राजस्थान में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। सभी राजनीतिक दलों ने सूबे में चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। बीते दिनों प्रधानमंत्री राजस्थान गए थे। वो दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के फेज-1 का उद्घाटन करने गए थे।
पीएम मोदी ने इस उद्घाटन के बहाने ही राजस्थान में चुनावी बिगुल फूंक दिया था। अपने भाषण में एक तरफ जहां राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर जमकर निशाना साधा तो वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी ने विधानसभा चुनाव में भाजपा की दावेदारी भी ठोंक डाली।
अपने भाषण में पीएम मोदी ने कई पहलुओं पर बात किया लेकिन उनका जोर राज्य के ओबीसी वोटरों को साधने में सबसे ज्यादा दिखा। पीएम मोदी के भाषण के बाद कांग्रेस नेता हरीश चौधरी ने भी ओबीसी वर्ग के लिए सीएम गहलोत से पैरवी की है। चुनाव से पहले कई नेता और दल ओबीसी वर्ग को साधने में जुट गए हैं।
पीएम मोदी ने अपने भाषण में ऐसा क्या कहा था खास?
राजस्थान के दौसा में पीएम मोदी ने ओबीसी वोटरों को साधने का पुरजोर प्रयास किया। उन्होंने कहा, ‘हमारी सरकार ने ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया है। यह फैसला इस वर्ग से आने वाले लोगों को सुरक्षा देने के लिए दिया गया है।’ पीएम मोदी ने कहा, ‘पहले मेडिकल कोटे में ओबीसी वर्ग के लोगों को आरक्षण नहीं मिलता था। पढ़ाई सिर्फ अंग्रेजी भाषा में होती थी। इस वजह से गरीब, दलित, पिछड़े बच्चे पीछे रह जाते थे। केंद्र सरकार ने स्थानीय भाषा में पढ़ाई कराने पर जोर दिया।’ पीएम मोदी ने अपने भाषण के माध्यम से राज्य के आधे से अधिक वोटरों को साधने का प्रयास किया। पीएम मोदी के भाषण के बाद एक कांग्रेस के नेता ने भी ओबीसी वर्ग के लिए सीएम गहलोत से पैरवी कर डाली।
कांग्रेसी MLA ने लिखा लेटर
कांग्रेस नेता हरीश चौधरी ने बीते दिन राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को एक पत्र लिखा है। पत्र में विधायक ने राज्य में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने की मांग की है। हरीश चौधरी ने सीएम गहलोत से अनुरोध किया है कि राज्य में ओबीसी आरक्षण की सीमा 21 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी की जाए। बता दें कि राजस्थान में ओबीसी वर्ग के लिए फिलहाल 21 फीसदी आरक्षण है। कांग्रेस नेता ने ओबीसी वोट बैंक को साधते हुए अपने लेटर में लिखा, ‘राज्य में ओबीसी जनसंख्या लगभग 50 फीसदी से भी ज्यादा है लेकिन आरक्षण महज 21 फीसदी है। उसमें भी कई विसंगतियों के चलते ये प्रतिशत और भी कम हो जाता है। राज्य सरकार की सेवाओं में ओबीसी वर्ग का आरक्षण 27 फीसदी किया जाना चाहिए।’ कांग्रेसी विधायक ने यह लेटर पीएम मोदी के भाषण के बाद लिखा है।
ओबीसी वोट बैंक क्यों है टारगेट नंबर वन?
इस साल राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं। सूबे में कुल ओबीसी वोटरों की संख्या लगभग 55% है। वहीं राजस्थान में 50 ऐसी सीटें हैं जहां से ओबीसी विधायक चुनकर आते हैं। राज्य की कुल 200 सीटों में कई ऐसी सीटें हैं जहां ओबीसी वोटरों का खासा प्रभाव हैं। ऐसे में ओबीसी वोटरों के साथ मिलने के बाद सत्ता के लिए संघर्ष आसान हो जाता है। पीएम मोदी दस दिनों के भीतर दो बार राजस्थान पहुंचे। अपने भाषण में वो ओबीसी वर्ग को साधते दिखे। उसके बाद कांग्रेस के नेता ने आरक्षण बढ़ाने की मांग कर डाली।
राज्य में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा था लेकिन बीते दिनों आम आदमी पार्टी ने यह ऐलान कर दिया कि वो सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। ऐसे में कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आम आदमी पार्टी की एंट्री से कांग्रेस के वोट कट सकते हैं। देखना दिलचस्प होगा कि ओबीसी वर्ग को साधने में किस पार्टी को सफलता मिलती है और राज्य की जनता किसे सीएम की कुर्सी सौंपती है।



































