ग्रहों की चाल में आज बड़ा बदलाव: वैदिक ज्योतिष के अनुसार 28 सितंबर 2026, सोमवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है और पितृ पक्ष की द्वितीया श्राद्ध तिथि भी है। आज ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। चंद्रमा सुबह के समय मीन राशि से मेष राशि की ओर बढ़ रहे हैं और रेवती नक्षत्र के बाद अश्विनी नक्षत्र का प्रभाव शुरू हो रहा है। इसी के साथ आज ध्रुव योग के बाद व्याघात योग, सुबह के समय मातंग योग और उसके बाद राक्षस योग का प्रभाव बन रहा है। कर्क राशि में उच्च के गुरु, तुला राशि में बुध-शुक्र की युति और चंद्रमा के राशि परिवर्तन के कारण गजकेसरी योग तथा लक्ष्मी-नारायण योग जैसे महत्वपूर्ण ज्योतिषीय संयोग भी चर्चा में हैं। इन ग्रह स्थितियों का प्रभाव अलग-अलग राशियों पर उनके वर्तमान गोचर और ग्रहों की स्थिति के अनुसार अलग-अलग रूप में दिखाई दे सकता है।
आज के ग्रह गोचर और आगामी परिवर्तन: वैदिक ज्योतिष के अनुसार आज सूर्य कन्या राशि के हस्त नक्षत्र में स्थित हैं और 17 अक्टूबर 2026 को तुला राशि में प्रवेश करेंगे। चंद्रमा मेष राशि में स्थित हैं और रेवती के बाद अश्विनी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा; चंद्रमा 28 सितंबर को सुबह 10:39 बजे मेष से वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। मंगल कर्क राशि के पुष्य नक्षत्र में हैं और 20 अक्टूबर 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। बुध तुला राशि के चित्रा नक्षत्र में हैं और 30 सितंबर 2026 को वृश्चिक राशि में जाएंगे। गुरु कर्क राशि के अश्लेषा नक्षत्र में बताए गए हैं, जबकि दिए गए चार्ट के अनुसार उनके बड़े राशि परिवर्तन का उल्लेख 29 जून को सिंह राशि में हो जाने के रूप में किया गया है। शुक्र तुला राशि के स्वाती नक्षत्र में हैं और 2 अक्टूबर 2026 को वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। शनि वक्री अवस्था में मीन राशि के रेवती नक्षत्र में हैं और वर्ष 2027 में मेष राशि में प्रवेश करेंगे। राहु वक्री होकर कुंभ राशि के धनिष्ठा नक्षत्र में तथा केतु वक्री होकर सिंह राशि के मघा नक्षत्र में स्थित हैं और फिलहाल इन्हीं राशियों में बने रहेंगे।
ग्रह गोचर स्थिति चार्ट (28 सितंबर 2026)
| क्रम | ग्रह | वर्तमान राशि | वर्तमान नक्षत्र | आगामी राशि परिवर्तन |
|---|---|---|---|---|
| 1 | सूर्य | कन्या | हस्त | 17 अक्टूबर 2026 को तुला राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 2 | चंद्रमा | मेष (सुबह 10:16 तक रेवती नक्षत्र के प्रभाव के बाद अश्विनी में) | रेवती (सुबह 10:16 तक), फिर अश्विनी | चंद्रमा हर सवा दो दिन में राशि बदलता है। यह 28 सितंबर को सुबह 10:39 बजे मेष से वृषभ राशि में प्रवेश करेगा। |
| 3 | मंगल | कर्क | पुष्य | 20 अक्टूबर 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 4 | बुध | तुला | चित्रा | 30 सितंबर 2026 को वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 5 | गुरु (बृहस्पति) | कर्क | अश्लेषा | साल 2026 में गुरु का बड़ा परिवर्तन 29 जून को सिंह राशि में हो चुका है, अब इस राशि में लंबे समय तक रहेंगे। |
| 6 | शुक्र | तुला | स्वाती | 2 अक्टूबर 2026 को वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 7 | शनि (वक्री) | मीन | रेवती | शनि वर्तमान में उल्टी चाल में हैं और इसी राशि में रहेंगे। अगला राशि परिवर्तन वर्ष 2027 में मेष राशि में होगा। |
| 8 | राहु (वक्री) | कुंभ | धनिष्ठा | राहु हमेशा वक्री चलते हैं। वर्तमान में कुंभ राशि में ही बने रहेंगे। |
| 9 | केतु (वक्री) | सिंह | मघा | केतु हमेशा वक्री चलते हैं। वर्तमान में सिंह राशि में ही बने रहेंगे। |
चार्ट के अनुसार ग्रहों की स्थिति का प्रभाव: वैदिक ज्योतिष के अनुसार 28 सितंबर की ग्रह स्थिति में सूर्य कन्या राशि में, चंद्रमा मेष राशि में, मंगल और गुरु कर्क राशि में, बुध और शुक्र तुला राशि में, शनि मीन राशि में, राहु कुंभ राशि में तथा केतु सिंह राशि में स्थित हैं। इस ग्रह व्यवस्था में कर्क राशि में गुरु और चंद्रमा की स्थिति से गजकेसरी योग का प्रभाव बताया गया है, जबकि तुला राशि में बुध और शुक्र की युति लक्ष्मी-नारायण योग बना रही है। दिन के अलग-अलग समय पर नक्षत्र परिवर्तन के साथ मातंग और राक्षस योग का प्रभाव भी बदलता है। सुबह 08:53 बजे तक ध्रुव योग रहेगा और इसके बाद व्याघात योग शुरू होगा। वहीं चंद्रमा के राशि परिवर्तन के कारण दिन के दौरान मानसिक स्थिति, ऊर्जा और निर्णय क्षमता से जुड़े प्रभावों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
1. ध्रुव योग—सुबह 08:53 बजे तक स्थिर और शुभ कार्यों का समय: वैदिक ज्योतिष के अनुसार आज प्रातः 08:53 बजे तक ध्रुव योग प्रभावी रहेगा। इसे स्थिरता प्रदान करने वाला योग माना गया है। इस समय शुरू किए गए ऐसे कार्य जिनमें लंबे समय तक निरंतरता और स्थायित्व की आवश्यकता हो, उनके लिए यह समय अनुकूल माना जाता है। भवन निर्माण, व्यावसायिक योजना, दीर्घकालिक निवेश और स्थायी प्रकृति के कार्यों को इस अवधि में शुरू करने की सलाह दी गई है। दिन के शुरुआती हिस्से में यह योग योजनाबद्ध कार्यों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का अवसर देता है।
2. व्याघात योग—सुबह 08:53 बजे के बाद अशुभ प्रभाव: वैदिक ज्योतिष के अनुसार सुबह 08:53 बजे के बाद व्याघात योग शुरू होकर पूरी रात प्रभावी रहेगा। इसे बाधाओं और तनाव से जुड़ा योग माना गया है। इस अवधि में अचानक रुकावट, विवाद, मानसिक दबाव अथवा काम में व्यवधान जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। इसलिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय जल्दबाजी से बचने और किसी विवाद में अनावश्यक रूप से शामिल न होने की सलाह दी गई है। बड़े वित्तीय निर्णय और जोखिम वाले काम भी सोच-समझकर करने चाहिए।
3. मातंग योग—सुबह 10:16 बजे तक शुभ समय: वैदिक ज्योतिष के अनुसार 28 सितंबर को सुबह सूर्योदय से लेकर 10:16 बजे तक मातंग योग का प्रभाव बताया गया है। सोमवार और रेवती नक्षत्र के संयोग से बनने वाला यह योग कार्यों की सफलता के लिए शुभ माना गया है। आर्थिक गतिविधियों, व्यापारिक सौदों, नए कार्य की शुरुआत, दुकान या व्यवसाय शुरू करने, नए प्रोजेक्ट पर काम आरंभ करने, भवन निर्माण तथा गृह प्रवेश जैसे कार्यों के लिए इस अवधि को अनुकूल बताया गया है। किसी उच्च अधिकारी, महत्वपूर्ण ग्राहक या प्रभावशाली व्यक्ति से पहली मुलाकात के लिए भी यह समय सकारात्मक परिणाम देने वाला माना गया है।
मातंग योग के प्रमुख लाभ: वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस योग में आर्थिक लेन-देन और व्यापारिक गतिविधियों में लाभ की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। नया व्यवसाय, दुकान या परियोजना शुरू करने वाले लोगों के लिए यह समय उपयोगी माना गया है। भवन निर्माण या नए घर से जुड़े कार्यों की शुरुआत के लिए भी इसे शुभ बताया गया है। महत्वपूर्ण लोगों से होने वाली मुलाकातों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने के संकेत दिए गए हैं।
4. राक्षस योग—अश्विनी नक्षत्र के बाद बनने वाला प्रभाव: वैदिक ज्योतिष के अनुसार सुबह 10:16 बजे तक रेवती नक्षत्र का प्रभाव रहने के बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू होने से राक्षस योग का उल्लेख किया गया है। इस योग के प्रभाव को उग्रता, साहस, प्रतिस्पर्धा, निर्भीकता और नेतृत्व क्षमता से जोड़ा गया है। सकारात्मक स्थिति में यह व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस दे सकता है, जबकि अशुभ प्रभाव में क्रोध, जिद, अहंकार, मानसिक तनाव, विवाद और चोट-चपेट जैसी परिस्थितियां बढ़ सकती हैं। इसलिए इस अवधि में ऊर्जा को सही दिशा में लगाना और अनावश्यक वाद-विवाद से बचना महत्वपूर्ण रहेगा।
राक्षस योग—इन राशियों के लिए रहेगा शुभ: वैदिक ज्योतिष के अनुसार मेष राशि के जातकों में साहस और ऊर्जा बढ़ सकती है। व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में सफलता मिल सकती है और कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी या पद प्राप्त होने के संकेत हैं। सिंह राशि के लिए रुके हुए कामों को गति देने का समय है। निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हो सकती है और विवादित या कानूनी मामलों में सफलता के संकेत हैं। मिथुन राशि के लिए यह योग आर्थिक रूप से लाभदायक बताया गया है। राजनीति, वकालत या विपणन जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों को अपनी तार्किक क्षमता और प्रभावशाली संवाद का लाभ मिल सकता है। कुंभ राशि के पराक्रम में वृद्धि हो सकती है और बड़े कामों को पूरा करने के लिए साहसिक निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी। धनु राशि के लिए कार्यक्षेत्र में नेतृत्व के अवसर बढ़ सकते हैं और सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि हो सकती है, हालांकि वाणी के चयन में संयम रखना जरूरी रहेगा।
राक्षस योग—इन राशियों के लिए रहेगा अशुभ: वैदिक ज्योतिष के अनुसार वृषभ राशि के जातकों के खर्च बढ़ सकते हैं। अनजाना भय, बेचैनी और अनिद्रा जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। किसी को धन उधार देने से बचने की सलाह दी गई है। कन्या राशि के लिए चोट-चपेट और वाहन दुर्घटना से सावधानी बरतने की आवश्यकता है। गुप्त शत्रुओं से परेशानी हो सकती है और विवादों से पूरी तरह दूर रहना बेहतर रहेगा। मीन राशि में पारिवारिक कलह और भाई-बंधुओं से विवाद की आशंका बताई गई है। बीमारी या दवा पर संचित धन खर्च हो सकता है और नया निवेश टालने की सलाह दी गई है। तुला राशि के लिए आर्थिक स्थिति मजबूत रहने के बावजूद वैवाहिक जीवन में अहंकार के टकराव की स्थिति बन सकती है, इसलिए वाणी पर संयम आवश्यक रहेगा। मकर राशि को मेहनत का फल मिल सकता है, लेकिन कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ तीखी बहस होने की आशंका है। कर्क राशि में सुख-सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है, लेकिन माता के स्वास्थ्य या घरेलू वातावरण को लेकर अशांति रह सकती है। वृश्चिक राशि के विरोधी प्रभावी नहीं हो पाएंगे और संपत्ति से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है, लेकिन चिड़चिड़ापन बढ़ने की आशंका है।
राक्षस योग के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय: वैदिक ज्योतिष के अनुसार अशुभ प्रभाव वाली राशियों के लिए भगवान शिव की आराधना करना उपयोगी माना गया है। शिवलिंग पर दूध और काले तिल मिलाकर अभिषेक करने तथा रुद्राष्टकम या शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने का उपाय बताया गया है। क्रोध और उग्रता को नियंत्रित करने के लिए हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ तथा हनुमान जी को बूंदी का भोग अर्पित करने की सलाह दी गई है। केतु और मंगल से जुड़े मंत्रों में ॐ कें केतवे नमः तथा ॐ अं अंगारकाय नमः का 108 बार जाप करने का उपाय दिया गया है। बेसहारा कुत्तों को रोटी या बिस्कुट खिलाने, चींटियों को आटा और चीनी डालने तथा जरूरतमंदों को काला कंबल, तिल या सप्तधान्य दान करने की सलाह भी दी गई है। तामसिक भोजन और मदिरा से दूरी बनाए रखने का उपाय भी बताया गया है।
5. गजकेसरी योग—गुरु और चंद्रमा की स्थिति से धन और मान-सम्मान के संकेत: वैदिक ज्योतिष के अनुसार आज उच्च के गुरु और चंद्रमा की स्थिति से गजकेसरी योग का प्रभाव बताया गया है। यह योग कई राशियों के लिए धन लाभ, प्रतिष्ठा और उपलब्धियों के अवसर बढ़ाने वाला माना गया है। विशेष रूप से मेष, मिथुन, कर्क, तुला, सिंह और कुंभ राशि के लिए आज सकारात्मक परिणामों का उल्लेख किया गया है।
गजकेसरी योग—इन राशियों के लिए रहेगा शुभ: मेष राशि में चंद्रमा के प्रवेश से आत्मविश्वास और ऊर्जा बढ़ सकती है। अटका धन प्राप्त होने तथा करियर में नए अवसर मिलने के संकेत हैं। मिथुन राशि के लिए आय के नए स्रोत बन सकते हैं और कोई रुका सरकारी काम पूरा हो सकता है। कर्क राशि के लिए कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में सफलता तथा व्यावसायिक क्षेत्र में उपलब्धि के संकेत हैं, हालांकि मंगल के नीच प्रभाव के कारण क्रोध पर नियंत्रण रखना जरूरी रहेगा। सिंह राशि के युवाओं को करियर से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सफलता मिल सकती है, हालांकि संतान पक्ष को लेकर चिंता रह सकती है। कुंभ राशि के पराक्रम में वृद्धि होगी और नौकरी तथा व्यापार में प्रयासों की सराहना हो सकती है। तुला राशि के लिए दिन सुखद रह सकता है। जीवनसाथी का सहयोग, स्वास्थ्य में सुधार और व्यापार में लाभ के संकेत हैं।
गजकेसरी योग—इन राशियों के लिए रहेगा अशुभ: वैदिक ज्योतिष के अनुसार वृषभ राशि के जातकों को मानसिक चिंता और अकारण भय परेशान कर सकता है। धन से जुड़े बड़े निर्णय सोच-समझकर लेने चाहिए। कन्या राशि को स्वास्थ्य, वाहन और शारीरिक चोट से सावधान रहने की आवश्यकता है तथा विवादों से दूर रहना चाहिए। धनु राशि में मानसिक तनाव और प्रेम या पारिवारिक संबंधों में कहासुनी की स्थिति बन सकती है। मकर राशि पर घरेलू और कार्यस्थल की जिम्मेदारियों का दबाव बढ़ सकता है और वित्तीय लेन-देन में सावधानी आवश्यक है। मीन राशि को आय में रुकावट महसूस हो सकती है, हालांकि चंद्रमा के राशि परिवर्तन के बाद मानसिक घबराहट कम होने के संकेत हैं।
गजकेसरी योग के शुभ प्रभाव बढ़ाने के उपाय: वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुभता बनाए रखने के लिए भगवान शिव और गणेश जी की आराधना करें। सोमवार को शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करें और भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाएं। जरूरतमंदों को दान-पुण्य करना भी शुभ माना गया है। पितृ पक्ष होने के कारण पूर्वजों के नाम पर तर्पण और दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
6. बुध-शुक्र की युति से लक्ष्मी-नारायण योग—धन, व्यापार और संबंधों पर प्रभाव: वैदिक ज्योतिष के अनुसार तुला राशि में बुध और शुक्र की युति बनी हुई है। बुध को बुद्धि, व्यापार, वाणी और तर्क का कारक माना जाता है, जबकि शुक्र धन, ऐश्वर्य, कला, सौंदर्य और वैवाहिक सुख से संबंधित हैं। दोनों ग्रहों की यह युति लक्ष्मी-नारायण योग का निर्माण करती है। यह संयोग आर्थिक गतिविधियों, व्यापार, कला और सुख-सुविधाओं से जुड़े मामलों में सकारात्मक प्रभाव देने वाला माना गया है।
लक्ष्मी-नारायण योग—इन राशियों के लिए रहेगा शुभ: मेष राशि के लिए चंद्रमा के राशि परिवर्तन से आत्मविश्वास और ऊर्जा बढ़ेगी तथा धन लाभ के अवसर बन सकते हैं। मिथुन राशि के लिए आर्थिक स्थिति मजबूत होने, आय के नए स्रोत बनने और व्यापार में सफलता के संकेत हैं। कर्क राशि के लिए व्यावसायिक सफलता और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ने के योग हैं। तुला राशि में बुध-शुक्र की युति स्वयं राशि में होने से जीवनसाथी का सहयोग, रुका हुआ धन वापस मिलने और प्रेम संबंधों में मुलाकात के संकेत हैं। सिंह राशि के लिए करियर से जुड़ा सही निर्णय लेने में सफलता मिल सकती है, हालांकि संतान पक्ष को लेकर चिंता रह सकती है। कुंभ राशि के पराक्रम और कार्यक्षेत्र में वृद्धि होगी तथा नौकरी और व्यवसाय में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। वृश्चिक राशि के प्रयास सफल हो सकते हैं और रुके काम पूरे होने से धन आगमन का रास्ता खुल सकता है, हालांकि विरोधियों से सावधानी आवश्यक है।
लक्ष्मी-नारायण योग—इन राशियों के लिए रहेगा अशुभ: वृषभ राशि में मानसिक चिंता, भय और बेचैनी बढ़ सकती है तथा धन संबंधी लेन-देन में सावधानी जरूरी होगी। कन्या राशि के लिए परिस्थितियां प्रतिकूल रह सकती हैं और वाहन चलाते समय चोट-चपेट की आशंका है। सिंह राशि को भाग्य का साथ पाने के लिए अधिक प्रयास करना पड़ सकता है और प्रेम तथा संतान के मामलों में दूरी या अनबन हो सकती है। धनु राशि में मानसिक तनाव बढ़ सकता है और प्रेम या परिवार में कहासुनी हो सकती है। मकर राशि पर घरेलू और पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ सकता है। मीन राशि में आय में रुकावट या कमी महसूस हो सकती है, हालांकि चंद्रमा के राशि परिवर्तन के बाद मानसिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं।
लक्ष्मी-नारायण योग के उपाय: वैदिक ज्योतिष के अनुसार अशुभ प्रभाव वाली राशियों को धन और मानसिक स्थिरता के लिए भगवान शिव और गणेश जी की आराधना करनी चाहिए। सोमवार को शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करें। जरूरतमंदों को दान करें और पितृ पक्ष के कारण पूर्वजों के नाम पर तर्पण तथा दान-पुण्य करें। महत्वपूर्ण कार्यों के लिए राहुकाल का समय भी ध्यान में रखें।
7. चंद्रमा का राशि परिवर्तन और अश्विनी नक्षत्र—मानसिक स्थिति में बदलाव: वैदिक ज्योतिष के अनुसार 28 सितंबर को चंद्रमा सुबह के समय रेवती नक्षत्र के प्रभाव में रहने के बाद अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश करता है और मेष राशि में स्थित होता है। चंद्रमा का राशि परिवर्तन मानसिक स्थिति, भावनाओं, ऊर्जा और निर्णय लेने की प्रवृत्ति पर प्रभाव डाल सकता है। मेष राशि में चंद्रमा का प्रवेश कई जातकों में आत्मविश्वास और सक्रियता बढ़ाने वाला बताया गया है, जबकि कुछ राशियों के लिए यह बदलाव मानसिक बेचैनी या वाणी संबंधी सावधानी का संकेत दे सकता है।
चंद्रमा के राशि परिवर्तन का शुभ प्रभाव: मेष राशि के लिए आत्मविश्वास, ऊर्जा और धन लाभ के अवसर बढ़ सकते हैं। मिथुन राशि को आर्थिक उन्नति और रुके सरकारी काम पूरे होने का लाभ मिल सकता है। कर्क राशि को कोर्ट-कचहरी और व्यापार में सफलता मिल सकती है। तुला राशि को जीवनसाथी का सहयोग और व्यापारिक लाभ प्राप्त हो सकता है। कुंभ राशि के पराक्रम और रोजगार के क्षेत्र में वृद्धि के संकेत हैं। वृश्चिक राशि के रुके काम पूरे हो सकते हैं और धन आगमन सुगम हो सकता है।
चंद्रमा के राशि परिवर्तन से इन राशियों के लिए रहेगा अशुभ: वृषभ राशि को अकारण भय और बेचैनी परेशान कर सकती है। कन्या राशि को स्वास्थ्य और चोट-चपेट के मामलों में सावधानी रखनी होगी। सिंह राशि को प्रेम और संतान पक्ष से जुड़ी चिंता रह सकती है। धनु राशि में मानसिक तनाव तथा प्रेम या परिवार में कहासुनी हो सकती है। मकर राशि पर जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ सकता है। मीन राशि को सुबह के समय वाणी पर नियंत्रण रखना होगा और परिवार में विवाद से बचना होगा।
आज के विशेष उपाय—ग्रह दोष, व्याघात योग और पितृ पक्ष के लिए: वैदिक ज्योतिष के अनुसार आज सोमवार होने और पितृ पक्ष की द्वितीया तिथि होने के कारण शिव आराधना तथा पितरों के निमित्त दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करें और भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाएं। पितरों के नाम से तिल और जल अर्पित कर तर्पण करें तथा जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या दान दें। व्याघात योग के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए विवाद और जल्दबाजी से दूर रहें। दिए गए पंचांग के अनुसार आज सुबह 07:43 से 09:12 बजे तक राहुकाल रहेगा, इसलिए इस समय नया या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी गई है। शाम को घर के दक्षिण दिशा में पितरों के निमित्त दीपक जलाने का उपाय भी बताया गया है।दी गई है।










































