ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सोमवार को बिसरख क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। सीईओ एनजी रवि कुमार के नेतृत्व में प्राधिकरण की टीम ने डूब प्रभावित क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त करने का संकल्प लिया है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बरसात के मौसम से पहले अधिसूचित क्षेत्रों से अवैध निर्माणों को हटाना है।
खसरा संख्या 333 और 334 पर बुलडोजर: अभियान के दौरान वर्क सर्किल तीन के अधिकारियों ने बिसरख के खसरा संख्या 333 और 334 की जमीन पर किए गए अवैध निर्माणों को निशाना बनाया। यहाँ भू-माफियाओं द्वारा की जा रही अवैध प्लॉटिंग को रोक दिया गया। कार्रवाई के अंत तक करीब 25 हजार वर्ग मीटर की बेशकीमती जमीन को कालोनाइजरों के चंगुल से छुड़ा लिया गया।
भ्रामक विज्ञापनों से बचाव: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सुमित यादव ने जनता को सावधान करते हुए कहा कि किसी भी अवैध कॉलोनी में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी लुभावने ऑफर के झांसे में न आएं और जमीन खरीदने से पहले प्राधिकरण से उसकी वैधता की पुष्टि जरूर कर लें।
प्रबंधन का कड़ा रुख: प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक प्रभात शंकर और प्रबंधक प्रशांत समाधिया ने मौके पर ही कालोनाइजरों को सख्त चेतावनी दी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि मुक्त कराई गई जमीन पर दोबारा कब्जा करने का प्रयास किया गया, तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। प्राधिकरण की टीम अवैध कब्जों की निगरानी लगातार कर रही है।
पूर्व की कार्यवाहियां: यह पहली बार नहीं है जब वर्क सर्किल तीन ने अवैध निर्माण पर कार्रवाई की है। इससे पूर्व तिलपता, रोजा याकूबपुर, खेड़ा चौगानपुर और चिपियाना बुजुर्ग जैसे इलाकों में भी अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाए जा चुके हैं। प्राधिकरण का स्पष्ट संदेश है कि अधिसूचित क्षेत्र में बिना अनुमति के एक ईंट भी नहीं लगने दी जाएगी।
सीईओ के सख्त निर्देश: सीईओ एनजी रवि कुमार ने अपनी टीम को निर्देश दिए हैं कि अतिक्रमणकारियों के साथ कोई रियायत न बरती जाए। मानसून के मद्देनजर डूब क्षेत्रों की सुरक्षा और वहां से अतिक्रमण हटाना प्राथमिकता है। प्राधिकरण की यह सक्रियता क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग करने वाले कालोनाइजरों के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखी जा रही है।



































