पीलीभीत में एक सौतेले पिता द्वारा अपनी नाबालिग बेटी के साथ किया गया दुष्कृत्य केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के उस अंधेरे पक्ष को दर्शाता है जहाँ रक्षक ही भक्षक बन जाता है। 16 साल की मासूम, जिसे अपने घर में सबसे सुरक्षित महसूस करना चाहिए था, वह अपनों के ही बीच वर्षों तक प्रताड़ना झेलती रही।
जागरूकता और चुप्पी का टूटना इस मामले में दो पहलू अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
- चाइल्ड हेल्पलाइन की भूमिका: समय पर मिली सूचना और हेल्पलाइन टीम की त्वरित कार्रवाई ने इस अपराध को दबाने नहीं दिया।
- डर का माहौल: पीड़िता ने लोक-लाज और पिता की धमकी के डर से लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी। यह दर्शाता है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को ‘Good Touch’ और ‘Bad Touch’ तथा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने की कितनी आवश्यकता है।
कानूनी कार्यवाही की दरकार पुलिस ने आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया है, लेकिन समाज के लिए यह सोचने का विषय है कि घर की चारदीवारी के भीतर हो रहे ऐसे अपराधों को कैसे रोका जाए। अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करने के लिए ऐसे मामलों में POCSO Act के तहत त्वरित और कठोरतम सजा सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी रिश्तों की गरिमा को तार-तार करने की हिम्मत न कर सके।



































