कानपुर: कानपुर पुलिस ने एक ऐसे संगठित किडनी रैकेट का भंडाफोड़ किया है जिसके तार दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ तक फैले हुए हैं। MBA छात्र आयुष की गवाही ने इस गिरोह के सफेदपोश चेहरों को बेनकाब कर दिया है। पुलिस को शक है कि मेरठ के अल्फा अस्पताल के जरिए अब तक 100 से अधिक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।
कैसे काम करता था यह सिंडिकेट? आयुष द्वारा दिए गए ब्योरे के अनुसार, यह गैंग बेहद शातिराना तरीके से काम करता था:
- नेटवर्क: अली नाम के व्यक्ति ने आयुष को डॉ. अनुराग (उर्फ अमित) से मिलवाया, जिसके बाद डॉ. वैभव, डॉ. अफजल और डॉ. रोहित की टीम सक्रिय हुई।
- ऑपरेशन: कानपुर के आहूजा अस्पताल में दो गाड़ियों में सवार होकर 8 डॉक्टरों की टीम आई थी, जिन्होंने इस अवैध सर्जरी को अंजाम दिया।
- लुकआउट नोटिस: पुलिस ने फरार चार मुख्य डॉक्टरों— अफजल, वैभव, अनुराग और रोहित के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है।
पुलिस की कार्रवाई अब तक गिरोह के 6 सदस्यों को जेल भेजा जा चुका है। पुलिस ने आहूजा, प्रिया और मेड लाइफ अस्पतालों के DVR कब्जे में ले लिए हैं। इस मामले में साउथ अफ्रीका की एक महिला ‘अरेबिका’ के ट्रांसप्लांट की भी अलग से जांच की जा रही है। कानपुर पुलिस की टीमें लखनऊ से लेकर दिल्ली तक छापेमारी कर रही हैं और जल्द ही इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के बड़े खिलाड़ियों की गिरफ्तारी की संभावना है।



































