आज की इस आधुनिक डिजिटल दुनिया में हमारा ज्यादातर वक्त कंप्यूटर स्क्रीन के सामने लगातार बैठकर ही बीतता है। विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लगातार घंटों एक ही जगह बैठे रहना हमारी सेहत के लिए एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करता है। मेडिकल साइंस में इस गंभीर शारीरिक समस्या को अब “सिटिंग डिजीज” का नाम दिया जाने लगा है। इस खतरनाक समस्या का सबसे आसान, सटीक और असरदार समाधान यह है कि आप काम के दौरान हर 30 मिनट में 2 से 3 मिनट का एक छोटा सा वॉकिंग ब्रेक लेना शुरू करें। ऐसा करने से शरीर की निष्क्रियता टूटती है और अंगों को गति मिलती है।
मेटाबॉलिज्म को मिलता है बूस्ट: जब आप कार्यालय या घर में लंबे समय तक बिना हिले-डुले बैठे रहते हैं, तो आपके शरीर की प्राकृतिक कैलोरी बर्न करने की आंतरिक क्षमता काफी धीमी हो जाती है। इस निष्क्रिय स्थिति के कारण शरीर में अनचाहा फैट जमा करने वाले हानिकारक एंजाइम्स बहुत तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में हर 30 मिनट के अंतराल पर उठकर थोड़ा सा टहलने से आपका धीमा पड़ा मेटाबॉलिज्म फिर से पूरी तरह ‘स्टार्ट’ हो जाता है। यह छोटी सी शारीरिक गतिविधि आपके ब्लड शुगर को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने और अतिरिक्त कैलोरी को बर्न करने में बहुत मदद करती है, जिससे आपका वजन हमेशा कंट्रोल में रहता है।
ब्लड सर्कुलेशन में होता है सुधार: लगातार कई घंटों तक कुर्सी पर बैठे रहने से हमारे पैरों में खून का प्रवाह (फ्लो) बहुत धीमा हो जाता है, जिससे नसों से जुड़ी बीमारियां होने लगती हैं। इस स्थिति के कारण शरीर में ‘डीप वेन थ्रोम्बोसिस’ जैसी गंभीर बीमारी या नसों में भयंकर सूजन आने का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। लेकिन जब आप नियम बनाकर हर आधे घंटे में सीट से उठकर वॉक करते हैं, तो आपकी पिंडलियों की मांसपेशियां शरीर में एक पंप की तरह काम करने लगती हैं। इससे पूरे शरीर में ऑक्सीजन और खून का सर्कुलेशन बेहतर होता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और दिल की बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।
जोड़ों के दर्द से मिलती है राहत: कंप्यूटर के सामने लगातार गलत पोस्चर या मुद्रा में बैठकर काम करना भी आज के समय में कई तरह की गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम्स का एक मुख्य कारण बनता जा रहा है। घंटों एक ही स्थिति में बैठे रहने की वजह से हमारी गर्दन, कंधों और पीठ के निचले हिस्से की हड्डियों पर बहुत भारी और हानिकारक दबाव पड़ता है। ऐसे कष्टकारी समय में हर 30 मिनट पर लिया गया यह छोटा सा ब्रेक आपकी रीढ़ की हड्डी को सीधा और मजबूत बनाने का बेहतरीन काम करता है। काम के बीच थोड़ा सा टहलने से रीढ़ की मांसपेशियों की जकड़न पूरी तरह दूर होती है और शरीर के सभी जोड़ों में लचीलापन हमेशा बना रहता है।
ब्लड शुगर लेवल रहता है नियंत्रित: दोपहर या रात के भारी भोजन को करने के तुरंत बाद बैठकर काम करना या घंटों एक ही जगह पर जमे रहने से शरीर का ब्लड शुगर लेवल बहुत तेजी से बढ़ सकता है। आधुनिक स्वास्थ्य रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक जो लोग ऑफिस में काम के दौरान हर 30 मिनट में वॉक ब्रेक लेते हैं, उनके शरीर में इंसुलिन का कार्य और लेवल दूसरों से बहुत बेहतर रहता है। ऐसे सजग लोगों में आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज जैसी घातक और लाइलाज बीमारी होने का खतरा भी काफी हद तक कम पाया गया है। इसलिए अपनी दिनचर्या में इस छोटे बदलाव को शामिल करना शुगर के मरीजों के लिए बेहद जरूरी है।
मानसिक थकान से मिलती है मुक्ति: बिना रुके लगातार घंटों काम करते रहने से मस्तिष्क में भारी मानसिक थकान होने लगती है और व्यक्ति की कार्य करने की दैनिक प्रोडक्टिविटी भी घटने लगती है। आधे घंटे की अवधि के बाद अपनी सीट से उठकर थोड़ा टहलने से हमारे माइंड में एंडोर्फिन और डोपामाइन जैसे ‘फील-गुड’ न्यूरोट्रांसमीटर और हार्मोन प्राकृतिक रूप से रिलीज होते हैं। अपनी जगह से उठकर लिया गया यह बहुत ही छोटा सा ब्रेक आपके मानसिक तनाव को तुरंत कम करता है, मूड को एकदम फ्रेश करता है और काम पर फोकस बढ़ाता है। इस प्रकार शारीरिक सेहत के साथ-साथ यह आदत आपकी मानसिक कार्यक्षमता को भी काफी मजबूत और दुरुस्त बनाए रखती है।





































