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जा सकता है।
गजकेसरी योग क्यों बन रहा है और कब तक रहेगा: 5 अक्टूबर को चंद्रमा और गुरु दोनों कर्क राशि में स्थित हैं। एक ही राशि में गुरु और चंद्रमा की स्थिति से गजकेसरी योग बनता है। गुरु कर्क में उच्च स्थिति में है और चंद्रमा भी अपनी राशि कर्क में है। चंद्रमा 6 अक्टूबर रात लगभग 10:17 बजे कर्क से सिंह राशि में जाएगा, इसलिए आज यह युति प्रभावी रहेगी।
गजकेसरी योग में शुभ प्रभाव: वृषभ: धन और कार्य में अवसर। कर्क: आत्मविश्वास, सम्मान और निर्णयों में मजबूती। कन्या: वरिष्ठों का सहयोग। वृश्चिक: भाग्य और शिक्षा में लाभ। मकर: साझेदारी और व्यवसाय में प्रगति। मीन: शिक्षा, प्रेम और रचनात्मक कार्यों में लाभ।
गजकेसरी योग में सावधान राशियां: मेष: घरेलू और आर्थिक मामलों में भावनात्मक निर्णय न लें। मिथुन: अवसर की पूरी जांच करें। सिंह: खर्च नियंत्रित रखें। तुला: संबंधों में संतुलन रखें। धनु: जल्दबाजी में जोखिम न लें। कुंभ: पारिवारिक और आर्थिक विवाद से बचें।
गजकेसरी योग के उपाय: गुरुवार को पीली वस्तु का दान करें, भगवान विष्णु की उपासना करें और “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” का जाप करें। सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
चंद्र-मंगल योग क्यों बन रहा है और कब तक रहेगा: 5 अक्टूबर को चंद्रमा और मंगल दोनों कर्क राशि में हैं। एक ही राशि में दोनों की युति से चंद्र-मंगल योग बनता है। यह योग धन, व्यापार और आर्थिक सक्रियता से जोड़ा जाता है। चंद्रमा 6 अक्टूबर रात लगभग 10:17 बजे कर्क से सिंह में जाएगा, इसलिए आज यह योग प्रभावी रहेगा।
चंद्र-मंगल योग में शुभ प्रभाव: मेष: आर्थिक प्रयासों में ऊर्जा। वृषभ: धन से जुड़े प्रयासों में लाभ। कर्क: आर्थिक सक्रियता बढ़ सकती है। वृश्चिक: साहस और रणनीति से सफलता। मकर: व्यापारिक गतिविधियों में लाभ। मीन: आर्थिक और रचनात्मक कार्यों में प्रगति।
चंद्र-मंगल योग में सावधान राशियां: मिथुन: आर्थिक फैसलों में जल्दबाजी न करें। सिंह: क्रोध और खर्च पर नियंत्रण रखें। कन्या: पारिवारिक विवाद से बचें। तुला: साझेदारी में भावनात्मक निर्णय न लें। धनु: जोखिमपूर्ण निवेश से सावधान रहें। कुंभ: घरेलू विवाद में तुरंत प्रतिक्रिया न दें।
चंद्र-मंगल योग के उपाय: सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और मंगलवार को हनुमानजी की पूजा करें। “ॐ नमः शिवाय” और “ॐ हनुमते नमः” का जाप करें।
गुरु-मंगल योग क्यों बन रहा है और कब तक रहेगा: गुरु और मंगल दोनों कर्क राशि में होने के कारण गुरु-मंगल युति बन रही है। गुरु कर्क में उच्च और मंगल कर्क में नीच स्थिति का माना जाता है। दोनों का संयोजन ज्ञान और कर्म, योजना और क्रियान्वयन के मेल से जुड़ा माना जाता है। गुरु 31 अक्टूबर 2026 को लगभग 10:57 AM पर सिंह राशि में प्रवेश करेगा, इसलिए वर्तमान गुरु-मंगल युति तब तक प्रभावी रहेगी।
गुरु-मंगल योग में शुभ प्रभाव: मेष: करियर और आर्थिक प्रयासों में गति। कर्क: निर्णय और कार्यक्षमता में मजबूती। सिंह: नेतृत्व और योजनाओं में लाभ। वृश्चिक: शिक्षा और भाग्य में सहयोग। धनु: अनुभव से सफलता। मीन: व्यवसाय और रचनात्मक कार्यों में लाभ।
गुरु-मंगल योग में सावधान राशियां: मिथुन: जल्दबाजी न करें। कन्या: क्रोध पर नियंत्रण रखें। तुला: साझेदारी में अपनी बात न थोपें। मकर: आर्थिक जोखिम से पहले जांच करें। कुंभ: परिवार और कार्यक्षेत्र में संतुलन रखें।
गुरु-मंगल योग के उपाय: गुरुवार को पीली वस्तु का दान करें। मंगलवार को हनुमानजी की पूजा करें। विद्यार्थी की शिक्षा में सहायता करें और निर्णय लेने से पहले पूरी योजना बनाएं।
5 अक्टूबर के सभी प्रमुख योगों का संयुक्त प्रभाव: 5 अक्टूबर को सुबह 9:51 बजे तक शिव योग, उसके बाद सिद्ध योग रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग और सोम पुष्य योग पुष्य नक्षत्र की अवधि में रात 11:09 बजे तक प्रभावी रहेंगे। इसी अवधि में विडाल योग भी है। रात 11:09 बजे पुष्य समाप्त होकर आश्लेषा शुरू होगी, जिसके साथ ज्वालामुखी योग और गण्डमूल की स्थिति बनेगी। वहीं कर्क राशि में चंद्रमा, गुरु और मंगल की स्थिति से गजकेसरी, चंद्र-मंगल और गुरु-मंगल के प्रभाव सक्रिय हैं।
5 अक्टूबर को सबसे शुभ प्रभाव वाली राशियां: कर्क: चंद्रमा अपनी राशि में और गुरु के साथ होने से मजबूत स्थिति। वृषभ: धन और कार्यक्षेत्र में अवसर। वृश्चिक: भाग्य और शिक्षा में लाभ। मकर: साझेदारी और व्यवसाय में प्रगति। मीन: शिक्षा, रचनात्मकता, प्रेम और निजी योजनाओं में सकारात्मक परिणाम।
5 अक्टूबर को अधिक सावधानी वाली राशियां: मेष: क्रोध और घरेलू तनाव से बचें। मिथुन: धन और निर्णयों में जल्दबाजी न करें। सिंह: खर्च और अहंकार नियंत्रित रखें। तुला: संबंधों और साझेदारी में स्पष्टता रखें। धनु: जोखिम और जल्दबाजी से बचें। कुंभ: आर्थिक, पारिवारिक और विवादित मामलों में अतिरिक्त सावधानी रखें।
आज के सभी प्रमुख योगों के सामान्य उपाय: सुबह भगवान शिव की पूजा करके “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें। गणेशजी का स्मरण करके दिन के कार्य शुरू करें। गुरु से संबंधित उपाय के रूप में पीली वस्तु का दान करें और गुरुजनों का सम्मान करें। मंगल प्रभाव के लिए हनुमानजी की पूजा करें। जरूरतमंद को भोजन कराएं और अपनी क्षमता के अनुसार दान करें। विवाद, कटु वाणी, जल्दबाजी और बिना जांचे आर्थिक निर्णय से बचें। रात 11:09 बजे के बाद आश्लेषा, ज्वालामुखी और गण्डमूल की स्थिति शुरू होने के कारण उस समय विशेष रूप से शांत वातावरण बनाए रखना बेहतर रहेगा।
















































