सनातन धर्म में वैसे तो कई सारे पुराण, शास्त्र और ग्रंथ है लेकिन इन सभी में श्रीमद्भागवत गीता को सबसे अधिक पूजनीय माना जाता है ये इस धर्म का सबसे पवित्र ग्रंथ है गीता को जीवन का सार भी कहा जाता है मान्यता है कि जीवन को समझने और ज्ञान को प्राप्त करने के लिए गीता का पाठ बेहद महत्वपूर्ण होता है

अधिकतर लोगों को यह पता है कि श्रीमद्भागवत गीता का उपदेश भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध के समय कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को दिया था और इसी स्थान से श्रीमद्भागवत गीता की उत्पत्ति हुई थी लेकिन आपको बता दें कि श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को गीता का उपदेश देने से पहले इसे कई और दिया जा चुका है और अर्जुन से पहले बहुतों को इसका ज्ञान प्राप्त हो चुका है तो आज हम अपने इस लेख द्वारा आपको हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भागवत गीता से जुड़ी कुछ अहम जानकारी प्रदान कर रहे हैं तो आइए जानते हैं।

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को श्रीकृष्ण भगवान ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था इसलिए इसे गीता की उत्पत्ति का स्थान और तिथि माना जाता है लेकिन महाभारत युद्ध के समय भगवान श्रीकृष्ण स्वयं अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए कहते हैं कि यह उपदेश वह पहले भगवान सूर्यदेव को दे चुके है। इस बात को सुनकर अर्जुन श्रीकृष्ण से कहते हैं सूर्यदेव तो सबसे प्राचीन देव हैं आप पहले उन्हें उपदेश कैसे दे सकते हैं इसका जवाब देते हुए कृष्ण जी कहते हैं हे अर्जुन तुम्हारे और मेरे पहले भी बहुत से जन्म हो चुके है उन जन्मों के बारे में तुम नहीं जानते लेकिन मैं जनता हूं। कुरुक्षेत्र के मैदान में जब श्रीकृष्ण अर्जुन को गीता का उपदेश दे रहे थे तब संजय यानी धृतराष्ट के सारथी अपनी दिव्य दृष्टि से यह सब देख रहे थे और उन्होंने ने ही गीता का उपदेश धृतराष्ट्र को सुनाया था।

वही धार्मिक और पौराणिक कथाओं की बात करें तो महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना स्वयं मन ही मन की लेकिन वह इस बात को लेकर चिंति थे कि इसे अपने शिष्यों को कैस पढ़ाएं इस समस्या को हल करने के लिए वेदव्यास जी ब्रह्मा जी के पास गए तब ब्रह्मा जी ने उन्हें इस कार्य को करने के लिए श्री गणेश का नाम सुझाया। व्यास जी ने भगवान गणेश से महाभारत ग्रंथ लिखने को कहा। महर्षि बोलते गए और श्रीगणेश बिना रुके लिखते ग इस तरह से महर्षि वेदव्यास से श्री गणेश को गीता का ज्ञान प्राप्त हुआ था।



































