हिंदू धर्म में कई सारे व्रत त्योहार पड़ते हैं और सभी का अपना महत्व होता है वही पंचांग के अनुसार हर मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि भगवान कार्तिकेय को समर्पित है जिसे स्कंद षष्ठी के नाम से जाना जाता है इस दिन भक्त भगवान की विधिवत पूजा करते हैं और उपवास रखते हैं

मान्यता है कि स्कंद षष्ठी के दिन उपवास रखने से और भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है और भक्तों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है अभी पौष मास चल रहा है ऐसे में इस महीने पड़ने वाला स्कंद षष्ठी व्रत साल का आखिरी व्रत माना जा रहा है तो आज हम आपको इसकी तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।
जानिए स्कंद षष्ठी व्रत पूजा का मुहूर्त-
पौष मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का आरंभ- 27 दिसंबर को रात्रि 9 बजकर 22 मिनट पर
षष्ठी तिथि का समापन- 28 दिसंबर को संध्या 7 बजकर 14 मिनट पर
उदया तिथि के अनुसार पौष मास में स्कंद षष्ठी का व्रत 28 दिसंबर दिन बुधवार को रखा जाएगा।

पूजन विधि-
हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि स्कंद षष्ठी के दिन व्यक्ति को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके ध्यान करना चाहिए और भगवान कार्तिकेय का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प करना चाहिए इसके उपरांत विधिवत पूजा पाठ करें लेकिन कार्तिकेय की उपासना से पहले भगवान शिव और देवी मां पार्वती की पूजा जरूर करें इसके बाद देवी देवताओं को पुष्प, धूप, दीपक, सिंदूर, अक्षत, मौली आदि अर्पित करें और अंत में भगवान को भोग लगाएं। इसके बाद आरती करें साथ ही भगवान से भूल चूक के लिए क्षमा मांगे। पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद का वितरण सभी में करें।



































