मार्कण्डेय पुराण हिंदू धर्म के अठारह प्रमुख पुराणों में से एक अत्यंत प्राचीन और महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। महर्षि मार्कण्डेय द्वारा क्रौष्ठि (क्रप्टुकि) को सुनाए जाने के कारण इस ग्रन्थ का नाम ‘मार्कण्डेय पुराण’ पड़ा। ऋग्वेद के समान ही इस पुराण में भी अग्नि, इन्द्र, सूर्य आदि प्रमुख देवताओं की विस्तृत विवेचना की गई है। साथ ही, इसमें गृहस्थाश्रम के नियमों, दिनचर्या और नित्यकर्मों का भी गहन वर्णन मिलता है।
पुराण की संरचना और आकार
मार्कण्डेय पुराण आकार की दृष्टि से एक छोटा पुराण है, लेकिन इसका विषय क्षेत्र अत्यंत व्यापक है।
- श्लोकों की संख्या: इसमें लगभग 9,000 श्लोकों का संग्रह है।
- अध्यायों की संख्या: यह सम्पूर्ण पुराण 137 अध्यायों में विभक्त है।
वक्ता और श्रोता का क्रम
इस पुराण की एक अनूठी विशेषता यह है कि इसमें ज्ञान का उपदेश अलग-अलग प्रसंगों में विभिन्न वक्ताओं द्वारा दिया गया है, जिनमें पक्षियों को भी प्रवचन का अधिकारी बनाया गया है:
- अध्याय 1 से 42: वक्ता— धर्म संज्ञक पक्षी, श्रोता— महर्षि जैमिनि।
- अध्याय 43 से 90: वक्ता— महर्षि मार्कण्डेय, श्रोता— क्रौष्ठि (क्रप्टुकि)।
- अंतिम अंश: वक्ता— सुमेधा, श्रोता— राजा सुरथ और समाधि नामक वैश्य।
दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) का विशेष महत्व
मार्कण्डेय पुराण की सर्वाधिक लोकप्रियता का मुख्य कारण इसमें निहित ‘देवी माहात्म्य’ (दुर्गा सप्तशती) है।
- यह अंश अध्याय 81 से 92 (कुल 13 अध्यायों) के भीतर वर्णित है।
- इसमें भगवती के तीन प्रमुख स्वरूपों— महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के दिव्य चरित्रों और महिमा का अत्यंत भव्य और विस्तृत वर्णन किया गया है। यह अंश शक्ति उपासना का सबसे बड़ा और प्रामाणिक आधार है।
प्रमुख कथाएं और वर्णित विषय
मार्कण्डेय पुराण में धर्म, दर्शन, सृष्टि और राजवंशों से जुड़ी अनेक सुंदर और प्रेरणादायक कथाओं का समावेश है:
1. प्रसिद्ध आख्यान और चरित्र:
- सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की पुण्यमयी कथा।
- अत्रि और माता अनसूया की कथा।
- भगवान दत्तात्रेय, मदालसा और अलर्क का चरित्र।
- द्रौपदी के पांचों पुत्रों की कथा और देवराज इन्द्र द्वारा पक्षियों को शाप मिलने का प्रसंग।
- आडी और बक पक्षियों का भयंकर युद्ध तथा पिता-पुत्र का आख्यान।
2. सृष्टि व ब्रह्मांड का वर्णन:
- नौ प्रकार की सृष्टि और यक्ष-सृष्टि का निरूपण।
- रुद्र आदि की उत्पत्ति और कल्पान्तकाल (प्रलय) का निर्देश।
- विभिन्न मनुओं (विशेषकर आठवें मन्वन्तर) की पापनाशक कथाएं और द्वीपचर्या का वर्णन।
- तीनों वेदों के तेज से ओंकार (प्रणव) की उत्पत्ति और सूर्य देव के जन्म व महात्म्य की कथा।
3. राजवंशों का इतिहास:
- वैवस्वत मनु के वंश, इक्ष्वाकु वंश, और सोमवंश (चन्द्रवंश) का वर्णन।
- राजा पुरुरवा, नहुष, ययाति और वत्सप्री की पवित्र कथाएं।
- श्रीरामचन्द्र जी की उत्तम कथा और कुश के वंश का वृतांत।
- यदुवंश का वर्णन, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला, मथुरा और द्वारका की लीलाएं शामिल हैं।
4. दार्शनिक और आध्यात्मिक विषय:
- सांख्य दर्शन (सांख्यमत) का विस्तृत वर्णन।
- प्रपञ्च (संसार) के मिथ्यावाद की व्याख्या।
- सभी अवतारों की कथा और अंत में पुराण श्रवण से मिलने वाले पुण्य फल का महत्व।





































