पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल और सोशल मीडिया का प्रभाव घटना के तुरंत बाद जब पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाई, तो कथित तौर पर स्थानीय पुलिस ने शुरुआत में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। हार मानकर पीड़िता ने अपना जख्मी हालत वाला वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वीडियो के वायरल होते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। वीडियो में महिला स्पष्ट रूप से अपनी आपबीती सुना रही है और अपनी जान की भीख मांग रही है।
एसीपी चकेरी का हस्तक्षेप और कानूनी प्रक्रिया मामला चर्चा में आने के बाद एसीपी चकेरी, अभिषेक कुमार पाण्डेय ने घटना का संज्ञान लिया। उन्होंने वायरल वीडियो की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रथम दृष्टया ससुर सुशील दुबे दोषी नजर आ रहे हैं। एसीपी ने तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने के आदेश दिए हैं। पुलिस अब इस मामले में धारा 323 (स्वैच्छिक चोट पहुँचाना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान), और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई कर रही है।
निष्कर्ष: कब रुकेगा यह सिलसिला? कानपुर की यह घटना उस कड़वे सच को उजागर करती है जहाँ शिक्षित और सेवानिवृत्त लोग भी दहेज जैसी कुप्रथा के नाम पर कानून को अपने हाथ में लेने से नहीं डरते। एक आईटी मैनेजर पति और रेलवे से रिटायर्ड ससुर होने के बावजूद घर की बहू सुरक्षित नहीं है। अब सबकी नजरें पुलिसिया जांच और न्यायालय के फैसले पर टिकी हैं कि क्या इस पीड़िता को वह न्याय मिल पाएगा जिसकी वह हकदार है।



































