अमेरिका और ईरान के बीच हुआ सीजफायर समझौता शुरू होने के चंद घंटों के भीतर ही खतरे में पड़ गया है। इस संकट की जड़ में लेबनान, हिजबुल्लाह और राष्ट्रपति ट्रंप का वह ताजा बयान है जिसने तेहरान के सत्ता गलियारों में नाराजगी पैदा कर दी है।
ट्रंप का विवादास्पद बयान (Trump’s Controversial Statement on Hezbollah): राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि लेबनान और हिजबुल्लाह के बीच चल रही झड़पें इस सीजफायर समझौते का हिस्सा नहीं थीं। ट्रंप का मानना है कि हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष एक “अलग मामला” है। इस बयान ने ईरान को उकसा दिया है, क्योंकि ईरान का मानना था कि अमेरिका ने सभी मोर्चों पर, जिसमें लेबनान भी शामिल है, युद्ध रोकने का आश्वासन दिया था।
ईरान की चेतावनी और IRGC का रुख (Iran’s Warning and IRGC’s Stand): ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के करीबी माने जाने वाले तसनीम न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान अब सीजफायर से पीछे हटने पर विचार कर रहा है। ईरान का तर्क है कि इजरायल लेबनान पर भीषण हमले करके समझौते की भावना का उल्लंघन कर रहा है। यदि ये हमले नहीं रुके, तो ईरान न केवल समझौते से बाहर निकलेगा, बल्कि इजरायली हमलों के जवाब में नए लक्ष्यों (Targets) पर सैन्य कार्रवाई भी करेगा।
लेबनान में मानवीय संकट (Humanitarian Crisis in Lebanon): लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े डराने वाले हैं। बिना किसी चेतावनी के मध्य बेरूत पर हुए हमलों में कम से कम 112 लोगों की जान चली गई और 800 से अधिक घायल हो गए। पिछले एक महीने में यह आंकड़ा 1,500 मौतों को पार कर चुका है और 10 लाख से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। लेबनान की यह स्थिति ईरान के लिए एक भावनात्मक और रणनीतिक मुद्दा बन गई है, जिससे सीजफायर की उम्र बहुत कम नजर आ रही है।
निष्कर्ष: मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि अमेरिका और ईरान के बीच की शांति कितनी खोखली है। एक तरफ जहां जेडी वेंस के जरिए कूटनीतिक रास्ते खोजने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप के बयान और इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने समझौते को वेंटिलेटर पर ला दिया है। यदि अगले 48 घंटों में लेबनान में शांति नहीं हुई, तो पश्चिम एशिया फिर से एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की चपेट में आ सकता है।



































