श्रम नियमों की अनदेखी पर प्रशासन का चला हंटर उत्तर प्रदेश में काम करने वाले मजदूर वर्ग को उनका वाजिब हक दिलाने और शोषण मुक्त वातावरण तैयार करने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। राज्य प्रशासन ने श्रम अधिकारों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ एक बहुत बड़े अभियान की शुरुआत कर दी है। इसी सख्त नीति का पालन करते हुए गौतमबुद्ध नगर के श्रम विभाग ने जिले में नियमों को ताक पर रखकर काम करने वाले 24 विभिन्न कारखानों और उनसे संबंध रखने वाले 203 ठेकेदारों (संविदाकारों) के खिलाफ एक बहुत ही कड़ी कानूनी कार्रवाई का शंखनाद कर दिया है। इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के तहत इन सभी दोषी ठेकेदारों के व्यापारिक लाइसेंस को हमेशा के लिए रद्द करने, उन पर लगाए गए आर्थिक दंड की वसूली करने और उन्हें भविष्य के किसी भी काम के लिए ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया तेजी से आरंभ कर दी गई है।
उपद्रवियों और शोषक ठेकेदारों पर एक करोड़ से अधिक का जुर्माना गौतमबुद्धनगर क्षेत्र के अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी ने इस कार्रवाई की विस्तृत जानकारी मीडिया के साथ साझा की है। उन्होंने बताया कि बीते दिनों औद्योगिक क्षेत्रों में हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान जो हिंसक तोड़फोड़ की घटनाएं घटित हुई थीं, उनकी बहुत ही सूक्ष्मता से जांच की गई। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि इस पूरे उपद्रव को भड़काने में कई संविदाकारों की भूमिका बेहद संदिग्ध और नकारात्मक रही है। इतना ही नहीं, जिन ठेकेदारों ने श्रम विभाग के कड़े कानूनों का उल्लंघन करते हुए गरीब मजदूरों को उनके हकों और देय लाभों से जानबूझकर दूर रखा, उनके विरुद्ध प्रशासन ने 1 करोड़ 16 लाख 5 हजार 67 रुपये (1,16,05,067 रुपये) का भारी भरकम जुर्माना लगाया है। प्रशासन ने इस पेनल्टी का रिकवरी नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि वसूल की गई यह पूरी रकम सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में जमा की जाएगी।
श्रमिकों के हकों को लेकर प्रशासन की जीरो टॉलरेंस की नीति अपर श्रमायुक्त ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी स्पष्ट किया है कि जिन 203 ठेकेदारों पर कार्रवाई हुई है, मामला सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं रहेगा। प्रशासन की नजर उन सभी लोगों पर है जो मजदूरों का खून चूस रहे हैं। विभाग की एक विशेष टीम अभी भी जिले के अन्य सभी शेष संविदाकारों की कार्यप्रणाली की गहनता से पहचान कर रही है। जिन ठेकेदारों ने भी नियम-कायदों का उल्लंघन किया होगा, उनके विरुद्ध भी बिना किसी भेदभाव के ऐसी ही कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार और स्थानीय प्रशासन अपने इस कदम से पूरे औद्योगिक जगत को यह बिल्कुल स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश के भीतर श्रमिकों के मौलिक अधिकारों, उनके स्वास्थ्य या उनके वेतन के साथ होने वाली किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार या अनदेखी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गाजियाबाद और नोएडा में वेतन वृद्धि का नया और ऐतिहासिक आदेश बीते कुछ समय से लगातार बढ़ती महंगाई और वेतन न बढ़ने के कारण श्रमिकों के बीच जो भारी असंतोष पनप रहा था, उसे शांत करने के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद ही ऐतिहासिक और बड़ा निर्णय लिया है। अपर श्रमायुक्त के अनुसार, शासन स्तर पर बनाई गई एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सिफारिशों पर मुहर लगाते हुए गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद जनपदों में चल रहे 74 अनुसूचित नियोजनों के श्रमिकों की सैलरी में सीधे 21 प्रतिशत का भारी इजाफा कर दिया गया है। सरकार द्वारा जारी यह नई और संशोधित वेतन वृद्धि 1 अप्रैल 2026 से पूरे क्षेत्र में लागू मानी जाएगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि कंपनियों को यह बढ़ा हुआ वेतन हर हाल में मई महीने की 7 से 10 तारीख के बीच मजदूरों को बांटना होगा। यह वेतन वृद्धि किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि कारखानों में काम करने वाले स्थायी कर्मचारियों के साथ-साथ ठेके पर रखे गए संविदा श्रमिकों पर भी समान रूप से लागू होगी।
मनमानी कटौतियों पर पूर्ण पाबंदी और दोगुना ओवरटाइम भुगतान वेतन बढ़ाने के साथ ही प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि चालाक नियोक्ता किसी दूसरे बहाने से मजदूरों का पैसा न काट लें। विभाग ने सभी औद्योगिक इकाइयों को यह साफ तौर पर निर्देशित किया है कि अब किसी भी श्रमिक की मासिक पगार से केवल ईपीएफ (भविष्य निधि) और ईएसआई (बीमा) का ही कानूनी पैसा काटा जा सकता है। इसके अलावा किसी भी तरह की कोई अन्य कटौती पूरी तरह से गैर-कानूनी होगी और ऐसा करने वाले प्रबंधन के खिलाफ पुलिस में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, श्रम विभाग ने नए सिरे से यह नियम भी लागू कर दिया है कि यदि कोई मजदूर अपने निर्धारित समय से अधिक देर तक फैक्ट्री में काम करता है, तो उसे उस ओवरटाइम का पैसा साधारण दर के बजाय दोगुनी दर से दिया जाएगा। इसके साथ ही हर श्रमिक का वार्षिक बोनस और ग्रेच्युटी जैसे तमाम वैधानिक अधिकार भी सुरक्षित किए जाएंगे। यदि किसी मजदूर का वेतन समय पर नहीं आता है या ठेकेदार कम पैसे देता है, तो इसके लिए ठेकेदार के साथ-साथ उस फैक्ट्री का असली मालिक भी बराबर का जिम्मेदार माना जाएगा।
औद्योगिक शांति बनाए रखने के लिए व्यापारिक संगठनों का पूर्ण सहयोग राज्य सरकार द्वारा उठाए गए इन सख्त कदमों और जारी की गई विस्तृत गाइडलाइंस का असर अब जमीन पर भी साफ तौर पर दिखने लगा है। जनपद की तमाम छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों और फैक्ट्रियों ने शासन के निर्देशों का सम्मान करते हुए श्रमिकों को नई न्यूनतम वेतन वृद्धि के अनुसार भुगतान करना शुरू कर दिया है। इस बदलाव को शांतिपूर्ण तरीके से लागू करवाने में जिले के तमाम प्रमुख उद्यमी संगठनों और व्यापार मंडलों की भूमिका बहुत ही सकारात्मक रही है। ये सभी व्यापारिक संगठन एक जिम्मेदारी लेते हुए यह प्रयास कर रहे हैं कि जिले की हर एक फैक्ट्री इन नियमों का शत-प्रतिशत पालन करे। इसके लिए बकायदा व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से जरूरी संदेश, जागरूकता वाले ऑडियो और वीडियो क्लिप प्रसारित किए जा रहे हैं ताकि कोई भी फैक्ट्री मालिक सरकार की नई गाइडलाइंस से अनजान न रहे। उद्यमी संगठनों द्वारा की जा रही यह मेहनत और प्रयास अत्यधिक सराहनीय है, क्योंकि इसी की बदौलत जिले में टकराव टल गया है और एक बेहतर औद्योगिक सौहार्द तथा स्थायी शांति का निर्माण हो रहा है।



































