खदान बिछाना आसान, हटाना नामुमकिन जैसा समुद्री युद्ध के विशेषज्ञों का मानना है कि ‘सी माइन्स’ बिछाना एक सरल प्रक्रिया है, लेकिन उन्हें हटाना (Mine Sweeping) दुनिया के सबसे जटिल सैन्य ऑपरेशनों में से एक है। ईरान के पास ऐसी कोई उन्नत तकनीक या जहाज नहीं हैं जो तेजी से इन सुरंगों को खोजकर नष्ट कर सकें। यहाँ तक कि अमेरिकी नौसेना, जिसने जंग के दौरान ईरानी नौसेना को भारी नुकसान पहुँचाया है, उसकी क्षमताएं भी इतने बड़े और अनियोजित क्षेत्र में फैली खदानों को साफ करने के लिए सीमित हो सकती हैं।
ईरान का रणनीतिक लाभ अब बना बोझ होर्मुज पर नियंत्रण ने शुरुआती दौर में ईरान को युद्ध में मजबूत स्थिति में रखा था। इसी डर के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही कम हुई और वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं। लेकिन अब यह रणनीति ईरान के लिए ही गले की फाँस बन गई है। IRGC ने जहाजों के लिए चेतावनी जारी की है और कुछ ‘सुरक्षित मार्गों’ के चार्ट साझा किए हैं, लेकिन वे मार्ग भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माने जा रहे हैं।
छोटी नावों का घातक उपयोग अमेरिका ने ईरान के बड़े युद्धपोतों को तो समुद्र में डुबो दिया, लेकिन ईरान के पास मौजूद सैकड़ों छोटी नावें अब भी बड़ी चुनौती हैं। इन्ही नावों का उपयोग करके ईरान ने रात के अंधेरे में खदानें बिछाईं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां यह अनुमान भी नहीं लगा पा रही हैं कि कुल कितनी संख्या में ये सुरंगें बिछाई गई हैं।
निष्कर्ष: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा होर्मुज की खाड़ी दुनिया की ऊर्जा जीवनरेखा (Energy Lifeline) है। यदि इन ‘अदृश्य लैंडमाइन्स’ को जल्द ही नहीं हटाया गया, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आना नामुमकिन होगा। ट्रंप प्रशासन जहाँ तेल निर्यात तेज करने पर जोर दे रहा है, वहीं ईरान की “तकनीकी अक्षमता” इस पूरे शांति प्रस्ताव को खतरे में डाल सकती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा इस्लामाबाद वार्ता का सबसे जटिल केंद्र बिंदु रहने वाला है।



































