छह दशक के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय: तमिलनाडु के हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों ने राज्य के पूरे राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है और एक बहुत ही बड़ा उलटफेर किया है। राज्य की राजनीति में पिछले लगभग साठ वर्षों (छह दशकों) से केवल दो प्रमुख द्रविड़ दलों का ही बारी-बारी से दबदबा और शासन चलता आ रहा था। लेकिन इस बार, मशहूर फिल्म अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय द्वारा स्थापित नई पार्टी, TVK ने इस लंबे राजनीतिक एकाधिकार को ध्वस्त कर दिया है। अपने राजनीतिक जीवन का पहला चुनाव लड़ रही TVK ने उम्मीदों से कहीं बढ़कर, बेहद शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 108 सीटों पर विजय प्राप्त की है। इस भारी जीत के परिणामस्वरूप, TVK तमिलनाडु विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसने राज्य की भविष्य की राजनीति में अपनी मजबूत और स्थायी मौजूदगी का स्पष्ट संदेश दे दिया है।
बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में 10 सीटों की कमी: सबसे बड़ी पार्टी बनने के इस जश्न और खुशी के माहौल के बीच, TVK के सामने एक बहुत बड़ी तकनीकी और संख्यात्मक चुनौती भी खड़ी हो गई है। यह बड़ी जीत हासिल करने के बावजूद, पार्टी अपने दम पर अकेले राज्य में सरकार बनाने के लिए आवश्यक स्पष्ट बहुमत प्राप्त करने से थोड़ी सी चूक गई है। तमिलनाडु की 234 सदस्यों वाली विधानसभा में किसी भी दल को सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए कम से कम 118 सीटों का स्पष्ट बहुमत चाहिए होता है। चूँकि TVK ने 108 सीटों पर ही जीत हासिल की है, इसलिए वह अभी भी इस जादुई बहुमत के आंकड़े से 10 सीटें पीछे है। इसके साथ ही एक और पेचीदा स्थिति यह है कि पार्टी के प्रमुख विजय ने खुद दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों—पेरंबूर और तिरुचि ईस्ट—से चुनाव लड़ा था और दोनों ही सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है।
विधायकों की संख्या घटने से टीवीके के सामने नई चुनौती: बहुमत के आंकड़े की इस कमी के बीच, विधानसभा के नियम पार्टी की मुश्किलों को और बढ़ाने वाले हैं। संवैधानिक नियमों और प्रावधानों के अनुसार, विजय एक ही समय में दो सीटों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते हैं; उन्हें अनिवार्य रूप से अपनी जीती हुई दो सीटों में से एक सीट से इस्तीफा देना ही होगा। उनके एक सीट छोड़ने से विधानसभा में TVK विधायकों की कुल संख्या 108 से कम होकर 107 हो जाएगी। इसके अलावा, यदि पार्टी सरकार बनाने के लिए आगे बढ़ती है, तो उसे अपने विधायकों में से ही किसी एक वरिष्ठ सदस्य को विधानसभा का स्पीकर नियुक्त करना होगा। संसदीय नियमों के अनुसार, स्पीकर आमतौर पर सदन में होने वाली मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेता है। इस कारण से, किसी भी विश्वास प्रस्ताव के दौरान सदन में TVK की प्रभावी संख्या घटकर मात्र 106 रह जाएगी।
सरकार बनाने के विकल्पों पर टीवीके के शीर्ष नेतृत्व का मंथन: उपरोक्त सभी समीकरणों और विधानसभा के गणित को देखते हुए, यह बिल्कुल साफ हो गया है कि TVK को राज्य में अपनी सरकार बनाने और विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए अब केवल 10 नहीं, बल्कि कम से कम 12 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की दरकार होगी। सामान्य बहुमत के इस जादुई आंकड़े से थोड़ा कम रह जाने के कारण TVK नेतृत्व कोई भी मौका गंवाना नहीं चाहता है और सरकार बनाने के लिए मुख्य रूप से तीन अलग-अलग विकल्पों (सिनारियो) पर बहुत ही गहन मंथन कर रहा है। इन विकल्पों के तहत पार्टी अन्य राजनीतिक दलों, विशेषकर छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों के साथ गठबंधन बनाने या उनका समर्थन हासिल करने की संभावनाओं को तलाश रही है ताकि एक स्थिर और मजबूत सरकार का गठन किया जा सके।
गठबंधन की संभावनाएं: छोटे दल और एआईएडीएमके के साथ विकल्प: TVK नेतृत्व के सामने विचार के लिए मौजूद तीन प्रमुख विकल्पों में पहला विकल्प DMK गठबंधन में शामिल छोटे दलों को अपने साथ लेकर सरकार बनाना है। इस समीकरण में TVK (108), कांग्रेस (5), लेफ्ट (4), IUML (2) और VCK (2) मिलकर बहुमत साबित कर सकते हैं। दूसरा विकल्प यह है कि DMK और AIDMK दोनों ही गठबंधनों के छोटे दलों का एक मिला-जुला समर्थन हासिल किया जाए, जिसमें कांग्रेस, PMK, IUML और वामपंथी दल शामिल हो सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि TVK इन छोटे दलों को अपने पाले में लाने के लिए उन्हें नई सरकार के मंत्रिमंडल में जगह देने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है ताकि सरकार स्थिर रहे। तीसरा और सबसे सीधा विकल्प यह है कि TVK बाकी सभी दलों को छोड़कर सीधे AIADMK के 47 विधायकों का पूर्ण समर्थन प्राप्त करे और राज्य में एक बहुत ही मजबूत और स्थिर सरकार बनाए।
छोटे दलों की बढ़ती अहमियत और राज्यपाल का संभावित फैसला: इस खंडित जनादेश की स्थिति में राज्य के छोटे राजनीतिक दल और उनके गठबंधन अचानक से ‘किंगमेकर’ की अत्यंत शक्तिशाली भूमिका में आ गए हैं। डीएमके और एआईएडीएमके गठबंधनों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है, और उनमें शामिल कांग्रेस, वाम दलों, पीएमके और भाजपा ने कुछ ही सीटें जीती हैं। अगर TVK इनमें से कुछ दलों को भी अपने साथ लाने में सफल हो जाती है, तो वह आसानी से 118 के बहुमत के आंकड़े को पार कर सकती है। अब सबकी निगाहें तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर पर टिकी हैं, जो जल्द ही सरकार गठन की संवैधानिक प्रक्रिया की शुरुआत कर सकते हैं। वे सबसे बड़े दल के नेता विजय को सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए बुला सकते हैं। यदि TVK या अन्य कोई भी दल बहुमत साबित करने में असफल रहता है, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की जा सकती है, जिसके बाद छह महीने के भीतर दोबारा चुनाव कराने होंगे।



































