कानपुर शहर को झकझोर देने वाली दुखद और हृदयविदारक घटना उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर कानपुर से एक ऐसी दर्दनाक खबर आई है जिसने हर माता-पिता और शिक्षाविदों को गहरे सोच में डाल दिया है। शहर के रतनपुर इलाके में स्थित शिवालिका भवन में रहने वाली 16 साल की एक बेहद होनहार और होशियार छात्रा वैशाली सिंह ने अपने जीवन का अंत कर लिया। अर्मापुर के प्रतिष्ठित केंद्रीय विद्यालय-1 की इस मेधावी छात्रा ने हाल ही में घोषित हुए सीबीएसई (CBSE) 10वीं बोर्ड के नतीजों में 92 प्रतिशत का बेहतरीन स्कोर हासिल किया था। बुधवार की शाम जब यह शानदार परिणाम सामने आया, तो वैशाली के परिवार और मित्रों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। लेकिन इस खुशी के पीछे का भयानक सच यह था कि वैशाली अंदर से पूरी तरह से बिखर चुकी थी। परिणाम घोषित होने के मात्र 24 घंटे के अंदर ही वैशाली ने अपने घर में फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ा दी है और छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव की पोल खोल कर रख दी है।
कमरे का भयावह दृश्य और पुलिस महकमे की तत्काल जांच यह खौफनाक वाकया गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे प्रकाश में आया। उस समय वैशाली की मां काजल अपने काम पर थीं और उन्होंने बेटी का हाल जानने के लिए उसे कई बार फोन लगाया। जब दूसरी तरफ से फोन नहीं उठा, तो उन्हें किसी अनहोनी का आभास हुआ और उन्होंने तुरंत अपने बेटे प्रिंस को वैशाली के कमरे में जाकर स्थिति देखने को कहा। प्रिंस जब घर की पहली मंजिल पर स्थित वैशाली के कमरे में गया, तो वहां फंदे से लटकती अपनी बहन की लाश देखकर उसकी चीख निकल गई। इस घटना से पूरे परिवार में चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय पनकी थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच गई। पुलिस अधिकारियों ने वीडियोग्राफी कराते हुए शव को फंदे से उतारा और उसे पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। इसके अलावा, मामले की गहराई से छानबीन करने के लिए पुलिस ने मृतका का मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिया है।
मरने से पूर्व रिकॉर्ड किए गए दिल दहला देने वाले संदेश पुलिस की प्राथमिक जांच में जब वैशाली का मोबाइल फोन चेक किया गया, तो उसमें कुछ ऐसे वॉइस मैसेज मिले जिन्होंने सभी की आंखें नम कर दीं। ये मैसेज वैशाली ने मौत को गले लगाने से ठीक पहले अपने खास दोस्तों को भेजे थे। इन रुला देने वाले संदेशों में वैशाली कह रही थी, “अब मुझसे और जीवन नहीं जिया जाएगा… मैं अंदर से मर चुकी हूं और बस एक जिंदा लाश बनकर रह गई हूं… अब इस दुनिया में रहने की मेरी कोई इच्छा नहीं है।” इसके अलावा, उसने अपने भाई प्रिंस से भी अपने मन का एक बहुत बड़ा खौफ साझा किया था। वैशाली ने कहा था कि उसे इस बात का अत्यधिक डर सताता है कि उनकी मां दिन-रात एक करके जो पैसा उन दोनों की पढ़ाई-लिखाई पर लगा रही हैं, कहीं वह पैसा पानी में न चला जाए और बर्बाद न हो जाए। यह मानसिक बोझ उसे लगातार खाए जा रहा था।
पारिवारिक जीवन की चुनौतियां और मां का अत्यंत कड़ा संघर्ष वैशाली के लिए जीवन वैसे भी बहुत आसान नहीं था, क्योंकि उसका परिवार पहले से ही नियति के कई कड़े झटकों का सामना कर रहा था। आज से ठीक दो साल पहले वैशाली के पिता वीरेंद्र सिंह का एक हादसे में देहांत हो गया था, जिससे परिवार का मुख्य सहारा छिन गया था। पति के निधन के बाद बच्चों की परवरिश का पूरा भार मां काजल पर आ गया। वह एक कपड़े के शोरूम में नौकरी करके किसी तरह घर का खर्च निकाल रही थीं। पुलिस की पूछताछ में मृतक छात्रा के भाई प्रिंस ने बताया कि पिता के अचानक चले जाने से वे दोनों भाई-बहन गहरे सदमे में थे और इसी कारण दोनों ने बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी। बाद में जब उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की, तो 11वीं में पढ़ रहे प्रिंस के नंबर परीक्षा में अच्छे नहीं आ पा रहे थे, जिससे घर में एक प्रकार की निराशा का माहौल बना हुआ था।
शिक्षकों के तानों से उपजा जानलेवा और गहरा मानसिक अवसाद प्रिंस के खराब प्रदर्शन का खामियाजा निर्दोष वैशाली को अपने स्कूल में भुगतना पड़ रहा था। परिवार का आरोप है कि केंद्रीय विद्यालय के कुछ शिक्षकों ने वैशाली को इसके लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। ये शिक्षक कक्षा में बाकी बच्चों के सामने वैशाली को ताने मारते हुए कहते थे, “तुम भी तो प्रिंस की ही सगी बहन हो, उसी की तरह स्कूल में बस शैतानी करती हो, यह लिख कर ले लो कि तुम्हारे भी बोर्ड में कभी अच्छे नंबर नहीं आएंगे।” अपने ही गुरुजनों द्वारा किए जा रहे इस लगातार अपमान और मानसिक हैरासमेंट ने वैशाली को एक गहरे अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार बना दिया। वह स्कूल से लौटकर अक्सर अपनी मां की गोद में सिर रखकर फूट-फूट कर रोती थी और स्कूल में मिलने वाले इस असहनीय दर्द के बारे में बताती थी।
शानदार अंकों के बावजूद आंतरिक हार और कानूनी कार्यवाही की स्थिति बेटी को इस कदर टूटता देख मां काजल ने उसका हौसला बढ़ाया और कहा कि वह किसी की बातों पर ध्यान न दे, बल्कि मन लगाकर पढ़ाई करे और दुनिया को अपनी काबिलियत साबित करे। मां की प्रेरणा से वैशाली ने दिन-रात एक कर दिया। वह एक ही बात दोहराती थी, “जिन भी टीचरों ने मेरा मजाक उड़ाया है और मुझे गलत बोला है, मैं उन्हें अपनी सफलता से साबित करके दिखाऊंगी।” उसने पढ़ाई में अपना 100 प्रतिशत दिया और टेस्ट में उसके नंबर भी शानदार आने लगे। लेकिन शिक्षकों के दुर्व्यवहार का घाव उसके मन पर इतना गहरा था कि 92% अंक जैसी बड़ी सफलता हासिल करने के बाद भी वह खुद को एक हारी हुई और असफल लड़की ही मान रही थी। इसी गहरे दर्द के कारण उसने लोगों से बातचीत बंद कर दी थी और एकांत में रहने लगी थी, जो अंततः उसकी मौत का कारण बना। भाई का साफ आरोप है कि शिक्षकों के टॉर्चर ने उसकी जान ली है। वहीं, स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस पूरे प्रकरण में अभी तक पीड़ित परिवार की तरफ से कोई लिखित शिकायत (तहरीर) नहीं दी गई है। जैसे ही कोई औपचारिक शिकायत मिलेगी, कानून के अनुसार सख्त से सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।



































