कभी बीजेपी तो कभी समाजवादी पार्टी के सहयोगी रहे सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर इन दिनों किसी गठबंधन में नहीं हैं। अगले लोकसभा चुनाव को लेकर जब उनसे सवाल किया गया तो साफ किया कि राजनीति में कुछ भी मुमकिन हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी अछूत नहीं है। राजभर एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में बोल रहे थे।
राजभर ने कहा कि राजनीति में सब तरह की संभावनाएं बरकरार हैं। जब महबूबा मुफ्ती और बीजेपी का कश्मीर में गठबंधन हो सकता है तो क्या नहीं हो सकता। साल 1989 में बीजेपी के समर्थन से मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने। फिर बाद में सपा और बसपा का गठबंधन भी हुआ। बिहार में नीतीश कुमार का उदाहरण ले लीजिए. वो कहते थे कि लालू प्रसाद यादव के साथ नहीं जाएंगे लेकिन वो उनके साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं। कहा कि बीजेपी से कोई अछूत नहीं है।
राजभर ने दावा किया कि आज कई यादव बीजेपी का झंडा लेकर चल रहे हैं। हजारों दलित जातियां बीजेपी के साथ हैं। ऐसे में किधर जातिवाद है? इनमें से कोई प्रमुखी बचाने के लिए तो कोई जेल जाने के डर से ऐसा कर रहा है।
फिर से मंत्री बनने के सवाल पर राजभर ने कहा कि उनके लिए विधायक और मिनिस्टर बनना जरूरी नहीं है। हमारा मकसद जो बाबासाहेब आम्बेडकर, सावित्रीबाई फुले और मान्यवर कांशीराम ने सिखाया है कि गुलामों को उनकी गुलामी का एहसास कराकर बेड़ियों से मुक्त कराना है। इसके लिए आप क्या किसी भी पार्टी के साथ चले जाएंगे के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांशीराम ने सिखाया था कि समाज का भला करने के लिए किसी के साथ भी जाया जा सकता है।
पांच साल पहले तक ओपी राजभर योगी सरकार में मंत्री थे। सीधे सीएम योगी से तकरार के बाद उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ गठबंधन किया। गठबंधन सत्ता से दूर रहा तो ओपी राजभर और अखिलेश के बीच भी दूरियां बढ़ गईं। इस बीच उनके बीजेपी के करीब आने की अटकलें कई बार लगीं। उन्होंने ने भी कभी इसका खंडन नहीं किया। इस बीच बुधवार को एक बार फिर उन्होंने इशारों इशारों में ही बीजेपी के साथ अगले चुनाव में उतरने की मंशा जाहिर कर दी है।
जातीय गणना पर अखिलेश यादव की मांग का समर्थन
एक तरफ ओपी राजभर ने बीजेपी के साथ जाने का इशारा किया तो दूसरी तरफ जातीय गणना को लेकर अखिलेश यादव की मांग का समर्थन भी किया। राजभर ने कहा कि हम इसके पक्षधर हैं। हम 20 साल से कह रहे हैं। कई जातियों को कोई नहीं जानता। गिनती होगी तो इन जातियों को भी हिस्सा देने की बात सरकार की समझ में आएगी। इससे इनको भी शिक्षा, रोजगार, राजनीति से जोड़ा जाएगा।
राजभर ने कहा कि हम तो जातिवाद खत्म करना चाहते हैं। जब तक केवल तहसीलदार जाति प्रमाण पत्र पर मुहर लगाकर देते रहेंगे तब तक जातिवाद रहेगा। जातीय जनगणना होगी तो सरकार इन्हें महत्व देगी। जब तक ओपी राजभर नहीं थे तब तक महाराजा सुहेलदेव राजभर को कौन जानता था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी सुहेलदेव की जयंती पर ट्वीट करके लोगों को बधाई दी।
स्वामी प्रसाद मौर्या के सामने बैठाना चाहिए था
स्वामी प्रसाद मौर्या पर ओपी राजभर ने कहा कि हमें आज उनके सामने बैठाना चाहिए था, तब मजा आता। वो संविधान को नहीं मानते हैं। संविधान की शपथ लेने के बाद भी जिस तरह की बातें करते हैं, साफ है कि बाबा साहेब को नहीं मान रहे हैं।
कहा कि जब वे मंत्री थे तब उन्हें चौपाई और दोहे याद नहीं आए. तब उन्हें दलित याद नहीं आए। जब हम सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू करने के लिए लड़ रहे थे तब हमसे उन्होंने कहा कि हम इस मुद्दे पर लड़ेंगे तो मंत्री पद चला जाएगा। ये लोग सत्ता के लोलुप हैं। कभी बसपा में कभी भाजपा में अब सपा में हैं।



































