भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक और स्वतंत्र राजनीतिक उपलब्धि असम विधानसभा चुनाव के ताजा और स्पष्ट परिणामों ने भारतीय राजनीति में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया है, जहां भारतीय जनता पार्टी ने अपने शानदार राजनीतिक कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन किया है। कुल 126 विधानसभा सीटों वाले असम राज्य में, सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 102 सीटों पर अपनी प्रचंड जीत दर्ज करते हुए दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है, लेकिन इस चुनाव की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इस विधानसभा चुनाव में उत्कृष्ट और आक्रामक प्रदर्शन करते हुए अकेले 82 सीटों पर जीत हासिल की है, जिसका सीधा अर्थ यह है कि पार्टी ने पहली बार असम राज्य में बिना किसी सहयोगी दल की मदद के, अपने ही दम पर स्पष्ट बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। एनडीए की यह जीत यह भी सुनिश्चित करती है कि गठबंधन राज्य में लगातार तीसरी बार अपनी मजबूत और स्थिर सरकार बनाने जा रहा है, जो कि पार्टी के रणनीतिकारों के लिए एक बहुत बड़ी सफलता का प्रतीक है।
गठबंधन के साथियों की जीत में महत्वपूर्ण और ठोस भूमिका यद्यपि भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में अपने दम पर बहुमत हासिल करने का ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया है, लेकिन गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों की भूमिका और उनके ठोस प्रदर्शन को भी किसी भी दृष्टिकोण से कम नहीं आंका जा सकता। बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने इस विधानसभा चुनाव में बेहद सीमित सीटों पर चुनाव लड़ते हुए अपनी अभूतपूर्व और अजेय राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया है। बीपीएफ ने राज्य में केवल 11 सीटों पर ही अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे, जिनमें से 10 सीटों पर उन्होंने शानदार और एकतरफा जीत दर्ज की है, जो उनके क्षेत्र में उनके गहरे प्रभाव को दर्शाता है। इसी प्रकार, असम गण परिषद (एजीपी) ने भी गठबंधन धर्म निभाते हुए 26 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और 10 सीटों पर अपनी जीत सुनिश्चित की। सहयोगी दलों के इस मजबूत और शानदार समर्थन के कारण ही एनडीए गठबंधन 126 में से 102 सीटों का वह विशाल पहाड़ जैसा आंकड़ा छूने में सफल रहा, जिसने विपक्ष को पूरी तरह से धराशायी कर दिया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई मुख्यमंत्री की विशेष और रोचक पोस्ट चुनाव में मिली इस ऐतिहासिक और प्रचंड जीत के तुरंत बाद, असम के वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की एक बहुत ही खास और रोचक सोशल मीडिया पोस्ट ने इंटरनेट की दुनिया में तूफान ला दिया है। चुनाव परिणामों के स्पष्ट होने के बाद मुख्यमंत्री शर्मा की एक पुरानी और हस्तलिखित ‘पर्ची’ सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर जमकर वायरल हो रही है, जो राजनीतिक विश्लेषण के उनके गहरे अनुभव को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि 9 अप्रैल को जब असम राज्य में पूरी तरह से मतदान की प्रक्रिया समाप्त हो गई थी, तब उन्होंने एक एकांत स्थान पर बैठकर एक कागज पर चुनाव के संभावित और वास्तविक नतीजों का अपना एक निष्पक्ष अनुमान लिखा था। मुख्यमंत्री की यह वही पर्ची है जो अब चुनाव परिणाम आने के बाद उनके समर्थकों और आम जनता के बीच भारी चर्चा और आश्चर्य का विषय बनी हुई है।
अनुमान से भी बेहतर रहे एनडीए के वास्तविक चुनाव परिणाम वायरल हो रही इस पर्ची के साथ-साथ मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने अपनी पोस्ट में जनता के प्रति अपना गहरा आभार और विनम्रता भी व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में विस्तार से लिखा है, ‘9 अप्रैल को जब असम में मतदान खत्म हुआ, तो मैंने हमेशा की तरह एक कागज पर चुनाव के संभावित नतीजों के बारे में अपने विचार लिखे थे। एक महीने बाद, हमें जनता का ऐतिहासिक समर्थन मिला और हमने अपने अब तक के सबसे अच्छे अनुमान से भी एक सीट ज्यादा जीती। मैं सच में बहुत विनम्र और आभारी महसूस कर रहा हूं।’ मुख्यमंत्री द्वारा साझा की गई उस बहुचर्चित पर्ची पर स्पष्ट रूप से तीन अलग-अलग आंकड़े लिखे हुए थे। उस नोट में उन्होंने अपने गठबंधन के ‘बेस्ट’ प्रदर्शन के लिए 101 सीटें, ‘बेटर’ प्रदर्शन के लिए 90 से अधिक सीटें और सबसे खराब यानी ‘वर्स्ट’ स्थिति के लिए 88 से अधिक सीटें मिलने का लिखित अनुमान जताया था। यह एक बहुत ही दिलचस्प और सुखद संयोग रहा कि वास्तविक चुनाव परिणाम उनके सबसे बेहतरीन ‘बेस्ट’ अनुमान के भी पार चले गए और एनडीए ने 102 सीटें जीत लीं, जिससे उनकी राजनीतिक दूरदर्शिता की पूरे देश में जमकर तारीफ हो रही है।
विपक्षी खेमे में निराशा और हार का बेहद निराशाजनक मंजर असम विधानसभा के इन ऐतिहासिक चुनावों में जहां सत्ता पक्ष को भारी और प्रचंड जनसमर्थन प्राप्त हुआ है, वहीं दूसरी ओर पूरे विपक्षी खेमे को जनता के भारी विरोध और अपनी सबसे शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है। इस चुनाव में विपक्ष का सूपड़ा पूरी तरह से साफ हो गया है और उन्हें एक बहुत बड़ा तथा गहरा राजनीतिक झटका लगा है। देश की सबसे पुरानी पार्टी, कांग्रेस, इस पूरे विधानसभा चुनाव में मात्र 19 सीटों पर ही सिमट कर रह गई, जो राज्य में उनके कमजोर होते जनाधार का सीधा और स्पष्ट प्रमाण है। इसके अलावा, राज्य के अन्य विपक्षी दलों की स्थिति भी कांग्रेस से बेहतर नहीं रही। बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाली एआईयूडीएफ और अखिल गोगोई की रायजोर दल जैसी क्षेत्रीय पार्टियों को राज्य भर में केवल 2-2 सीटों पर ही जीत नसीब हो सकी। वहीं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को असम की जनता ने केवल 1 सीट पर ही जीत का स्वाद चखने दिया, जिससे विपक्ष के गठबंधन और उनकी पूरी चुनावी रणनीति की घोर विफलता स्पष्ट रूप से उजागर हो गई है।
जोरहाट विधानसभा सीट पर कांग्रेस को मिली करारी और ऐतिहासिक शिकस्त विपक्ष के इस बेहद निराशाजनक प्रदर्शन में जो सबसे बड़ी, सबसे हाई-प्रोफाइल और सबसे ज्यादा चौंकाने वाली हार शामिल है, वह है कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई की शर्मनाक चुनावी शिकस्त। गौरव गोगोई ने इस विधानसभा चुनाव में जोरहाट सीट से ताल ठोंकी थी, जहां उनका सीधा और बेहद कड़ा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा विधायक हितेंद्रनाथ गोस्वामी से हो रहा था। चुनाव परिणामों ने सभी को चौंकाते हुए गौरव गोगोई को 23,181 वोटों के एक विशाल और स्पष्ट अंतर से करारी हार का स्वाद चखाया। यह हार कांग्रेस पार्टी के लिए कई मायनों में बहुत खास और चिंताजनक है क्योंकि गौरव गोगोई कोई सामान्य नेता नहीं हैं; वह अपने सफल राजनीतिक जीवन में 3 बार सांसद चुने जा चुके हैं। सबसे बड़ी हैरानी की बात तो यह है कि अभी हाल ही में हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में गौरव गोगोई ने इसी जोरहाट लोकसभा क्षेत्र से एक शानदार जीत दर्ज की थी, लेकिन महज कुछ ही समय बाद विधानसभा चुनाव में उसी क्षेत्र के मतदाताओं ने उन्हें इतनी बड़ी और करारी हार का सामना करने पर मजबूर कर दिया।



































