समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता की मुश्किलें और बढ़ीं, जेल में कटेगा लंबा वक्त उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में अपनी एक अलग धमक रखने वाले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके पुत्र अब्दुल्लाह आजम पर कानून का शिकंजा और भी ज्यादा कस गया है। अदालत की तरफ से उन्हें एक बहुत बड़ा झटका लगा है, जिसने उनके राजनीतिक और निजी जीवन में भूचाल ला दिया है। चर्चित दो पैन कार्ड मामले में निचली अदालत से मिली सजा को चुनौती देने वाली उन दोनों की याचिकाओं को कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों की सजा को जस का तस बरकरार रखा है। इस न्यायिक फैसले का सीधा और स्पष्ट अर्थ यह है कि पिता और पुत्र, दोनों को ही अब एक बहुत लंबे समय तक जेल की चारदीवारी के भीतर ही अपनी जिंदगी के दिन काटने होंगे और निकट भविष्य में उन्हें कोई बड़ी कानूनी राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
सजा के खिलाफ दायर अपील पर रामपुर की अदालत का सख्त फैसला यह पूरा मामला अब्दुल्लाह आजम के नाम पर बने दो फर्जी पैन कार्डों से जुड़ा हुआ है। इस मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मंत्री आजम खान और उनके विधायक बेटे अब्दुल्लाह आजम ने सजा से बचने के लिए ऊपरी अदालत में अपील दायर की थी। आज रामपुर की सेशन कोर्ट ने इस बहुचर्चित अपील पर अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुना दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता और सबूतों की ठोस बुनियाद को देखते हुए पिता-पुत्र द्वारा दी गई दलीलों को अमान्य कर दिया। अदालत ने इस मामले में दोनों की याचिका को पूरी तरह से निरस्त कराते हुए उनके खिलाफ दी गई सजा को बरकरार रखा है, जिससे उनकी सभी उम्मीदें टूट गई हैं।
अलग-अलग जन्मतिथि और दो पैन कार्ड बनवाने का धोखाधड़ी का आरोप आजम खान और उनके बेटे के खिलाफ चल रही इस लंबी कानूनी जंग की नींव वर्ष 2019 में रखी गई थी। यह मुकदमा भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर स्थानीय नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर दर्ज किया गया था। इस एफआईआर में यह बेहद गंभीर आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्लाह आजम ने अपनी अलग-अलग जन्मतिथियों (DOB) का सहारा लेकर धोखाधड़ी के जरिए दो अलग-अलग पैन कार्ड बनवाए हैं। जब इस मामले की कानूनी और विभागीय जांच ने जोर पकड़ा, तो सिर्फ अब्दुल्लाह आजम ही नहीं, बल्कि इस पूरे फर्जीवाड़े के प्रकरण में उनके पिता आजम खान की संदिग्ध भूमिका भी जांच एजेंसियों के रडार और दायरे में आ गई, जिसके बाद दोनों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया।
नवंबर 2025 में एमपी-एमएलए अदालत का ऐतिहासिक निर्णय और सजा इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब विशेष अदालत ने इस पर अपना फैसला सुनाया। इससे पहले, सांसदों और विधायकों के मामलों की सुनवाई करने वाली स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को इस संगीन मामले में अपना निर्णायक फैसला सुनाते हुए आजम खान और अब्दुल्लाह आजम दोनों को ही धोखाधड़ी का दोषी ठहराया था। अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों दोषियों को सात-सात साल की लंबी कैद (कारावास) की सजा मुकर्रर की थी। इसके अलावा, अदालत ने दोनों पर आर्थिक दंड भी लगाया था और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया था। यह फैसला उनके लिए एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी आघात था।
अपील के बावजूद पिता-पुत्र का रामपुर जिला जेल में प्रवास जारी एमपी-एमएलए कोर्ट के इस कठोर फैसले और सात वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद, आजम खान और अब्दुल्लाह आजम ने हार नहीं मानी और 25 नवंबर 2025 को दोनों की ओर से अपने बचाव में सेशन कोर्ट (सत्र न्यायालय) में एक विधिवत अपील दाखिल की गई थी। हालांकि, अपील के बावजूद उन्हें जेल से रिहाई नहीं मिली। फिलहाल की स्थिति यह है कि आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम दोनों ही रामपुर की जिला जेल में कैदी के रूप में निरुद्ध हैं और अपनी सजा काट रहे हैं। सेशन कोर्ट द्वारा उनकी अपील खारिज कर दिए जाने के बाद अब उनका यह जेल प्रवास और भी लंबा और कठिन हो गया है।
सितंबर की रिहाई के बाद महज 55 दिनों में नवंबर में दोबारा जेल वापसी राजनीतिक दिग्गज आजम खान के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। गौरतलब है कि आजम खान नवंबर 2025 से ही लगातार जेल में बंद हैं। अदालत ने उन्हें इसी फर्जी पैन कार्ड मामले में सात वर्ष की सजा सुनाई थी जिसके कारण उन्हें जेल जाना पड़ा। इस घटनाक्रम का एक पहलू यह भी है कि आजम खान ने कई अन्य मामलों में जमानत पाकर सितंबर 2025 में ही जेल से बाहर की दुनिया देखी थी और वे रिहा हुए थे। लेकिन उनकी यह आजादी बहुत ही छोटे समय के लिए थी। जेल से छूटने के मात्र 55 दिन बाद ही, 18 नवंबर 2025 को अदालत के इस नए फैसले ने उन्हें तगड़ा झटका दिया और उन्हें वापस जेल की चारदीवारी में लौटना पड़ा।



































