वार्ता के तीन मुख्य केंद्र बिंदु (Key Pillars) विशेषज्ञ डगलस सिलीमन के अनुसार, ट्रंप प्रशासन इस वार्ता में तीन प्रमुख लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिन्हें वे अपनी जीत के रूप में देख रहे हैं:
- Enriched Uranium का निष्कासन: ईरान के पास मौजूद अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर निकालना ताकि परमाणु हथियार बनाने की उसकी क्षमता को शून्य किया जा सके।
- Sovereignty और संवर्धन पर रोक: ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम (Uranium Enrichment Program) को पूरी तरह से बंद करवाना।
- Straight of Hormuz को खोलना: अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बाधा मुक्त करना।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: ईरान का सबसे बड़ा हथियार ईरान के लिए Straight of Hormuz उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक शक्ति (Strategic Asset) रही है। यहाँ से होने वाले यातायात को बाधित करना सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। ईरान ने बार-बार इस मार्ग को बंद करने की धमकी देकर अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाया है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि जब तक यह मार्ग पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी।
क्या अमेरिका देगा ईरान को रियायतें? विशेषज्ञों का मानना है कि एक बड़ी डील (Big Deal) सुनिश्चित करने के लिए ट्रंप प्रशासन ईरान को कुछ Economic Sanctions (आर्थिक प्रतिबंधों) में ढील या अन्य रियायतें दे सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान संवर्धन कार्यक्रम और अपनी आक्रामक विदेश नीति में कितना लचीलापन दिखाता है।
निष्कर्ष ट्रंप प्रशासन युद्ध को खींचने के पक्ष में नहीं है। उनका ध्यान Deals over Conflicts पर है। यदि जेडी वेंस इस्लामाबाद में ईरान को बातचीत की मेज पर लाने और प्रमुख शर्तों पर मनवाने में सफल रहते हैं, तो यह न केवल ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी जीत होगी, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और शांति के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगा।



































