नक्शे पर विवाद: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ट्रुथ सोशल पर एक ऐसी तस्वीर साझा की है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। इस तस्वीर में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के वास्तविक नाम को बदलकर ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ के रूप में प्रदर्शित किया गया था। इस पोस्ट को ‘IStandWithTrump47’ नाम के अकाउंट से लिया गया था, जिसे ट्रंप ने बिना किसी टिप्पणी के आगे बढ़ाया।
पहले का संदर्भ: ट्रंप ने पूर्व में मियामी के एक निवेश फोरम में भाषण देते हुए खुद ही इस जलमार्ग को ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ पुकारा था। हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी गलती सुधारते हुए इसे ‘होर्मुज’ कहा था और खेद प्रकट किया था। उस वक्त उन्होंने यह भी कहा था कि मीडिया उनकी इस बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करेगा, लेकिन उन्होंने जोर दिया था कि उनके द्वारा कही गई बातें अक्सर इत्तेफाक नहीं होतीं।
व्यापारिक मार्ग: भौगोलिक दृष्टि से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक ऐसा महत्वपूर्ण केंद्र है जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का दावा या नाम में बदलाव न केवल कूटनीतिक बल्कि आर्थिक स्थिरता के लिहाज से भी संवेदनशील माना जाता है। ट्रंप द्वारा इसे अपने नाम से जोड़ने की सोशल मीडिया गतिविधि को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
नाकेबंदी के संकेत: ट्रंप ने हाल ही में ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को लंबे समय तक जारी रखने की बात कही है। इस बयान के बाद से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें अनियंत्रित होकर चार साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट्स से बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा हो रहा है।
ईरानी नेतृत्व का रुख: ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने अमेरिका की इस नौसैनिक नाकेबंदी की रणनीति को सिरे से खारिज कर दिया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का कहना है कि ऐसी कोशिशें क्षेत्र में स्थिरता लाने में नाकाम रहेंगी क्योंकि ये अंतरराष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध हैं। ईरान का मानना है कि इस तरह के दबाव से उनकी नीतियों में कोई बदलाव नहीं आने वाला है।
सैन्य चेतावनी: ईरानी सुप्रीम लीडर के सैन्य सलाहकार मोहसिन रजाई ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि ईरान अब अमेरिकी नाकेबंदी को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने साफ किया कि यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो ईरान इसका उचित जवाब देने के लिए तैयार है। फिलहाल, दोनों देशों के बीच इस जलमार्ग को लेकर जुबानी और कूटनीतिक जंग तेज होती नजर आ रही है।



































