वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही और नौसैनिक नाकाबंदी पर खींचतान अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के सबसे अहम मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के वर्तमान हालात पर तेहरान और वाशिंगटन के दृष्टिकोण बिल्कुल अलग-अलग नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां ईरानी प्रशासन ने यह घोषणा करके दुनिया को आश्वस्त करने का प्रयास किया है कि होर्मुज का जलमार्ग अब सभी कमर्शियल और मालवाहक जहाजों के लिए बिना किसी रुकावट के खोल दिया गया है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख इस पर काफी सख्त है। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में यह ऐलान किया है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते के हर एक बिंदु पर शत-प्रतिशत मुहर नहीं लग जाती, तब तक उस इलाके में अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाई गई कड़ी सुरक्षा नाकाबंदी पूरी तरह से बरकरार रहेगी।
लेबनान के विकास का वादा और ईरानी समझौते से उसकी दूरी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में एक और महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक बिंदु को स्पष्ट करते हुए कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच जो भी कूटनीतिक संधि आकार ले रही है, उसे लेबनान के मामलों के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि लेबनान का मुद्दा इस समझौते के दायरे से पूरी तरह बाहर है। इसके बावजूद, ट्रंप ने लेबनान की आवाम को एक बहुत ही मजबूत संदेश देते हुए कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका लेबनान में फिर से राजनीतिक स्थिरता लाने और उसे एक सशक्त देश के रूप में खड़ा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने वादा करते हुए कहा कि अमेरिकी प्रशासन लेबनान को उसका खोया हुआ गौरव लौटाने और उसे ‘फिर से महान बनाने’ में पूरी मदद करेगा।
शांति समझौते के तहत संवर्धित यूरेनियम को निकालने की संयुक्त योजना ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम के संदर्भ में बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने इस शांति समझौते के एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील हिस्से का खुलासा किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि इस नई संधि की शर्तों के मुताबिक, ईरान को अपने परमाणु संयंत्रों में मौजूद एनरिच्ड यूरेनियम को वहां से निकालना होगा। इस पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए दोनों देशों की साझा सहमति से विशेष उत्खनन मशीनों का प्रयोग किया जाएगा, ताकि यूरेनियम को निकालने का काम बिना किसी खतरे के सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके।
सुरक्षा जांच के लिए अमेरिका को सौंपने के दावे पर तेहरान का इनकार इस संवेदनशील परमाणु सामग्री के भविष्य के बारे में बात करते हुए ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान की खदानों और साइटों से निकाले गए इस यूरेनियम को सीधे अमेरिका की धरती पर लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि अमेरिकी एजेंसियां इसकी व्यापक सुरक्षा जांच कर सकें। अपनी सुरक्षा नीतियों का बचाव करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपनी और अपने सहयोगियों की सुरक्षा को लेकर कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। लेकिन दूसरी तरफ, जैसे ही ट्रंप का यह बयान मीडिया में आया, ईरान के विदेश मंत्रालय ने तत्काल रूप से इस पूरे दावे को भ्रामक बताते हुए इसका पूरी तरह से खंडन कर दिया।
शांति प्रयासों में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल की सराहना मध्य पूर्व के इस पूरे कूटनीतिक घटनाक्रम को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण एशिया के अहम देश पाकिस्तान के नेतृत्व की भी काफी सराहना की। उन्होंने अपने संबोधन में विशेष रूप से पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री और सेना के फील्ड मार्शल की तरफ इशारा करते हुए उन्हें बेहद ‘अद्भुत और शानदार व्यक्ति’ बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट किया कि इस पूरे इलाके में शांति और स्थिरता कायम करने के जो भी प्रयास किए जा रहे हैं, उसमें पाकिस्तानी नेतृत्व की तरफ से मिलने वाले महत्वपूर्ण सहयोग के लिए अमेरिका उनका बहुत आभारी है।
वैश्विक स्तर पर युद्धों को खत्म करने का राष्ट्रपति का कूटनीतिक दावा अपनी सरकार की विदेश नीति की भव्य सफलताओं का विवरण देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उन्होंने अब तक दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे 8 भयंकर युद्धों पर सफलतापूर्वक लगाम लगाई है। अपनी इस कूटनीतिक जीत का श्रेय लेते हुए उन्होंने कहा कि उनकी नीतियां हमेशा से शांति स्थापना की रही हैं। ट्रंप ने आगे स्पष्ट किया कि यदि ईरान के साथ चल रही इस बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता और लेबनान में स्थिरता लाने के उनके नए प्रयासों को भी अंतिम रूप मिल जाता है, तो उनके कार्यकाल में समाप्त किए गए कुल युद्धों की संख्या आठ से बढ़कर सीधे दस हो जाएगी, जो एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।



































