पश्चिम एशिया के युद्ध संकट के बीच भारत का बड़ा कूटनीतिक कदम इस समय समूचा मध्य-पूर्व और पश्चिम एशिया का इलाका एक बेहद खतरनाक और मारक युद्ध की चपेट में है, जिसकी वजह से वैश्विक स्तर पर भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस जटिल और संघर्षपूर्ण माहौल के बीच, भारत ने कूटनीतिक सक्रियता दिखाते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने रविवार को सऊदी अरब के राजधानी शहर रियाद का एक विशेष दौरा किया, जहां उन्होंने सऊदी हुकूमत के वरिष्ठ और शीर्ष नेताओं के साथ कई अहम वार्ताएं कीं। एनएसए डोभाल की इस महत्वपूर्ण यात्रा का केंद्रीय लक्ष्य इस वैश्विक संकट की घड़ी में भारत और सऊदी अरब के बीच मौजूद द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करना तथा भविष्य की चुनौतियों के लिए दोनों देशों के आपसी तालमेल को बेहतर बनाना है।
द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती और क्षेत्रीय सुरक्षा पर विस्तृत मंथन रियाद की इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान, भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सऊदी अरब के बड़े नेताओं के बीच संवाद का एक व्यापक दौर चला। इस उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ता के दौरान मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में भड़के हुए वर्तमान हिंसक संघर्ष और पूरे क्षेत्र की लगातार बिगड़ती हुई सुरक्षा स्थिति पर गहराई से विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की और समाधान खोजने पर बल दिया। इसके अलावा, बैठक के दौरान भारत और सऊदी अरब ने अपने-अपने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आपसी हितों से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी गंभीरता से बातचीत की, ताकि दोनों देश एक साथ मिलकर इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का मजबूती से सामना कर सकें।
राजदूत सुहेल खान और सऊदी उप मंत्री द्वारा हवाई अड्डे पर अगवानी रियाद में अपने इस अहम कूटनीतिक मिशन का आगाज करने के लिए एनएसए अजीत डोभाल रविवार को रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे। वहां पहुंचते ही उनका बेहद शानदार और औपचारिक तरीके से स्वागत किया गया। हवाई अड्डे पर डोभाल की अगवानी करने के लिए सऊदी अरब में भारत के वर्तमान राजदूत सुहेल खान मौजूद थे। उनके साथ ही सऊदी अरब सरकार की ओर से राजनीतिक मामलों के उप मंत्री सऊद अल-साती ने भी डोभाल का गर्मजोशी से स्वागत किया। हवाई अड्डे पर स्वागत की इस औपचारिक प्रक्रिया के संपन्न होने के तुरंत बाद, अजीत डोभाल अपने कूटनीतिक एजेंडे के तहत सऊदी अरब के उच्चाधिकारियों और मंत्रियों के साथ निर्धारित बैठकों के दौर में शामिल होने के लिए रवाना हो गए।
विदेश मंत्री फैजल और ऊर्जा मंत्री सहित शीर्ष नेतृत्व से संवाद अपनी इस रियाद यात्रा के दौरान, एनएसए डोभाल ने सऊदी अरब के शासन तंत्र के सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली मंत्रियों के साथ सीधी बातचीत की। उन्होंने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैजल बिन फरहान से मुलाकात कर द्विपक्षीय कूटनीति पर चर्चा की। इसके बाद उनकी एक अहम बैठक सऊदी के ऊर्जा मंत्री अब्दुलअजीज बिन सलमान के साथ भी हुई। साथ ही, उन्होंने सऊदी अरब के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुसाइद अल-ऐबान के साथ भी क्षेत्रीय सुरक्षा के मसलों पर व्यापक विमर्श किया। इन अहम मुलाकातों के संबंध में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर आधिकारिक तौर पर जानकारी साझा की। दूतावास की पोस्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया कि इन सभी बैठकों के दौरान द्विपक्षीय सहयोग, मध्य-पूर्व की मौजूदा क्षेत्रीय स्थिति और दोनों देशों के साझा हितों के विविध मुद्दों पर व्यापक रूप से चर्चा की गई।
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद की मध्यस्थता का नाकाम प्रयास राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल की इस सऊदी यात्रा का कूटनीतिक महत्व इसलिए भी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है क्योंकि यह ऐसे वक्त पर हो रही है जब कूटनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि पाकिस्तान इस हफ्ते पश्चिम एशिया के युद्ध को शांत करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता की मेजबानी कर सकता है। यह ध्यान देने योग्य तथ्य है कि इससे पूर्व भी 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की धरती पर अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत आयोजित की गई थी। हालांकि, पाकिस्तान का वह मध्यस्थता का प्रयास पूरी तरह से विफल साबित हुआ था और वार्ता बिना किसी ठोस सहमति या समझौते के ही बेनतीजा समाप्त हो गई थी। इस विफलता के बाद पूरे क्षेत्र में एक नई कूटनीतिक होड़ मच गई है।
प्रवासी भारतीयों की हिफाजत और नए सहयोगियों के साथ रणनीतिक साझेदारी पाकिस्तान के शांति वार्ता कराने के असफल प्रयासों के बाद पैदा हुई स्थिति को देखते हुए, भारत ने अपनी कूटनीतिक रणनीति को नए सिरे से धार देनी शुरू कर दी है। भारत अब तेजी से मिडिल-ईस्ट में अपने पुराने सहयोगियों के साथ-साथ रणनीतिक और द्विपक्षीय संबंधों को एक नए और ज्यादा प्रभावी स्वरूप में विकसित कर रहा है। इस पूरी कूटनीतिक रणनीति के केंद्र में भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि खाड़ी देशों के अशांत क्षेत्रों में रह रहे और काम कर रहे लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा हर कीमत पर सुनिश्चित की जाए। इसी उद्देश्य की पूर्ति और अपने हितों की रक्षा के लिए भारत खाड़ी देशों के साथ अपने द्विपक्षीय सहयोग को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने और उसे और अधिक मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।



































